कूनो नेशनल पार्क के चीते एक बार फिर जंगल की सीमा लांघकर आबादी के करीब पहुंच गए हैं. इस बार मादा चीता 'वीरा' और उसका नर शावक श्योपुर जिले के डूंडीखेड़ा गांव के पास पहुंच गए, जहां दोनों ने एक बकरी का शिकार कर लिया. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों चीते ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच पेड़ के नीचे बैठकर शिकार खाते दिखाई दे रहे हैं. इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है.
मामला मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कराहल विकासखंड के डूंडीखेड़ा गांव का है. मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने गांव के बाहरी इलाके में दो चीतों को देखा. देखते ही देखते दोनों ने एक बकरी का शिकार कर लिया. इसके बाद वे काफी देर तक वहीं बैठे रहे. इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मोबाइल फोन से वीडियो बनाने लगे.
यहां देखें Video...
वन विभाग के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब वीरा और उसका शावक कूनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकले हों. दोनों पिछले कुछ समय से खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं. इससे पहले वे मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा पार कर राजस्थान के बारां जिले तक पहुंच गए थे. बाद में दोनों फिर कूनो क्षेत्र की ओर लौट आए. अब एक बार फिर गांव के पास उनकी मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
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चीतों के गांव के पास पहुंचने और बकरी का शिकार करने की सूचना मिलते ही कूनो नेशनल पार्क की ट्रैकिंग टीम और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए. टीम ने चीतों की गतिविधियों पर निगरानी शुरू कर दी और ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी.
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इंसानों पर हमले से ज्यादा अपने पालतू पशुओं की चिंता है. उनका कहना है कि अगर चीते लगातार गांवों के आसपास आते रहे तो मवेशियों को बचाना मुश्किल हो जाएगा.
DFO ने क्या कहा?
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने बताया कि सुरक्षा कारणों से खुले जंगल में घूम रहे चीतों की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि वन विभाग की ट्रैकिंग टीमें लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं और जहां भी चीते मौजूद होते हैं, वहां विभाग का स्टाफ तैनात रहता है. साथ ही स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और चीतों के करीब न जाने की सलाह दी जाती है.
फिलहाल कूनो में कितने चीते?
वन विभाग के अनुसार, फिलहाल 19 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं, जबकि 31 चीते अभी एनक्लोजर में रखे गए हैं. विभाग का कहना है कि सभी चीतों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. हालांकि गांवों के आसपास उनकी बढ़ती मौजूदगी ने स्थानीय लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है. वन विभाग लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी तैनात की जा रही हैं, ताकि इंसानों और वन्यजीवों के बीच किसी तरह का टकराव न हो.