मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई यानी राजधानी इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से महज पानी की एक बोतल खरीदना एक कॉलेज छात्रा को बहुत भारी पड़ गया. ठगों ने रिफंड देने के बहाने छात्रा का मोबाइल हैक कर लिया और उसके बाद उसके निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर करीब 2.5 लाख रुपये ऐंठ लिए.
यह पूरी घटना इंदौर के खजराना थाना इलाके की है. पीड़ित छात्रा एक कॉलेज स्टूडेंट है. उसने कुछ दिनों पहले एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पानी की एक बोतल का ऑर्डर दिया था. ऑर्डर के कुछ समय बाद उसके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले शख्स ने खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि आपके ऑर्डर की राशि रिफंड की जानी है.
झांसे में आकर छात्रा उनकी बातों में आ गई. ठगों ने रिफंड प्रोसेस पूरा करने के नाम पर उसके मोबाइल पर एक UPI लिंक भेजा. जैसे ही छात्रा ने उस लिंक पर क्लिक किया, उसका मोबाइल फोन पूरी तरह से हैक हो गया. आरोपियों ने रिमोट एक्सेस के जरिए उसके मोबाइल का सारा पर्सनल डेटा, निजी तस्वीरें और वीडियो अपने कब्जे में ले लिए.
बदनामी के डर से देती रही पैसे
डेटा चोरी करने के बाद शातिर ठगों ने छात्रा को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. उन्होंने धमकी दी कि अगर उसने पैसे नहीं दिए, तो उसके निजी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाएंगे. लोक-लाज और बदनामी के डर से सहमी छात्रा ने बिना किसी को बताए आरोपियों के दिए गए बैंक खातों में कई किस्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए.
कॉलेज फीस के वक्त हुआ खुलासा
इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब छात्रा अपने कॉलेज की फीस जमा करने बैंक पहुंची. वहां खाता चेक करने पर उसे पता चला कि उसके अकाउंट से करीब ढाई लाख रुपये की एक बड़ी राशि गायब हो चुकी है. ठगी का अहसास होने के बाद पीड़िता ने तुरंत अपने परिजनों को मामले की जानकारी दी और खजराना थाना पुलिस से संपर्क किया.
अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज
एडिशनल डीसीपी (जोन-2) अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, पुलिस ने पीड़ित छात्रा की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. साइबर सेल की टीम उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन (UPI ID) की बारीकी से जांच कर रही है, जहां पैसे ट्रांसफर किए गए थे.
पुलिस की अपील
एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से रिफंड या कैशबैक प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन (PIN) दर्ज करने या किसी लिंक को ओपन करने की जरूरत नहीं होती है. ऐसे किसी भी कॉल या मैसेज के आने पर तुरंत सतर्क हों और नजदीकी साइबर सेल को सूचित करें.