पश्चिम बंगाल चुनाव में पहली बार दो चरणों में मतदान होने जा रहा है. पहली बार ही सभी बूथों से मतदान का लाइव प्रसारण होगा, जिसे चुनाव आयोग वेबकास्टिंग कह रहा है. और ये सब सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती का फैसला पहले ही कर लिया था. सुरक्षा बलों की 480 कंपनियां तो पश्चिम बंगाल पहुंच भी चुकी हैं. जिनमें करीब डेढ़ से पौने दो लाख सुरक्षाकर्मी होंगे और, पहले चरण के चुनाव से पहले सभी कंपनियां मोर्चा संभाल लेंगी.
70 के दशक से देखें तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के बिना कोई भी चुनाव पूरा हुआ ही नहीं है. और सभी संस्थाओं के लिए हिंसा-मुक्त चुनाव असंभव सा बन गया है. लेकिन SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर रहा चुनाव आयोग इस बार चुनावी हिंसा रोकने के हर संभव उपाय पहले से ही कर रहा है.
सुरक्षा इंतजामों के साथ साथ चुनाव आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा मुक्त चुनाव कराने के लिए आयकर विभाग और ईडी तक को निर्देश दिए हैं, और किसी राजनीतिक दल की कहीं कोई स्कोप न रहे, इसके लिए पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव और डीजीपी सहित कई आला अफसरों को बदल भी दिया है.
सुरक्षा इंतजाम चाक चौबंद
मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कर दिया है कि हिंसा को चुनाव आयोग बर्दाश्त नहीं करेगा. ज्ञानेश कुमार ने कहा, अभी तक जो घटनाएं हुईं, वे आचार संहिता लागू करने के पहले हुईं. आज के बाद एक्शन लिया जाएगा.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए सुरक्षा बलों की 480 कंपनियां पहले ही पहुंच चुकी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 10 मार्च तक पश्चिम बंगाल में CAPF की कुल 480 कंपनियां तैनात की जानी थीं. इनमें 240 कंपनियों के लिए डेडलाइन 1 मार्च थी. पहले फेज में सीआरपीएफ की 110 कंपनियां, बीएसएफ की 55 कंपनियां, सीआईएसएफ की 21 कंपनियां, आईटीबीपी की 27 कंपनियां और सशस्त्र सीमा बल की 27 कंपनियां शामिल थीं. ऐसे ही, दूसरे चरण में सीआरपीएफ की 120 कंपनियां, बीएसएफ की 65 कंपनियां, सीआईएसएफ की 16 कंपनियां, आईटीबीपी की 20 कंपनियां और एसएसबी की 19 कंपनियों की तैनाती हो जानी थी.
चुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि CAPF की आवाजाही और तैनाती का काम सीआरपीएफ द्वारा कोऑर्डिनेट किया जाएगा. और पश्चिम बंगाल प्रशासन को भी चुनाव आयोग की तरफ से साफ साफ बोल दिया गया था कि विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों को बिठाकर रखा नहीं जा सकेगा. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को पहले ही यह सुनिश्चित करने को कह दिया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान किसी एक जगह बैठे न रहें.
एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव में सुरक्षा बलों की 1,600-2,000 कंपनियां तैनात की जा सकती हैं, जिनमें 1.5 लाख से लेकर 1.8 लाख जवान और अफसर हो सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अभी 1000-2000 कंपनियों को अलग से तैनात किया जाना बाकी है, जो 23 अप्रैल को होने वाली पहले चरण की वोटिंग से पहले पहुंच जाएंगी. तब तक असम, केरलम और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए लिए वोटिंग का काम पूरा हो चुका होगा.
अब हर बूथ से वेबकास्ट
शुरुआत तो बिहार से हुई है, लेकिन अब पश्चिम बंगाल में भी पहली बार 100 फीसदी वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जा रही है. बिहार के 90 हजार से ज्यादा बूथों पर वेबकास्ट के बाद चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के सभी 80, 179 बूथों पर लाइव वेबकास्ट की व्यवस्था कराने जा रहा है - ताकि, चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा सके.
पहले सिर्फ 50 फीसदी बूथों पर ही वेबकास्ट कराया जाना अनिवार्य हुआ करता था. ऐसे बूथों में संवेदनशील क्षेत्रों को खास तरजीह दी जाती थी.
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और मजबूत निगरानी के लिए चारों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान सभी मतदान केंद्रों पर सौ फीसदी वेबकास्टिंग की सुविधा प्रदान करेगा.
आयोग ने बंगाल के आला अफसर भी बदल डाले
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सहित कई आला अफसरों को बदल दिया है. आईपीएस अफसर सिद्धनाथ गुप्ता पश्चिम बंगाल के नए डीजीपी बनाए गए हैं. अजय नंद को कोलकाता पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई है.
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव पहले ही हटाए जा चुके हैं. साथ ही, चुनाव आयोग ने 27 पुलिस इंस्पेक्टरों के भी तबादले के आदेश दिए हैं. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादलों का आदेश देते वक्त यह भी आदेश दिया कि दोनों अफसरों को किसी भी तरह के चुनाव संबंधी काम में शामिल नहीं किया जाएगा.
1993 बैच के आईएएस दुष्यंत नरियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव बनाया गया है. और, वैसे ही 1997 बैच की आईएएस संघमित्रा घोष को पश्चिम बंगाल का नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है.
हाल ही में, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दे दिया था, और उनकी जगह तमिलनाडु के गवर्नर रहे आरएन रवि को बंगाल भेजा गया है. सीवी आनंद बोस को नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया था.
पहली बार दो चरणों में चुनाव
आखिरी बार 2001 में पश्चिम बंगाल चुनाव की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए एक ही दिन मतदान हुआ था. 2006 में बढ़ाकर पांच चरणों में कराए गए - पिछली बार 2021 में तो सबसे ज्यादा 8 चरणों में विधानसभा के चुनाव कराए गए थे. 27 मार्च से शुरू होकर 29 अप्रैल तक. 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव 6 फेज में हुए थे.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आठ चरणों में चुनाव कराए जाने पर सवाल भी उठाया था. हालांकि, तब कोविड महामारी का दौर था. राजनीतिक दलों को चुनाव कैंपेन भी बीच में ही रोक देना पड़ा था.
2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव सिर्फ दो चरणों में होने जा रहा है. पहला चरण 23 अप्रैल को, और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को. पिछली बार भी 29 अप्रैल को ही आखिरी चरण के लिए मतदान हुआ था, और 2 मई को नतीजे आए थे. इस बार 4 मई को वोटों की गिनती होनी है.
पहले ज्यादा चरणों में चुनाव कराए जाने की दलील दी जाती थी, अब बिल्कुल बदल गई है. पहले कहा जाता था कि हिंसा पर काबू पाने के लिए कई चरणों में चुनाव कराए जाते हैं. और, अब रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग का मानना है कि कम चरणों में चुनाव कराए जाने से हिंसक गतिविधियों में शामिल होने वाले तत्वों पर रोक लगाई जा सकेगी, जिन्हें प्रशासन अक्सर उपद्रवी समूह मानता रहा है. एक यह भी धारणा रही है कि ये तत्व अलग-अलग चरणों में एक इलाके से दूसरे क्षेत्र में जाकर हिंसा फैलाने की कोशिश करते हैं.
चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान काला धन, ड्रग्स और गैरकानूनी प्रलोभनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों को अलर्ट और एक्टिव रहने का निर्देश दिया है. निर्वाचन आयोग का निर्देश है, अगर आयकर विभाग को 10 लाख रुपये से ज्यादा कहीं कैश मिलता है, तो आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कदम उठाए जाएं. प्रवर्तन निदेशालय को भी चुनाव आयोग ने मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर सख्त निगरानी का निर्देश दिया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया, पिछले 12 महीने में चुनाव आयोग ने पारदर्शिता लाने के लिए कई नए प्रयोग किए... पहला था SIR, जिसमें यह निश्चित किया गया कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में न रहे... दूसरा, मोबाइल फोन पोलिंग स्टेशन के बाहर ही रखा जाएगा... वोट देने के बाद उसे वापस ले सकेंगे... एक पोलिंग स्टेशन में 1200 से ज्यादा वोटर न हों.