बिहार में दही-चूड़ा भोज की परंपरा लालू प्रसाद यादव ने शुरू की थी, उसे अब उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव आगे बढ़ा रहे हैं. लालू यादव इस बार दही चूड़ा का भोज नहीं दे रहे हैं. बिहार में दही चूड़ा का राजनीतिक भोज तो कई नेताओं की तरफ से होता रहा है, लेकिन तेज प्रताप का आयोजन नया होने और सबको न्योता देने की वजह से काफी चर्चित है.
तेज प्रताप यादव ने दही चूड़ा भोज में राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित सत्ता पक्ष के नेताओं को तो बुलाया ही है, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को न्योता देने राबड़ी आवास भी पहुंचे थे. और, सोशल साइट एक्स पर तस्वीरें भी शेयर की हैं. एक तस्वीर में दोनों भाई साथ खड़े हैं, जिसमें तेज प्रताप यादव तो मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन तेजस्वी यादव गंभीर नजर आ रहे हैं. तेज प्रताप यादव ने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में लिया है, वो तस्वीर भी पोस्ट की है. तस्वीरें बता रही हैं कि तेज प्रताप यादव घर जाकर कितने खुश हैं.
दही चूड़ा भोज की राजनीतिक परंपरा से कई किस्से भी जुड़े हुए हैं. दही चूड़ा भोज बिहार में कई बार सत्ता समीकरण बदलने का बहाना भी बने हैं, और आयोजन के दौरान ही उसके संकेत महसूस किए गए हैं. तेज प्रताप का भोज भी उसी दिशा में जा रहा है, लेकिन अभी एक सवाल का सही जवाब नहीं मिला है कि क्या वो एनडीए के साथ जाएंगे?
बिहार की दही-चूड़ा में है भरपूर पॉलिटिकल डिप्लोमेसी
1. लालू यादव ने 90 के दशक में दिल्ली की डिनर डिप्लोमेसी का देशी स्वरूप दही-चूड़ा भोज के रूप में निकाला था, और कई सफल आयोजन किए. ये वो दौर था जब जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार जनता दल से अलग हुए थे, और लालू यादव बिहार की जनता के बीच पैठ मजबूत बनाने के लिए ही भोज की परंपरा की शुरुआत की.
जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने तभी दो दिन के दही चूड़ा भोज की शुरुआत की. एक दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए, और अगले दिन झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले अपने समर्थकों के लिए. मुख्यमंत्री आवास से सटे झुग्गियों के लोगों को लालू यादव प्रेम से बुलाते और अपने हाथों से परोसकर खिलाया करते थे. लालू यादव के करीबी रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी परंपरा को अपनाया, लेकिन उनका आयोजन पत्रकारों तक सीमित रहा. जेडीयू वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस परंपरा को पटना से दिल्ली पहुंचाया, और बाद में तो रामविलास पासवान जैसे नेताओं ने आगे बढ़ाया, जिसमें आगे चलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.
2. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के पिता और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान ने 2015 में दिल्ली में दही चूड़ा का भव्य भोज किया था. भोज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नितिन गडकरी और प्रकाश जावड़ेकर जैसे बीजेपी नेता शामिल हुए थे. रामविलास पासवान तो एनडीए में शामिल हो ही चुके थे, उस भोज में मजबूत संकेत ये मिले कि बिहार विधानसभा में भी बीजेपी और पासवान गठबंधन बना रहेगा. 2015 के चुनाव से पहले ही नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़कर लालू यादव से हाथ मिला लिया था.
3. महागठबंधन की सरकार थी. 2017 में मकर संक्रांति के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दही चूड़ा भोज में शामिल होने पहुंचे थे. तब राबड़ी आवास पर लालू यादव ने नीतीश कुमार को दही का टीका लगाया था, और मीडिया से कहा कि ये बीजेपी के जादू टोने से बचाने के लिए है. हालांकि, कुछ महीने बाद पता चला कि लालू का टोटका काम नहीं आया है और नीतीश कुमार लालू का साथ छोड़कर बीजेपी के पास चले गए.
4. लालू यादव चारा घोटाले में जेल में कैद थे. 2018 में लालू यादव ने दही चूड़ा भोज को आधार बनाकर जमानत हासिल करने की कोशिश की थी. 12 जनवरी, 2018 को रांची हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी खारिज होने पर गुहार लगाई, हुजूर, जमानत नहीं दीजिएगा तो दही-चूड़ा भोज कैसे देंगे? हजारों लोग आते हैं. हम नहीं रहेंगे तो बेइज्जती होगी.
हाई कोर्ट के जस्टिस शिवपाल सिंह का जवाब था, चिंता मत कीजिए. हम लोग यहीं दही-चूड़ा खाएंगे. तभी लालू प्रसाद तपाक से बोले, नहीं हुजूर. मेरे साथ भोज खाने पर लोग आपको भी बदनाम कर देंगे.
5. पिछले साल बिहार में फिर से चुनावी माहौल था. चिराग पासवान ने भी दही चूड़ा भोज किया, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी बुलाया. 2020 के चुनाव में चिराग पासवान की वजह से नुकसान उठाने के बावजूद नीतीश कुमार चीजों को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे थे. चिराग पासवान ने 14 जनवरी, 2025 को 12 बजे दिन में नीतीश कुमार को भोज के लिए न्योता दिया था. लेकिन, नीतीश कुमार 10 बजे ही पहुंच गए. तब तक चिराग पासवान भी वहां नहीं पहुंचे थे, और कुछ देर रुककर नीतीश कुमार लौट गए. बिहार चुनाव तक नीतीश ने ये सिलसिला कायम रखा. ऐसे ही अचानक वे छठ का प्रसाद लेने भी चिराग के घर पहुंचे थे, और सबको चौंका दिया था.
बहरहाल, इस बार के दही चूड़ा को लेकर आरजेडी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी राम मंडल ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के आवास पर इस बार मकर संक्रांति के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज आयोजित नहीं किया जा रहा है. तेज प्रताप यादव अब उस परंपरा को अपने तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं.
तेज प्रताप का दही-चूड़ा भोज
परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिए जाने के बाद तेज प्रताप बिहार चुनाव में तो कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन दही चूड़ा भोज ने उनको सुर्खियों में ला दिया है. पटना के 26, एम स्ट्रैंड रोड के अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भी न्योता दिया है.
अपने आयोजन से पहले तेज प्रताप यादव डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के दही चूड़ा भोज में शामिल होकर एक खास मैसेज देने की कोशिश तो की ही है. तेज प्रताप को लेकर विजय सिन्हा के सामने स्वाभाविक रूप से ये सवाल भी उठा कि क्या वो तेज प्रताप को NDA में आने का निमंत्रण देंगे?
विजय सिन्हा का जवाब था, वक्त पर सब पता चल जाएगा. और, तेज प्रताप का जवाब भी मिलता जुलता ही था, समय आने दीजिए, सब साफ हो जाएगा.
तेज प्रताप यादव ने अपने पूरे परिवार को भोज में बुलाने के साथ ही, बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव को भी न्योता दिया है, जो कभी आरजेडी के बड़े नेता हुआ करते थे. 2024 के आम चुनाव में वो मीसा भारती से चुनाव हार गए, लेकिन बिहार विधानसभा का चुनाव जीतकर मंत्री बन चुके हैं.
तेज प्रताप यादव के न्योते पर रामकृपाल यादव का कहना था, तेज प्रताप और मेरे बीच पिछले 30-35 साल से पारिवारिक रिश्ते हैं... मैंने उसे बचपन से लेकर आज तक बड़ा होते देखा है... मुझे बहुत खुशी है कि उसने मकर संक्रांति पर दही चूड़ा कार्यक्रम में अपने चाचा को बुलाया है... मैं जरूर जाऊंगा और उसे आशीर्वाद दूंगा.
खास बात ये भी है कि तेज प्रताप यादव ने अपने मामा और पूर्व सांसद साधु यादव को भी दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया है. खास बात इसलिए क्योंकि साधु यादव लंबे समय से लालू परिवार के प्रति हमलावर रुख अख्तियार किए हुए हैं. खासतौर पर तेज प्रताप यादव को लेकर. साधु यादव ने तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के बीच विवाद को लेकर भी बयान दिया था - और तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से निकाले जाने का समर्थन भी किया था.