धार का भोजशाला विवाद कोई नया नहीं है. वसंत पंचमी आते ही यहां का विवाद चर्चा में आ जाता है. यहां मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने की और शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने की इजाजत है. अब हिंदू पक्ष ने मांग की है कि यहां नमाज को बंद किया जाए और पूरा परिसर हिंदुओं के हवाले किया जाए. इस मांग के साथ ही धार का भोजशाला विवाद फिर से चर्चा में आ गया है (Bhojshala Dispute).
दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट बेंच में धार भोजशाला का मामला पहुंच गया. जहां एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में यहां पर सरस्वती देवी की प्रतिमा स्थापित करने और पूरे भोजशाला परिसर की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी करवाने की मांग की गई है. इसके साथ ही यहां नमाज बंद कराने की मांग भी की गई है.
बात इसके इतिहास की करें तो हजार साल पहले धार में परमार वंश का शासन था. यहां पर 1000 से 1055 ईस्वी तक राजा भोज ने शासन किया. राजा भोज सरस्वती देवी के अनन्य भक्त थे. उन्होंने 1034 ईस्वी में यहां पर एक महाविद्यालय की स्थापना की, जिसे बाद में 'भोजशाला' के नाम से जाना जाने लगा. इसे हिंदू सरस्वती मंदिर भी मानते थे.
ऐसा कहा जाता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया. बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी ने भोजशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दी. 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में भी मस्जिद बनवा दी.
1875 में यहां पर खुदाई की गई थी. इस खुदाई में सरस्वती देवी की एक प्रतिमा निकली. इस प्रतिमा को मेजर किनकेड नाम का अंग्रेज लंदन ले गया. फिलहाल ये प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में है. हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में इस प्रतिमा को लंदन से वापस लाए जाने की मांग भी की गई है.
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी के पावन पर्व को बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा से मनाया जा रहा है. इस अवसर पर हिंदू समुदाय मां वाग्देवी के तेल चित्र को स्थापित कर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा का आयोजन करता है. महाआरती और धर्मसभा भी इसी दौरान संपन्न होती हैं. दोपहर में नमाज के लिए भी समय दिया गया है. जानें क्या है भोजशाला विवाद?
परमार राजाओं ने धार में जिस भोजशाल और सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया, वह सुल्तान शासनकाल में विध्वंस का शिकार हुई. उसे न सिर्फ तोड़ा गया, बल्कि, उसी भोजशाला पर एक मस्जिद तामीर करवा दी गई- कमाल मौला मस्जिद. जब जब जुमा यानी शुक्रवार को वसंत पंचमी होती है, धार की भोजशाला को लेकर माहौल गर्म होने लगता है. जबकि ये सिर्फ धार का नहीं, दो और भोजशालाओं का भी कड़वा अतीत है.
Bhojshala Dhar Dispute Supreme Court: धार की भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन जुमे की नमाज पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी. हिंदू पक्ष ने मांग की है कि शुक्रवार होने के बावजूद उस दिन केवल सरस्वती पूजा की अनुमति दी जाए.
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला में वसंत पंचमी इस बार शुक्रवार को पड़ने के कारण नया विवाद खड़ा हो गया है. हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस दिन जुमे की नमाज़ पर रोक और सिर्फ सरस्वती पूजा की अनुमति देने की मांग की है.
Dhar Bhojshala Conflict: धार की ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला में आगामी 23 जनवरी को लेकर तनाव और हलचल बढ़ गई है. इस दिन बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) और जुलाई (जुमा) यानी शुक्रवार दोनों एक साथ पड़ रहे हैं, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है.
भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है. हिंदू मानते हैं कि यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है और मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है.
जैन समाज ने दावा किया कि भोजशाला में 1875 में खुदाई के दौरान जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति निकली थी. वो मूर्ति अभी ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित है. इस मूर्ति के साथ शिलालेख भी सुरक्षित है जो अम्बिका देवी के जैन धर्म से संबंधित होने का प्रमाण है.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने बताया कि उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर एक अप्रैल, 2024 को दिए स्टे को निरस्त करने की मांग की गई है. इसके बाद अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही हाईकोर्ट की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी.
धार नगरी की ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में कई तरह के खुलासे किए गए हैं. जिसमें कहा गया है कि विभिन्न धातुओं के सिक्के और मूर्तियां राजा धार के समय के हैं.
मध्य प्रदेश की धार भोजशाला परिसर में ASI ने साइंटिफिक सर्वे पूरा लिया है. ASI ने 15 जुलाई को अपनी सर्वे रिपोर्ट इंदौर हाईकोर्ट को सौंपी, जिसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं. इस वीडियो में हम जानेंगे कि ASI की रिपोर्ट में, मंदिर से जुड़े क्या क्या सबूत मिले हैं और साथ ही ये भी समझेंगे कि धार भोजशाला से जुड़ा विवाद क्या है.
क्या काशी की ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में हिंदुओँ को पूजा का हक मिलेगा? दरअसल ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में मुस्लिम मस्जिद है. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू मंदिर होने की मान्यता है.
एमपी के धार जिले की भोजशाला परिसर का साइंटिफिक सर्वे हो गया है. एएसआई ने सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी है. सर्वे में यहां मंदिर होने के पुख्ता सबूत मिले हैं. अब इस मामले पर 22 जुलाई को सुनवाई होगी. ऐसे में जानते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासा हुआ है.
लोकसभा चुनाव में यूपी में करारी हार के बाद यूपी बीजेपी में खींचतान बढ़ती दिख रही है. कल यूपी बीजेपी कार्यसमिति की बैठक हुई, इस बैठक में यूपी में मिली हार की समीक्षा होनी थी, चिंतन होना था कि क्या वजहें रहीं जिसकी वजह से यूपी में शिकस्त मिली, मगर बैठक खत्म होने तक जो बयान सामने आए उन्होंने यूपी के सियासी ताप को बढ़ा दिया है. देखें शंखनाद.
मध्य प्रदेश में धार जिले के भोजशाला पर ASI की रिपोर्ट सामने आ गई है. जिसमें बताया गया है कि भोजशाला में कई मूर्तियां मिली हैं. इस पर रिएक्शन देते हुए हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि ASI रिपोर्ट आने के बाद साबित हो गया है कि भोजशाला में मंदिर था. उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी.
धार नगरी की ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा कि कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिकला के टुकडे मिले है. वे बेसाल्ट, संगमरमर, शिस्ट, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बने हैं. खिड़कियों, खंभों और प्रयुक्त बीमों पर चार सशस्त्र देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई थीं.
1000 साल पुराने सिक्के, 94 मूर्तियां, संस्कृत-प्राकृत के शिलालेख... धार भोजशाला परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट में बड़े खुलासे.
धार नगरी की ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कहा कि कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिकला के टुकडे मिले हैं. वे बेसाल्ट, संगमरमर, शिस्ट, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बने हैं. देखें न्यूजरूम.
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में ASI की सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियां और मूर्ति कला के टुकड़े मिले हैं. ये मूर्तियां संगेमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चुना पत्थर से बनी हैं. खिड़कियों, खंभों और बीमों पर चार सशस्त्र देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं. परिसर से चांदी, तांबे, अल्युमिनियम और स्टील के 31 ऐतिहासिक सिक्के भी मिले हैं. याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि इस रिपोर्ट से उनका केस मजबूत हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में आगे की कार्यवाही की मांग करेंगे.
धार नगरी की ऐतिहासिक भोजशाला के सर्वेक्षण के बाद ASI ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए है. ASI ने अपनी ये रिपोर्ट हाईकोर्ट में जमा कर दी है. देखें नॉनस्टॉप 100
आजकल धार का भोजशाला विवाद सुर्खियों में बना हुआ है, क्योंकि यहां ASI का सर्वे किया जा रहा है. ASI की टीम पुरातात्विक और वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर इस बात का पता लगाएगी कि भोजशाला में सरस्वती मंदिर है या कमाल मौलाना मस्जिद. आइए जानते हैं कि धार की भोजशाला पर विवाद क्यों है.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने शुक्रवार को धार की भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया. भोजशाला का विवाद दशकों पुराना है. हिंदू इसे राजा भोज के काल का सरस्वती मंदिर मानते हैं जबकि मुस्लिम पक्ष कमाल मौलाना मस्जिद का दावा करता है.