महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव ने सारे सियासी रिश्ते ही बदल डाले हैं. जो बिछड़े थे, वे गले मिले और साथ चलने लगे हैं. जो मिलजुल कर सूबे में सरकार चला रहे हैं, वे आमने सामने एक दूसरे को टक्कर दे रहे हैं. सामने से ललकार रहे हैं. भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद जो रंग शिवसेना वाले एकनाथ शिंदे दिखा रहे थे, बीजेपी को वैसा ही तेवर फिलहाल एनसीपी वाले अजित पवार दिखा रहे हैं. अजित पवार के प्रति मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस साथी बीजेपी नेताओं की तरह तीखे तो नहीं बोल रहे हैं, लेकिन इशारों इशारों में चेतावनी भरे अंदाज में नसीहत जरूर दे रहे हैं.
कब के बिछड़े उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का साथ आना महायुति के लिए एक चुनौती तो है ही, लिहाजा वो मोर्चा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे संभाल रहे हैं. वैसे स्थानीय निकाय चुनावों ने ये संकेत तो दे ही दिया है कि ठाकरे बंधु कितने पानी में हैं.
एकनाथ शिंदे फिलहाल बीजेपी के प्रति थोड़े नरम हैं, तो अजित पवार ज्यादा ही गरम नजर आ रहे हैं - कुल मिलाकर आलम यही है कि बीएमसी और नगर निगम चुनावों ने महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति में महाभारत का माहौल बना दिया है.
अजित पवार और बीजेपी आमने सामने
डिप्टी सीएम अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन महायुति में बीजेपी के साथ साझीदार हैं. लेकिन, बीएमसी और नगर निगम चुनाव कैंपेन के दौरान अजित पवार और बीजेपी नेता एक दूसरे पर तीखे हमले भी कर रहे हैं, और गंभीर आरोप भी लगा रहे हैं.
15 जनवरी को होने जा रहे चुनाव में तीनों गठबंधन पार्टनर बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के चुनाव अलग अलग लड़ रहे हैं. अजित पवार ने बीजेपी पर हफ्ताखोरी जैसा इल्जाम लगा दिया था, जिस पर बीजेपी नेता उनको अपने गिरेबान में झांकने की सलाह देने लगे थे.
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण तो बेहद आक्रामक नजर आते हैं, लेकिन पूर्व बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले चुनाव कैंपेन में सहयोगियों को निशाना बनाने से बचने की सलाह दे रहे हैं. वैसे देवेंद्र फडणवीस का बयान आने के बाद अजित पवार को सफाई भी देनी पड़ी है.
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया, समन्वय बैठक में सामूहिक रूप से तय किया गया था कि गठबंधन के नेता चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे... इसके बावजूद अजित पवार ने सहमति का उल्लंघन किया है... भविष्य में उनको संयम बरतना चाहिए.
1. अजीत पवार ने पुणे के पिंपरी चिंचवड़ इलाके में बीजेपी पर भ्रष्टाचार और हफ्ताखोरी के गंभीर आरोप लगाए. अजीत पवार का कहना था, बीजेपी ने पिंपरी चिंचवड़ इलाके में जमकर पैसे लूटे... बीजेपी हफ्ताखोरी करती है, मेरे पास सबूत है.
बीजेपी की तरफ से प्रतिक्रिया में रविंद्र चव्हाण ने कहा कि अगर बीजेपी बोलने लगी तो अजीत पवार मुश्किल में पड़ जाएंगे. बोले, अजीत पवार को पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए. रविंद्र चव्हाण ने अजित पवार के आरोपों को चुनावी जुमले जैसा तो माना, लेकिन पूरी तरह अनुचित भी करार दिया.
2. पिंपरी चिंचवड़ में अजित पवार के लगाए आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बगैर उनका नाम लिए जवाब दिया है. बोले, जो हमसे हमारे काम का हिसाब मांग रहे हैं, उन्हें पहले आईने में अपना चेहरा देखना चाहिए... खुद क्या किया वो बताना चाहिए.
देवेंद्र फडणवीस भी मानते हैं कि ये सब चुनावी माहौल के कारण हो रहा है. कहते हैं, चुनाव के चलते माहौल गर्म हो रहा है... दादा (अजित पवार) बोल रहे हैं, हमारे दादा (चंद्रकांत पाटिल) जवाब दे रहे हैं... लेकिन, हम जितना पीछे जाएंगे, विवाद उतना ही बढ़ेगा.
देवेंद्र फडणवीस के बयान के बाद अजित पवार का रिएक्शन बता रहा है कि संदेश सही जगह पहुंचा है. अजित पवार का कहना है, मीडिया ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है... मैंने कोई आरोप नहीं लगाए... सरकार पीएम मोदी और सीएम फडणवीस के नेतृत्व में अच्छा काम कर रही है,
3. देवेंद्र फडणवीस के 'हिंदू मराठी मेयर' वाले बयान पर भी एनसीपी की नाराजगी सामने आई है. देवेंद्र फडणवीस ने तो ये बात ठाकरे बंधुओं के मराठी मेयर के चुनावी वादे के बीच बीजेपी को बैलेंस करने के लिए कहा था, लेकिन सबसे ज्यादा नागवार गुजरा है एनसीपी को.
एनसीपी नेता नवाब मलिक का कहना है, देश के नागरिक, यहां रहने वाले लोग और मुंबई के निवासी तय करेंगे कि मेयर कौन बनेगा... हम धर्म या जाति के आधार पर राजनीति नहीं करते... लोगों को समझना चाहिए कि जहां कुछ लोग धर्म या भाषा के आधार पर राजनीति करते हैं, हमारा इतिहास सभी समुदायों को अपनी राजनीति में शामिल करने को कहता है.
पवार परिवार और पार्टी का चुनावी साथ
बीजेपी के साथ अजित पवार के टकराव के कई कारण हैं. एक कारण नवाब मलिक भी हैं, और वैसे ही सीनियर पवार के प्रति अजित पवार का झुकाव भी एक कारण हैं. बीजेपी के भीतर तो विधानसभा चुनाव के पहले से ही अजित पवार से नाता तोड़ने जैसी मांगें उठती रही हैं.
पवार परिवार के राजनीतिक तौर पर एक होने को लेकर एनसीपी नेता नवाब मलिक का कहना है, दोनों एनसीपी के कार्यकर्ता चाहते है कि शरद पवार और अजित पवार एक बार फिर से साथ आ जाएं... हालांकि, ये तय करना दोनों नेताओं पर निर्भर करता है... पुणे में दोनों एनसीपी मिलकर नगर निगम चुनाव लड़ रही हैं, इससे कार्यकर्ताओं में खुशी है... लोग चाहते हैं कि चाचा-भतीजा को साथ आ जाना चाहिए... हम भी यही चाहते हैं.
अजित पवार की एनसीपी बीएमसी चुनाव महायुति से अलग होकर अकेले 92 सीटों पर लड़ रही है. और, ऐसे ही पुणे और पिंपरी चिंचवड नगर निगमों में अजित पवार अपने चाचा शरद पवार की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, काबला बीजेपी से है.
बीजेपी के साथ अजित पवार के टकराव की एक बड़ी वजह नवाब मलिक भी हैं. बीजेपी चाहती थी कि नगर निगम चुनाव में नवाब मलिक की जगह अजित पवार किसी और को आगे करें, लेकिन वो नहीं माने. अब ये मामला यहां तक पहुंच चुका है कि नवाब मलिक बीजेपी के दो नेताओं के खिलाफ चुनाव बाद नोटिस भेजने की बात कर रहे हैं.
बीजेपी नेता आशीष शेलार और अमित साटम ने कहा था कि आतंकियों से संबंध रखने वालों के साथ वे बीएमसी चुनाव में गठबंधन नहीं करेंगे. नवाब मलिक का कहना है कि बीएमसी चुनाव के बाद वो दोनों नेताओं को नोटिस भेजेंगे. और, माफी मांगने को कहेंगे. अगर नहीं माने तो कानूनी रास्ता अख्तियार करेंगे.