राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे खुद को मुंबई को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. और मराठी वोट बैंक को साधने के लिए यही बात समझा भी रहे हैं. बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव के सिलसिले में शिवतीर्थ मैदान में आयोजित रैली में राज ठाकरे ने कहा, दोनों भाई इसलिए साथ आए हैं, क्योंकि मुंबई गंभीर खतरे का सामना कर रही है. रैली में दोनों भाई साथ ही थे.
15 जनवरी को होने जा रहे बीएमसी चुनाव से पहले मुंबई की आखिरी संयुक्त रैली में दोनों भाइयों ने अपने संभावित वोटर को जोर देकर समझाने की कोशिश की कि दोनों ही मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के लिए अपने मतभेदों को भुला चुके हैं.
और दोनों भाइयों के साथ आने का साइड इफेक्ट भी वही है, आसानी से समझा भी जा सकता है. निशाने पर उत्तर भारतीय ही हैं, जिन्हें मराठी भाषा और संस्कृति बचाने के नाम पर हिंदी के बहाने टार्गेट किया जा रहा है.
बीएमसी में कितने प्रभावशाली हैं 'मराठी मानुस'
देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर नगर पालिका बीएमसी में मराठी वोटर करीब 40 फीसदी है. ठाकरे बंधुओं ने मराठी वोटर्स के प्रभाव वाले 72 वार्डों और इसी तरह मुस्लिम बहुल 41 वार्डों को लेकर अपनी रणनीति बनाई है. जिसे उद्धव और राज का MaMu फैक्टर (मराठी-मुस्लिम) कहा जा रहा है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि मराठी वोट बैंक का फायदा सिर्फ उद्धव और राज को मिल रहा है. क्योंकि बीजेपी और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना ने इस रणनीति की काट के लिए पहले ही इंतेजाम कर लिए थे. शिवसेना 60 मराठी बहुल और 21 मुस्लिम बहुल वार्डों में चुनाव लड़ रही है. यानी, दोनों ओर से बराबर का जोर लगा दिया गया है. ठाकरे बंधु चाहते हैं कि मराठी वोटरों में भाजपा और शिंदे के 'हिंदुत्व' के प्रति झुकाव न रहे. इसीलिए वे बीएमसी चुनाव को उत्तर भारत और हिंदी के विरोध तक ले जाना चाह रहे हैं. जबकि उनके विरोधी इसी प्रयास को ध्वस्त करना चाहते हैं.
राजनीतिक अस्तित्व दांव पर
मुंबई रैली में राज ठाकरे अपने तरीके से समझा रहे थे कि मराठी लोगों का असली दुश्मन कौन है. और, उद्धव ठाकरे भी अपनी बारी आने पर राज ठाकरे की बातों को एनडोर्स कर रहे थे.
राज ठाकरे का कहना था, आज, ये संकट आपके दरवाजे पर आ गया है... ये मराठी मानुष के लिए आखिरी चुनाव है... अगर आपने आज ये मौका गंवा दिया, तो आप खत्म हो जाएंगे.
पूरे जोश के साथ सवालिया लहजे में बोले, मराठी और महाराष्ट्र के लिए एकजुट हो जाओ... मुंबई इतने सारे लोगों के बलिदान से मिला है. हम उनको क्या बताएंगे?
जबकि, हाल ही में आजतक के कार्यक्रम मुंबई मंथन में इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, मुंबई नहीं, उद्धव और राज ठाकरे की राजनीति खतरे में है.
...तो 'लात' मारेंगे ठाकरे बंधु!
ये तो सच है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे बरसों बाद, पहली बार मराठी भाषा को लेकर मचे बवाल के बीच ही सामने आए थे. मंच पर साथ. और, अभी जो कुछ भी हो रहा है, सारे संकेत पहले ही दे दिए थे. ये तब की बात है जब महाराष्ट्र के स्कूलों में त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किए जाने का आदेश जारी हुआ था. और, बहुत हद तक ये दोनों भाइयों के साथ आने का ही असर था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वो आदेश वापस भी ले लिया था.
लेकिन, उस सवाल का अब भी जवाब नहीं मिल पाया है कि क्या मराठी मानुष का मसला, बीएमसी चुनाव में मुद्दा बन पाया है? महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे मुंबई रैली में कहते हैं, यूपी और बिहार के लोगों को समझना चाहिए कि हिंदी आपकी भाषा नहीं है... मुझे भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर आप इसे थोपने की कोशिश करेंगे... तो मैं आपको लात मारूंगा... वो चारों तरफ से महाराष्ट्र आ रहे हैं, और आपका हिस्सा छीन रहे हैं... अगर जमीन और भाषा चली गई, तो आप खत्म हो जाएंगे.
क्या मुंबई का नाम बदल सकता है?
रैली को पहले राज ठाकरे ने ही संबोधित किया, उद्धव ठाकरे ने बाद में. उद्धव ठाकरे बीजेपी पर बंटवारे की राजनीति करने का इल्जाम लगाया और कहा, बीजेपी एक ऐसी पार्टी बन गई है जो राष्ट्र को पहले रखने के बजाय भ्रष्टाचार को पहले रखती है.
उद्धव ठाकरे कह रहे थे, लोगों से पूछो कि शिवसेना ने 25 साल में क्या किया, और वे 3 साल में कैसे मुंबई को बर्बाद कर दिया. बोले, हमने मुंबई को खून बहाकर हासिल किया गया था... ये हमला रोकने के लिए आप जैसे सैनिकों के साथ लड़ना हमारा कर्तव्य है... बालासाहेब ठाकरे ने हमें सिखाया था कि अगर कोई तुम पर हाथ उठाए तो उसका हाथ तोड़ दो.
शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का दावा है, लेकिन लहजा सवालिया ही होता है - क्या बीजेपी मुंबई का नाम बदलकर 'बंबई' रखना चाहती है?
तमिलनाडु के बीजेपी नेता के. अन्नामलाई के एक बयान को आधार बनाते हुए उद्धव ठाकरे ऐसे सवाल उठा रहे हैं. अन्नामलाई के बयान पर राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी बीजेपी पर हमला बोला था. संजय राउत का कहना था, क्या बीजेपी ये कह रही है कि मुंबई महाराष्ट्र् का शहर नहीं है?
असल में सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में तमिलनाडु बीजेपी के नेता अन्नामलाई को कहते हुए सुना जा रहा है, बॉम्बे शहर सिर्फ महाराष्ट्र का हिस्सा नहीं है, बल्कि ये अंतर्राष्ट्रीय शहर है.
अन्नामलाई की बातों से ये तो साफ है कि वो मुंबई को महाराष्ट्र तक सीमित न रखकर अंतर्राष्ट्रीय शहर बता रहे हैं, और ट्रिपल इंजन की सरकार की बात कर रहे हैं - लेकिन, वो मुंबई न बोलकर 'बॉम्बे' कह रहे हैं.
आलोचना होने पर बीजेपी का कहना है कि अन्नामलाई के बयान को संदर्भ से बाहर लिया गया. अन्नामलाई, दुनिया में मुंबई की महत्वपूर्ण स्थिति के बारे में बताना चाह रहे थे, लेकिन उन्होंने शब्द गलत चुन लिए.
अपनी बात पर कायम अन्नामलाई कहते हैं, अगर मैं कहूं कि कामराज भारत के महानतम नेताओं में से एक हैं, तो क्या इसका मतलब है कि वो अब तमिल नहीं रहे... अगर मैं कहूं कि मुंबई वर्ल्ड क्लास शहर है तो क्या इसका ये मतलब है कि इसे मराठियों ने नहीं बनाया? ये लोग नासमझ हैं.