सोशल मीडिया और चमक-धमक वाली इस दुनिया में अक्सर गुलाबी होठों को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है. जिन लोगों के लिप्स पिंक नहीं होते वो लोग महंगे-महंगे लिप बाम और कई घरेलू नुस्खे भी अपनाते हैं. लेकिन कई क्या सच में इन चीजों से फायदा हो सकता है या फिर आपके होठों का रंग नेचुरली तरीके से गुलाबी हो सकता है? हाल ही में एम्स की पूर्व डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आंचल पंथ ने एक पॉडकास्ट में इसका खुलासा किया है और ये भी बताया है कि भारतीयों के होंठों का रंग गुलाबी क्यों नहीं होता?
एम्स की पूर्व डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. आंचल पंथ ने बताया, भारतीयों के होंठों का प्राकृतिक रंग गुलाबी न होने के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हैं. दरअसल, होंठों का रंग हमारी स्किन की बनावट और जेनेटिक्स से भी जुड़ा होता है. भारतीयों की स्किन का रंग और विदेश में लोगों की स्किन के रंग में काफी अंतर है. लोग अक्सर अपनी तुलना पश्चिमी देशों के लोगों से करते हैं. लेकिन भारत की जलवायू और फिजिकल जेनेटिक्स में काफी अंतर है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि होंठों का डार्क होना हमेशा कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक नेचुरल प्रोसेस है.
डॉक्टर के मुताबिक, इंडियन स्किन टोन फिट्ज़पैट्रिक स्केल पर टाइप 3 से टाइप 5 के बीच आती है यानी कि भारतीयों की स्किन में मेलेनिन (Melanin) का प्रोडक्शन अधिक होता है.
मेलेनिन ऐसा पिगमेंट है जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाता है. भारतीयों में होंठों का रंग भूरा या हल्का डार्क होना पूरी तरह सामान्य है क्योंकि वहां भी मेलेनिन मौजूद होता है. इसके विपरीत विदेशी लोगों में मेलेनिन कम होता है, जिससे उनकी ब्लड वेसिल्स सतह से साफ दिखती हैं और होंठ गुलाबी नजर आते हैं.
जेनेटिक्स और जलवायु के अलावा इंसान की लाइफस्टाइल भी उसके होठों के रंग को प्रभावित करती है. अधिक देर तक धूप में रहना, धूम्रपान भी होठों के डार्क कलर के लिए जिम्मेदार है. निकोटीन ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है और होठों पर कालापन जमा देता है.
इसके अलावा कई बार लिपस्टिक या खराब क्वालिटी के लिप प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से भी होठों का रंग गहरा हो जाता है.
डॉक्टर ने सलाह दी कि होंठों को गुलाबी बनाने के चक्कर में स्क्रब या केमिकल का इस्तेमाल करने से बचें. सबसे जरूरी है होंठों को हाइड्रेटेड रखना और कम से कम 30 एसपीएफ वाला लिप बाम इस्तेमाल करना.
यदि आपके होंठ अचानक काले पड़ रहे हैं या उनमें खुजली हो, तो यह किसी मेडिकल कंडीशन का संकेत हो सकता है. ऐसे में किसी एक्सपर्ट से भी सलाह ले सकते हैं.