
घरों में बाथरूम की सफाई सबसे ज्यादा करते हैं और अब तो जगह की कमी की वजह से टॉयलेट और बाथरूम ज्वाइंट होते हैं. इस वजह से भी वहां हर हफ्ते सफाई की जाती है, लेकिन इस दौरान लोग एक बात जरूर नोटिस करते हैं कि टंकी, बाल्टी, मग और फर्श के पटरे एक अलग ही गंदी-सी दिखने वाली सफेद परत जमी होती है. दिल्ली-नोएडा के कई इलाकों में लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं, क्योंकि वो चाहे कितनी भी सफाई क्यों ना कर लें, लेकिन यह दिक्कत बनी रहती है.
टंकी, बाल्टी, मग और फर्श के पटरे ही नहीं बल्कि दीवारें और टाइल्स में भी यह सफेद दाग पड़ जाते हैं, जिन आप चाहे कितना भी ब्रश से घिस लें, यह साफ नहीं होते हैं. इससे भी बड़ी टेंशन यह होती है कि लोगों को इनका असली कारण समझ नहीं आता है. लोग तो इनको गंदगी समझने की भूल कर देते हैं और इनको साफ करने के लिए कई महंगे प्रोडक्ट्स बाजार से उठा लाते हैं, जो कोई काम नहीं आते हैं.
दिल्ली-नोएडा के कुछ इलाकों में साफ पानी आता है, लेकिन कुछ इलाके ऐसे भी हैं. जहां पर हार्ट वॉटर यानी खनिज वाला पानी आता है. आम बोलचाल की भाषा में लोग इसे खारा पानी या नमक वाला पानी भी कहते हैं. हमारे घरों में सप्लाई होने वाले पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स घुले होते हैं, जब यह पानी बाथरूम की सतह पर गिरता है और सूख जाता है, तो ये मिनरल्स पीछे सफेद परत बनकर जम जाते हैं. जिसे लाइम जमा होना या लाइमस्केल कहा जाता है.
पीने का साफ पानी दिल्ली में आमतौर पर एक फिक्स टाइम पर आता है और इस वजह से बाकी कामों के लिए बोरवेल लगवा लेते हैं. इसलिए जिन घरों में बोरवेल या ग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल होता है, वहां यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि ऐसे पानी में मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होती है.
नहाते समय जैसे ही पानी की बूंदें जब टाइल्स, प्लास्टिक बाल्टी या फ्लश टंकी पर बार-बार गिरती और सूखती हैं, तो धीरे-धीरे सफेद रिंग या परत बनने लगती है. देखने में यह काई की तरह लगती है और यह आपके बाथरूम की सुंदरता को भी खराब करती है.

सफेद निशानों का एक दूसरा कारण साबुन और हार्ड वॉटर का कॉम्बिनेशन भी होता है. जब साबुन हार्ड वॉटर के साथ रिएक्ट करता है, तो एक चिपचिपा निशान बनाता है जो सूखने के बाद धुंधली सफेद लेयर की तरह दिखाई देता है. यही वजह है कि नल, शॉवर और टाइल्स पर अक्सर सफेद या हल्के भूरे दाग नजर आते हैं.
वैसे तो इन दागों से हेल्थ पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है, मगर इसकी वजह से बाथरूम गंदा ही लगता है. इसके अलावा अगर यह लंबे समय तक जमे रहते हैं तो इससे नल और शॉवर की पाइपलाइन पर असर जरूर पड़ सकता है, इससे पानी का फ्लो भी इफेक्ट होता है.
खारे पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल मौजूद होते हैं, जिनकी वजह से पानी घर की प्लंबिंग और बाथरूम फिटिंग्स पर दाग भी छोड़ता है. समय के साथ सिंक, टॉयलेट और टब पर अलग-अलग रंग के निशान दिखने लगते हैं, लेकिन कई बार पानी का दाग अलग-अलग होता है. नीले-हरे दाग तांबे के पाइप के घिसने से बनते हैं और पीले, भूरे या लाल दाग पानी में आयरन या अन्य धातुओं के कारण होते हैं. जबकि काले निशान मैग्नीशियम की वजह से हो सकते हैं और ये दाग तब बनते हैं जब मेटल ऑक्सीजन के संपर्क में आकर ऑक्सीकरण करता है.
इन दागों से कैसे पाएं छुटकारा?
अगर आप भी इन दागों से परेशान हैं तो पानी की बूंदों को सूखने से पहले कपड़े से पोंछना, समय-समय पर डीप क्लीनिंग करना अपने रूटीन का हिस्सा बना लीजिए.
इसके अलावा वॉटर सॉफ्टनर का इस्तेमाल करना फायदेमंद साबित हो सकता है. इसका इस्तेमाल करने से पानी का खारापन खत्म हो जाता है और फिर वो सफेद निशान नहीं छोड़ेगा.