राहुल गांधी केरलम में महिला मुख्यमंत्री चाहते हैं. कोट्टायम के पुत्तुपल्ली में कांग्रेस कैंपेन के दौरान राहुल गांधी साइकिल चलाते देखे गए. राहुल गांधी के साथ कांग्रेस विधायक और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चांडी ओमान भी साइकिल चला रहे थे - और उसी दौरान एक जनसभा में राहुल गांधी ने केरलम में कांग्रेस की तरफ से घोषित 5 गारंटी पूरी करने का वादा किया.
रैली में ही राहुल गांधी ने केरलम के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर महिला के बैठे होने की उम्मीद भी जताई. कांग्रेस की रैली में महिलाएं और पुरुष दोनों थे. कुछ दिन पहले ही एक नर्स का जिक्र करते हुए केरलम की महिलाओं के सेवाभाव की तारीफ की थी. और कहा था, मेरे लिए, यही केरल की पहचान है.
राहुल गांधी केरलम में महिला मुख्यमंत्री ऐसे वक्त देखना चाहते हैं जब कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं की संख्या पर कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद सवाल उठा चुकी हैं, और उत्तर प्रदेश में ‘लड़की हूं... लड़ सकती हूं’ के नारे के साथ चुनाव की कमान संभाल चुकीं प्रियंका गांधी वाड्रा को असम भेज दिया गया है, जबकि वो केरलम के वायनाड से ही सांसद हैं.
केरलम में महिला मुख्यमंत्री के पक्ष में राहुल गांधी
पुत्तुपल्ली की रैली में राहुल गांधी ने कहा, हम उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब केरल की मुख्यमंत्री महिला होगी. कांग्रेस चाहती है कि केरल की महिलाएं अपने सपने पूरे करें, और उन्हें अपनी पसंद का काम करने की पूरी आजादी मिले.
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर कांग्रेस का जोर 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में विशेष रूप से देखने को मिला था. तब यूपी चुनाव की कमान संभाल रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक जबरदस्त स्लोगन भी दिया था, ‘लड़की हूं... लड़ सकती हूं’ - और काफी महिलाओं को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ाया था.
राहुल गांधी ने उसी दौरान कहा था, अभी तो ये शुरुआत है. लेकिन, आगे कभी वह बात कांग्रेस की तरफ से देखने को नहीं मिली. एक वजह चुनाव नतीजों का उत्साहवर्धक न होना भी हो सकता है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं. अच्छी बात यह रही कि एक महिला उम्मीदवार को विधानसभा जाने का मौका मिला था. आराधना मिश्रा को रामपुर खास विधानसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी, जिसे कांग्रेस के सीनियर नेता प्रमोद तिवारी का गढ़ माना जाता है. प्रमोद तिवारी वहां से 9 बार विधायक रह चुके हैं, और कांग्रेस की यह 12वीं जीत थी.
प्रियंका गांधी को चुनाव बाद यूपी से दूरी बनाते देखा गया. 2022 में ही हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए, जहां प्रियंका गांधी को एक्टिव देखा गया. कांग्रेस को जीत मिली, और सरकार बनी. 2024 के आम चुनाव में प्रियंका गांधी रायबरेली और अमेठी पर फोकस कर रही थीं, साथ ही वायनाड का भी ख्याल रहा. राहुल गांधी के रायबरेली चुन लेने के बाद वायनाड उपचुनाव जीतकर प्रियंका गांधी संसद पहुंची - और अब कांग्रेस का जोरदार बचाव करती हैं. बतौर सांसद वायनाड से जुड़े मुद्दों पर भी प्रियंका गांधी का काफी जोर रहता है, लेकिन विधानसभा चुनाव में उनका रोल असम चुनाव के साथ जोड़ दिया गया है.
हाल ही में राहुल गांधी ने दिल्ली के अस्पताल में केरलम की एक नर्स का जिक्र करते हुए केरलम की महिलाओं की तारीफ की थी. राहुल गांधी को कोझिकोड की रैली में जाना था, लेकिन सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने के कारण उन्होंने वर्चुअल रैली की. केरलम के चुनावी मुद्दों से पहले राहुल गांधी ने कहा, कल रात, मैं हॉस्पिटल में अपनी मां के कमरे में एक छोटे से सोफे पर सो रहा था... जैसे कि कोई भी बेटा अपनी मां की सेहत को लेकर परेशान रहता है, मैं भी परेशान था.
राहुल गांधी ने बताया, पूरी रात, मुझे सिर्फ एक चीज से सुकून मिला... केरल की एक नर्स जो हर घंटे मेरी मां को देखने आती थी... हर एक घंटे, वह उन्हें देखती, मुस्कुराती थी और उनका हाथ पकड़ती... मैंने सोचा, केरल की नर्सों ने कितने बेटों, बेटियों, भाइयों और बहनों को उनके सबसे मुश्किल पलों में सुकून दिया है.
फिर बोले, सुबह-सुबह, मैंने उनसे पूछा... क्या आप रात में सोती हैं? या पूरी रात काम करती हैं? उन्होंने बताया... मैं पूरी रात काम करती हूं... जब पूरी दुनिया सो रही है, केरल की औरतें, सिर्फ केरल में ही नहीं बल्कि दिल्ली में, पूरे देश में और दुनियाभर में लोगों को सुकून दे रही हैं... उनका हाथ थाम रही हैं, और उन्हें राहत महसूस करा रही हैं... मेरे लिए यही केरल की पहचान है.
पुत्तुपल्ली की रैली में जब राहुल गांधी ने महिला मुख्यमंत्री की बात की, तो भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं, जिस पर राहुल गांधी ने मजाकिया लहजे में कहा, मेरी बात पर पुरुष उतनी तालियां नहीं बजा रहे हैं.
हो सकता है, राहुल गांधी ने तालियों के बीच ही लोगों के मन की बात भी महसूस कर रहे हों. जब केरलम कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट आई तब काफी विरोध भी हुआ था. कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद भी विरोध की आवाज बनी थीं. शमा मोहम्मद का कहना था कि 92 उम्मीदवारों में से सिर्फ 9 महिलाओं को ही टिकट दिया गया. मालूम हुआ, टिकट की एक दावेदार तो शमा मोहम्मद भी थीं. 2021 के केरलम विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की 93 उम्मीदवारों की सूची में 10 महिलाओं को जगह मिली थी.
केरल में महिला मुख्यमंत्री की कितनी संभावना?
केरलम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जो गारंटी पेश की है, उसमें महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा और कॉलेज जाने वाली सभी लड़कियों को हर महीने 1 हजार रुपये दिए जाने का वादा किया गया है. कांग्रेस की गारंटी में और भी बातें शामिल हैं, लेकिन महिलाओं के हिसाब से यही दोनों हैं.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, केरल में 1.39 करोड़ महिला वोटर हैं. पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.32 करोड़ है. देखा जाए तो महिलाएं चुनावों में निर्णायक भूमिका में नजर आती हैं, लेकिन उसके बावजूद सत्ता की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब भी काफी कम है.
1. केरलम चुनाव में उम्मीदवारों की बात करें, तो 140 विधानसभा सीटों पर 457 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. उनमें महज 54 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं - यानी, 10.5 फीसदी. प्रमुख राजनीतिक दलों को मिलाकर संख्या 39 ही पहुंच रही है.
2. केरलम विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की महिला उम्मीदवारों की बात करें, तो सबसे ज्यादा बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए ने 14 महिला नेताओं को टिकट दिया है. दूसरे नंबर पर सत्ताधारी LDF गठबंधन नजर आता है, जिसने 13 महिलाओं को टिकट दिया है. और, विपक्षी UDF की तरफ से 12 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं.
3. महिलाओं को टिकट देने के मामले में कांग्रेस से आगे बीजेपी है. कांग्रेस ने 9 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, जबकि बीजेपी के टिकट पर 11 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं.
4. कांग्रेस के अलावा UDF में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 2 और रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ने एक महिला नेता को उम्मीदवार बनाया है. वैसे ही LDF में सीपीएम ने 8 और सीपीआई ने 4 महिलाओं को टिकट दिया है, केरल कांग्रेस (एम) ने भी एक महिला उम्मीदवार खड़ा किया है.
5. NDA की बात करें बीजेपी की सहयोगी भारतीय धर्म जन सेना ने एक और Twenty20 पार्टी ने भी एक ही विधानसभा सीट पर महिला उम्मीदवार खड़ा किया है.
6. अब तक सबसे ज्यादा 14 महिला विधायक 1996-2001 वाली विधानसभा में रही हैं. तब सीपीएम के ईके नयनार मुख्यमंत्री हुआ करते थे.
7. मौजूदा विधानसभा के 140 सदस्यों में महज 12 महिला विधायक हैं. और, उससे पहले 2016–2021 वाली विधानसभा में महिलाओं की संख्या सिर्फ 8 हुआ करती थी.
शिक्षा के क्षेत्र में और केरल में सामाजिक सुधार के हिसाब से देखें तो लंबे समय से महिलाओं को आगे देखा गया है. लेकिन, सत्ता की राजनीति में पुरुषों का ही दबदबा देखने को मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 के केरलम विधानसभा चुनाव में 140 में से 88 विधानसभा सीटों पर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले थे. 2021 में यह संख्या 73 रह गई, और पूरे राज्य में यह फासला जीरो पर पहुंच गया था - केरलम में राहुल गांधी की महिला मुख्यमंत्री की इच्छा तो बाद की बात है, अभी तो आने वाले रुझान पर ही नजर टिकी है.