scorecardresearch
 

ग्वालियर सड़क मरम्मत में बड़ा खेल: गुणवत्ता मानकों में फेल हुए सैंपल, 2 महीने पहले ही बन गई थी टेस्ट रिपोर्ट

ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में कई सैंपलों में बिटुमिन कंटेंट, ग्रेडिंग, घनत्व और बाइंडर कंटेंट जैसी गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आईं. जांच में DPR की टेस्ट रिपोर्ट, सैंपल की लोकेशन और तारीखों को लेकर भी सवाल उठे.

Advertisement
X
MP हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की फजीहत.(Photo-ITG)
MP हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की फजीहत.(Photo-ITG)

ग्वालियर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में 18 सितंबर को जांच रिपोर्ट और नगर निगम के सड़क मरम्मत से जुड़े दस्तावेजों से कई अहम बातें सामने आईं. कुलदीप नर्सरी से फूलबाग चौराहे तक सड़क से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश हुई. रिपोर्ट में कई सैंपल बिटुमिन कंटेंट, ग्रेडिंग, घनत्व और बाइंडर कंटेंट जैसे गुणवत्ता मानकों में फेल पाए गए.

सैंपल 1-A, 2-A, 3-A, 4-A, 5-A, 6-A, 7-A और 8-A समेत कई नमूनों में बिटुमिन कंटेंट की कमी सामने आई. कहीं घनत्व और बाइंडर कंटेंट फेल हुआ, तो कहीं ग्रेडिंग में गड़बड़ी मिली. कई सैंपलों में CRM भी नहीं मिला. हालांकि, कुछ सैंपल OMC, MDD और CBR जैसे टेस्ट में पास भी हुए. इसलिए रिपोर्ट का सीधा मतलब पूरी सड़क को फेल घोषित करना नहीं, बल्कि अलग-अलग हिस्सों और मानकों में गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आना है.

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई स्थानों के रिकॉर्ड में अर्थवर्क किए जाने का उल्लेख नहीं मिला. वहीं, कुछ जगह रिकॉर्ड में अर्थवर्क का उल्लेख होने के बावजूद रिपोर्ट में अर्थवर्क नहीं किए जाने की बात सामने आई. मामला नगर निगम की DPR में लगी टेस्ट रिपोर्ट तक भी पहुंचा. आयोग के मुताबिक, ज्यादातर टेस्ट रिपोर्ट सरकारी लैब की बजाय राजनंदिनी एंटरप्राइजेज एंड कंसल्टेंसी की थीं. कई रिपोर्टों में सैंपल सड़क के किस स्थान से लिया गया, इसकी लोकेशन भी दर्ज नहीं थी.

Advertisement

इसको लेकर उठे सवाल

सबसे अहम सवाल तारीखों को लेकर उठा. DPR के मुताबिक, DBM और BC के सैंपल 10 जुलाई 2024 को लिए गए और उनकी टेस्ट रिपोर्ट 11 जुलाई को तैयार हुई. जबकि जॉब मिक्स डिजाइन की तारीख 16 सितंबर 2024 दर्ज है. यानी रिकॉर्ड में सैंपल टेस्ट और जॉब मिक्स डिजाइन के बीच दो महीने से ज्यादा का अंतर दिखाई दे रहा है. इसी रिकॉर्ड को लेकर हाईकोर्ट ने राजनंदिनी एंटरप्राइजेज एंड कंसल्टेंसी से संबंधित मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं.

वहीं, नगर निगम के अपने सड़क मरम्मत कॉन्ट्रैक्ट में गड्ढों की मरम्मत के लिए 48 घंटे की समयसीमा और विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया तय है. गड्ढे की पहचान के बाद अधिकतम 48 घंटे में मरम्मत की शर्त है. गड्ढे को मशीन से काटना, मलबा और ढीली सामग्री हटाना, पानी निकालना, निर्धारित अर्ली स्ट्रेंथ मटेरियल डालना और उसका उचित कंप्रेशन करना जरूरी है. DLP के दौरान खराबी नहीं सुधारने पर 1 हजार रुपये प्रतिदिन प्रति खराब गड्ढा/ट्रेंच जुर्माने का प्रावधान भी है.

कोर्ट में सामने आए गंभीर सवाल

 कोर्ट में पेश तस्वीरों ने इस पूरे मामले को और गंभीर सवालों के सामने ला दिया. ये तस्वीरें नगर निगम ने खुद कोर्ट के रिकॉर्ड पर पेश की हैं. आयोग द्वारा सैंपल लेने के लिए बनाए गए गड्ढों को भरते समय तस्वीरों में मलबे के ऊपर बिटुमिन की पतली परत दिखाई देने की बात कोर्ट के सामने आई.

Advertisement

हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से जवाब मांगा है कि जब टेंडर की तकनीकी शर्तों में ढीली सामग्री और मलबा हटाने की बात है, तो गड्ढों को मलबे से भरकर ऊपर बिटुमिन की पतली परत किस नियम या स्पेसिफिकेशन के तहत डाली गई. साथ ही संबंधित स्पेसिफिकेशन भी कोर्ट के रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं.

21 सितंबर को सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी. इस दौरान बाकी दो सैंपलों की रिपोर्ट और नगर निगम कमिश्नर का शपथपत्र भी सामने आएगा. ग्वालियर की सड़कों की जांच में सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं है. सवाल सड़क में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता से लेकर DPR में दर्ज टेस्ट रिपोर्ट, उनकी तारीखों, मूल रिकॉर्ड और सड़क के गड्ढों की मरम्मत के तरीके तक पहुंच गया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement