How to Choose Mattress: थका देने वाले दिन के बाद हर कोई चाहता है कि उसे बिस्तर पर लेटते ही एक सुकून भरी और गहरी नींद आ जाए. हमारी अच्छी नींद और हेल्थ का सीधा कनेक्शन हमारे गद्दे (Mattress) से होता है. ऐसे में अक्सर गलत गद्दे का सिलेक्शन न सिर्फ आपकी रात की नींद खराब कर सकता है बल्कि यह रीढ़ की हड्डी, पीठ और गर्दन में परमानेंट दर्द की वजह भी बन सकता है. लोग अक्सर बिना सोचे-समझे या सिर्फ भारी डिस्काउंट देखकर गद्दा खरीद लेते हैं जो बाद में बड़ी भूल साबित होती है. गद्दा खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
गद्दे की लाइफ और आपका बजट
नया गद्दा खरीदने से पहले बाजार में मौजूद अलग-अलग ऑपशंस जैसे कि मेमोरी फोम, कोइर, लेटेक्स और स्प्रिंग मैट्रेस के बारे में अच्छी तरह रिसर्च कर लें. हर गद्दे की लाइफ और खूबियां अलग होती हैं.
गद्दे पर खर्च करने से पहले अपना एक बजट तय करें क्योंकि एक अच्छा गद्दा लंबे समय का इन्वेस्टमेंट होता है जो कम से कम 7 से 10 साल तक चलता है. इसलिए सस्ते के चक्कर में क्वालिटी से समझौता न करें.
स्लीपिंग पोजीशन और बैक पेन का रखें ध्यान
मायो क्लिनिक के एक्सपर्ट्स के अनुसार, नया मैट्रेस चुनते समय आपके सोने का तरीका सबसे ज्यादा मायने रखता है. यदि आप अक्सर पीठ दर्द से परेशान रहते हैं तो बहुत ज्यादा सॉफ्ट या बहुत ज्यादा हार्ड गद्दे के बजाय मीडियम-फर्म गद्दा सबसे बेस्ट होता है.
यह सोते समय आपकी रीढ़ की हड्डी के नेचुरल अलाइनमेंट को बनाए रखता है. जो लोग करवट लेकर सोते हैं उन्हें ऐसा गद्दा चाहिए जो उनके कंधों और कूल्हों के प्रेशर को झेल सके जबकि पीठ के बल सोने वालों को थोड़े मजबूत सपोर्ट की जरूरत होती है.
खरीदने से पहले खुद टेस्ट करना है जरूरी
अक्सर लोग ऑनलाइन रिव्यू देखकर सीधे ऑर्डर कर देते हैं, लेकिन गद्दे को खुद एक्सपीरियंस करना जरूरी है. ब्रिटिश स्लीप काउंसिल की एक्सपर्ट पार्टनर वेबसाइट द स्लीप चैरिटी के अनुसार, जब भी आप शोरूम में गद्दा देखने जाएं तो उस पर कम से कम 10 मिनट के लिए अपनी रेगुलर स्लीपिंग पोजीशन में लेटकर जरूर देखें.
केवल हाथ से दबाकर या किनारे पर बैठकर गद्दे के कम्फर्ट का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. इसके अलावा, कंपनी की वारंटी और रिटर्न पॉलिसी को भी ध्यान से पढ़ें ताकि पसंद न आने पर आप उसे बदल सकें.