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भोजशाला: वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहली बार 'अखंड पूजा', 1500 जवान और ड्रोन तैनात

धार भोजशाला में हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहले शुक्रवार को लेकर भारी सुरक्षा बल तैनात. हिंदू संगठनों ने 721 साल बाद 'अखंड पूजा' का आह्वान किया. ASI का नमाज वाला आदेश रद्द...

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भोजशाला में बदली 700 साल पुरानी व्यवस्था.(Photo:PTI)
भोजशाला में बदली 700 साल पुरानी व्यवस्था.(Photo:PTI)

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस  फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार है, जिसमें अदालत ने विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर घोषित किया है. इस फैसले के साथ ही अदालत ने दशकों पुरानी उस व्यवस्था को भी खत्म कर दिया है, जिसके तहत मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति थी.

भोज उत्सव समिति ने इस शुक्रवार को हिंदू समुदाय के लिए गौरव का दिन बताते हुए 'अखंड पूजा' और 'महा आरती' का आह्वान किया है. हिंदू समुदाय के सदस्य शुक्रवार दोपहर को धान मंडी चौराहे पर एकत्र होंगे. यहां से एक विशाल जुलूस के रूप में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचेंगे, जहाँ सामूहिक प्रार्थना की जाएगी. 

समिति के संरक्षक अशोक जैन का कहना है कि 721 सालों के बाद यह पहला मौका है, जब हिंदू समाज अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान के साथ यहां सामूहिक पूजा करेगा. 

9-स्तरीय सुरक्षा और 1500 जवान
प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए.

यह भी पढ़ें: 'हम वहां नमाज पढ़ना जारी रखेंगे...', धार शहर काजी बोले- भोजशाला के फैसले को SC में चुनौती देगा मुस्लिम पक्ष

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एसपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य बातें साझा की हैं: परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों में 1500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों और CCTV के जरिए की जा रही है.

वाहनों की सघन चेकिंग, मोबाइल गश्त और नौ अलग-अलग सुरक्षा परतों के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है. कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी ने शांति समिति की बैठक कर दोनों पक्षों से शांति की अपील की है. 

बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाया कि विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर, देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर है. इसके साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुसलमानों को शुक्रवार को इस जगह पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी.

इस फ़ैसले से पहले हिंदुओं को इस मध्यकालीन स्मारक में केवल मंगलवार को पूजा करने की अनुमति थी, जबकि मुसलमान कई सालों से यहाँ शुक्रवार की नमाज पढ़ते आ रहे थे. दोनों ही समुदायों ने इस इमारत पर अपना दावा जताया था.

प्रशासन की चेतावनी 
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट के निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन कराया जाएगा. प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को चेतावनी दी है.

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अधिकारियों ने यह भी तय किया है कि इस स्थल पर कोई भी ऐसी नई धार्मिक गतिविधि शुरू न हो, जिसकी अनुमति कानूनी प्रक्रिया के बाहर हो.

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