साहित्य के महाकुंभ 'साहित्य आजतक' के मंच पर आमंत्रित थे डॉक्टर सच्चिदानंद जोशी. डॉ. जोशी ने युवा पीढ़ी के सामर्थ्य और उनके जीवन में साहित्य और संस्कृति के महत्व को बताया. उन्होंने युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रेरित किया और उन्हें वास्तविक जीवन की ओर ले जाने का संदेश दिया.