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बच्चों के लिए किसी 'वरदान' से कम नहीं है विटामिन डी

यह सूर्य के प्रकाश में रहने पर त्वचा में उत्पन्न होता है, और कैल्शियम के अवशोषण तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है. विटामिन डी का लेवल कम होने पर हड्डियों को नुकसान पहुंचता है. हालांकि, यह विटामिन दिल, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा तंत्र के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

बच्चों के लिए विटामिन डी बहुत आवश्यक है. जो बच्चे कुपोषण का शिकार हैं उनके लिए तो विटामिन डी किसी वरदान से कम नहीं है. पंजाब-पाकिस्तान यूनिवर्सिटी और क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी द्वारा की गई एक रिसर्च में सामने आया है कि विटामिन डी की प्रचुर मात्रा अगर किसी कुपोषित बच्चे को भी दी जाय तो उसका ना केवल वजन बढ़ जाएगा बल्कि भाषा सीखने की उसकी क्षमता में भी वृद्धि होगी.

विटामिन डी शरीर की लगभग हर कोशिका को प्रभावित करता है. यह सूर्य के प्रकाश में रहने पर त्वचा में उत्पन्न होता है, और कैल्शियम के अवशोषण तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है. विटामिन डी का लेवल कम होने पर हड्डियों को नुकसान पहुंचता है. हालांकि, यह विटामिन दिल, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा तंत्र के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

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हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, विटामिन डी की कमी मैटाबोलिक सिंड्रोम, हृदय रोगों और प्रजनन क्षमता से जुड़ी हुई है. उन्होंने बताया कि साल में कम से कम 40 दिन में 40 मिनट तक रोजाना सूर्य की रोशनी में जरूर रहना चाहिए. इसका सही लाभ तब मिलता है जब शरीर का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा सूर्य की रोशनी के संपर्क में आए, भले ही प्रात:काल या शाम के समय ही हो.

दरअसल, विटामिन डी 2 हमें खाद्य पदार्थो से मिलता है, जबकि विटामिन डी 3 सूर्य की रोशनी पड़ने पर हमारे शरीर में उत्पन्न होता है. दोनों विटामिन हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. डी 2 जहां भोजन से प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन डी 3 का उत्पादन सूर्य के प्रकाश में ही होता है.

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