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Contact Lens Wear Limit: कॉन्टैक्ट लैंस लगातार कितने घंटे पहनना सुरक्षित? ज्यादा देर रखी आंख में तो जा सकती है रोशनी

आंखें अनमोल हैं, लेकिन स्टाइल और सहूलियत के चक्कर में कॉन्टैक्ट लैंस का गलत इस्तेमाल इन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. जानिए लैंस पहनने का सही समय और जरूरी नियम.

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कॉन्टैक्ट लैंस पहनने में काफी सुविधाजनक होते हैं. (Photo: AI Generated)
कॉन्टैक्ट लैंस पहनने में काफी सुविधाजनक होते हैं. (Photo: AI Generated)

Contact Lens Side Effects: समय के साथ टेक्नोलॉजी भी बदलती है और नई-नई खोज से कई बार लोगों की जिंदगी आसान हो जाती है. पहले जहां लोग भारी-भरकम चश्मे पहनते थे, उसके उनकी जगह फाइबर के चश्मों ने ली और फिर अब कॉन्टैक्ट लैंस का चलन तेजी में है. चश्मे के झंझट से बचने और लुक को बेहतर बनाने के लिए कॉन्टैक्ट लैंस का यंगस्टर्स की पहली पसंद बना हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हें आंखों में लगातार कितनी देर तक रखना चाहिए? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कॉन्टैक्ट लैंस पहनने की एक तय समय सीमा होती है और उससे अधिक पहनने से आंखों की रोशनी तक प्रभावित हो सकती है. यदि आप भी दिनभर या देर रात तक लैंस लगाए रखते हैं, तो ये खबर आपके लिए है.

इतने घंटे से ज्यादा न करें इस्तेमाल

फोकस क्लीनिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर नॉर्मल डेली वियर सॉफ्ट कॉन्टैक्ट लैंस को दिन में 8 से 12 घंटे तक ही पहनना सुरक्षित माना जाता है. अधिकतर लोग लैंस को सुबह से शाम तक आसानी से पहन लेते हैं लेकिन उन्हें 14 से 16 घंटे से अधिक लगाना खतरनाक हो सकता है. यदि आप पहली बार लैंस का इस्तेमाल कर रहे हैं तो शुरुआती दिनों में इसे सिर्फ 4 घंटे ही पहनें ताकि आंखें इसकी आदी हो सकें.

क्यों होता है ज्यादा देर लगाने से नुकसान?

Ptometrists.org के मुताबिक, हमारी आंखों की बाहरी परत यानी पुतली को हेल्दी रहने के लिए सीधे हवा से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन जब कोई आंख पर लैंस लगाता है तो वह एक बैरियर की तरह काम करता है. 

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बहुत अधिक समय तक लैंस पहनने से कॉर्निया तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोक्सिया कहते हैं. ऑक्सीजन की कमी से आंखें लाल होने लगती हैं, पानी आने लगता है और भयंकर जलन शुरू हो जाती है.

'ओवरवियर सिंड्रोम' और अंधापन का खतरा

CDC का कहना है कि लंबे समय तक लैंस लगाने की इस लापरवाही को कॉन्टैक्ट लैंस ओवरवियर सिंड्रोम कहा जाता है. लैंस पहनकर सोना या तय की गई लिमिट से अधिक समय तक लगाने से आंखों में इंफेक्शन और कॉर्नियल अल्सर यानी पुतली पर घाव होने का जोखिम 6 से 8 गुना तक बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में यह कॉर्निया को पूरी तरह डैमेज कर देता है जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है.

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