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दर्द से तड़प रही थी प्रेग्नेंट महिला, चारपाई पर उठाकर 1KM तक दौड़े ग्रामीण, गांव के बाहर खड़ी थी एंबुलेंस

ओडिशा के कालाहांडी में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चारपाई का सहारा लेना पड़ा. गांव तक सड़क नहीं होने और कीचड़ हो जाने के कारण एंबुलेंस बाहर खड़ी रही, जबकि ग्रामीण दर्द से तड़प रही महिला को कंधों पर उठाकर करीब एक किलोमीटर तक दौड़ते रहे.

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कीचड़ भरी सड़क के कारण गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस. (Photo: Screengrab)
कीचड़ भरी सड़क के कारण गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस. (Photo: Screengrab)

गुरुवार सुबह ओडिशा के कालाहांडी जिले के मालपाड़ा गांव में हर तरफ बारिश के बाद कीचड़ पसरा हुआ था. गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला कच्चा रास्ता दलदल में बदल चुका था. इसी बीच देवानंद माझी की पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा शुरू हो चुकी थी.

परिवार वालों ने तुरंत 102 जननी एंबुलेंस को कॉल किया. उम्मीद थी कि कुछ ही देर में एंबुलेंस आएगी और ललिता को अस्पताल पहुंचा दिया जाएगा. लेकिन बारिश और टूटी सड़क ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

कुछ देर बाद एंबुलेंस तो पहुंची, लेकिन गांव तक नहीं. कीचड़ और दलदल से भरे रास्ते में वाहन फंसने का खतरा था, इसलिए एंबुलेंस चालक ने अंबागुड़ा मुख्य सड़क पर ही गाड़ी रोक दी. वहां से गांव की दूरी करीब एक किलोमीटर थी.

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इधर घर में ललिता दर्द से कराह रही थी. उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी. परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि उसे अस्पताल तक कैसे पहुंचाया जाए.

तभी गांव के कुछ लोग आगे आए. किसी ने घर से लकड़ी की चारपाई निकाली. परिवार के लोग, रिश्तेदार और गांव के युवक मिलकर ललिता को सावधानी से चारपाई पर लिटाने लगे. साथ में गांव की आशा कार्यकर्ता भी पहुंच गईं.

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यह भी पढ़ें: नोएडा: प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी महिला, EMT और ड्राइवर ने एंबुलेंस में ही कराई डिलीवरी

बारिश से रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा हो चुका था. कहीं कीचड़ था तो कहीं पानी भरा हुआ. लेकिन ग्रामीणों के कदम नहीं रुके. चार लोगों ने चारपाई को कंधों पर उठाया और एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए दौड़ शुरू हो गई.

रास्ते भर ललिता दर्द से तड़पती रही. हर किसी की नजर बस इस बात पर थी कि किसी तरह महिला को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए.

करीब एक किलोमीटर तक कीचड़ और बदहाल रास्ते से गुजरने के बाद ग्रामीण आखिरकार मुख्य सड़क तक पहुंचे, जहां एंबुलेंस उनका इंतजार कर रही थी. इसके बाद ललिता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया.

घटना के बाद गांव में प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा देखने को मिला. ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सड़क की वजह से किसी मरीज को ऐसी परेशानी उठानी पड़ी हो. पिछले साल भी इसी तरह एक मरीज को चारपाई पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ा था.

गांव वालों का आरोप है कि कई बार ब्लॉक प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सड़क बनवाने की मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला. बारिश के मौसम में गांव लगभग कट जाता है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव में सड़क और विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन हकीकत हर बारिश में सामने आ जाती है. गांव में सड़क नहीं होने की कीमत सबसे ज्यादा गरीब और बीमार लोगों को चुकानी पड़ती है. कालाहांडी की यह घटना उन सैकड़ों ग्रामीण इलाकों की तस्वीर है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुंच पाई हैं. यहां एंबुलेंस तो है, लेकिन सड़क नहीं. सरकारी योजनाएं तो हैं, लेकिन गांव तक उनका असर नहीं पहुंचता.

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