मध्य प्रदेश में युवा कांग्रेस ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई की है. 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'वोट चोरी' रैली में शामिल नहीं होने पर नौ जिला अध्यक्षों समेत 60 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है.
इस कार्रवाई की जद में मैहर जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा भी आए हैं. खास बात यह है कि सौरभ शर्मा ने रैली में शामिल नहीं हो पाने की वजह अपने परिवार में भांजे के जन्म के बाद आयोजित पारंपरिक कार्यक्रम को बताया है.
निलंबन के बाद सौरभ शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उनके बड़े भाई नितिन शर्मा के यहां बेटे का जन्म हुआ था. इसी खुशी में परिवार में 'बरहो' का पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. घर में पारिवारिक आयोजन होने की वजह से वह दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में शामिल नहीं हो सके.
सौरभ शर्मा के मुताबिक, पार्टी ने उनकी गैरमौजूदगी को अनुशासनहीनता माना और इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का फैसला उन्हें पूरी तरह स्वीकार है.
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राजोरिया ने 13वीं का दिया था हवाला
इससे पहले MP युवा कांग्रेस के निलंबित महासचिव रोहित राजोरिया ने भी अपने निलंबन को अन्यायपूर्ण बताया था. उन्होंने दावा किया कि चाचा की तेरहवीं के कार्यक्रम के कारण वह दिल्ली में हुई 'वोट चोरी' रैली में शामिल नहीं हो पाए थे. उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी संगठन को दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद बिना कारण बताओ नोटिस के उन्हें निलंबित कर दिया गया.
रोहित राजोरिया ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय किया गया है. उन्होंने कहा, "मेरे घर पर चाचा की तेरहवीं का कार्यक्रम था. ऐसे में मेरे लिए दिल्ली जाना संभव नहीं था. मैंने संगठन के पदाधिकारियों को अपनी पारिवारिक परिस्थिति की जानकारी भी दे दी थी. इसके बावजूद मुझे निलंबित कर दिया गया. संगठन को मेरी मजबूरी के बारे में पता था, फिर भी मेरे खिलाफ कार्रवाई की गई. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया गया."
60 पदाधिकारियों पर कार्रवाई से प्रदेश संगठन में हलचल
आपको बता दें कि दिल्ली की रैली में गैरमौजूदगी को लेकर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की इस कार्रवाई ने प्रदेश के संगठनात्मक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है. एक साथ 60 पदाधिकारियों को निलंबित किए जाने से साफ है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर संगठन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. फिलहाल सभी निलंबित पदाधिकारी अगले आदेश तक अपने पदों की जिम्मेदारी नहीं निभा सकेंगे.
युवा कांग्रेस की ओर से 3 नवंबर को जारी आदेश में सभी 60 पदाधिकारियों को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. यह कार्रवाई भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर की गई है. निलंबित पदाधिकारियों में नौ जिला अध्यक्ष, पांच उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं. निलंबित किए गए जिला अध्यक्षों में मैहर के सौरभ शर्मा 'लल्ला' के अलावा आगर के पृथ्वीराज चौहान, नीमच के मनमोहन शक्तावत, बुरहानपुर के अर्जुन जंगले, अनूपपुर के मानवेंद्र मिश्रा, गुना के पंचम भील, बड़वानी के आदित्य गोयल, छतरपुर के मानवेंद्र सिंह परमार और भिंड के मनीष पुरोहित शामिल हैं.
आदेश के मुताबिक, दिल्ली में आयोजित रैली जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने को कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता माना गया है. इसी आधार पर इन पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.