scorecardresearch
 
Advertisement

भोजशाला विवाद

भोजशाला विवाद

भोजशाला विवाद

धार का भोजशाला विवाद कोई नया नहीं है. हिंदू पक्ष ने मांग की है कि यहां नमाज को बंद किया जाए और पूरा परिसर हिंदुओं के हवाले किया जाए (Bhojshala Dispute). 15 मई 2026 को मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनाते हुए कहा कि यह परिसर हिंदू मंदिर है. हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर दायर याचिका पर फैसला दिया है. 

अदालत ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं, कानून-व्यवस्था और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है. मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा से जुड़े फैसले लेने को कहा है. ASI परिसर का समग्र प्रशासन और प्रबंधन जारी रखेगा.

मार्च 2024 में एएसआई को इंदौर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे करे, जैसा ज्ञानवापी मामले में किया गया था. इसके बाद करीब 98 दिनों तक आधुनिक तकनीकों की मदद से सर्वेक्षण किया गया और एएसआई ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में जमा कर दी.

भोजशाला में मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने की और शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने की इजाजत है.

दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट बेंच में धार भोजशाला का मामला पहुंच गया. जहां एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में यहां पर सरस्वती देवी की प्रतिमा स्थापित करने और पूरे भोजशाला परिसर की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी करवाने की मांग की गई है. इसके साथ ही यहां नमाज बंद कराने की मांग भी की गई है. 

बात इसके इतिहास की करें तो हजार साल पहले धार में परमार वंश का शासन था. यहां पर 1000 से 1055 ईस्वी तक राजा भोज ने शासन किया. राजा भोज सरस्वती देवी के अनन्य भक्त थे. उन्होंने 1034 ईस्वी में यहां पर एक महाविद्यालय की स्थापना की, जिसे बाद में 'भोजशाला' के नाम से जाना जाने लगा. इसे हिंदू सरस्वती मंदिर भी मानते थे. 

ऐसा कहा जाता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला को ध्वस्त कर दिया. बाद में 1401 ईस्वी में दिलावर खान गौरी ने भोजशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दी. 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में भी मस्जिद बनवा दी. 

1875 में यहां पर खुदाई की गई थी. इस खुदाई में सरस्वती देवी की एक प्रतिमा निकली. इस प्रतिमा को मेजर किनकेड नाम का अंग्रेज लंदन ले गया. फिलहाल ये प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में है. हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में इस प्रतिमा को लंदन से वापस लाए जाने की मांग भी की गई है.

 

और पढ़ें

भोजशाला विवाद न्यूज़

Advertisement
Advertisement