अक्सर आपने लोगों से ये सुना होगा कि गांव की तुलना में शहरो में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर होती है और शहर के बच्चे गांव के बच्चों को तुलना में ज्यादा फिट होते हैं, लेकिन अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो शायद आप गलत हैं. दरअसल इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक शहर में रहने वाले बच्चों का विकास गांव के रहने वाले बच्चों को तुलना में कम होता है.
इस स्टडी में पाया गया कि गांव में रहने वाले बच्चे शहर में रहने वाले बच्चों से अधिक स्वस्थ्य रहते हैं. सबसे बड़ी बात उनकी लंबाई शहर के बच्चों से ज्यादा होती है.
इंपीरियल कॉलेज लंदन की रिसर्च में पाया गया कि शहर और गांव में रहने वाले बच्चों की लंबाई और वजन में काफी अंतर था. इसके बारे में जानकारी देते हुए सर गंगा राम के बायट्रिक सर्जन डॉक्टर मुकुंद खेतान ने बताया कि दरअसल, शहर और गांव के बच्चों के लाइफस्टाइल में काफी अंतर होता है. शहरों में बच्चों का खान-पान भी वैसा नही होता जैसा होना चाहिए.
वहीं आम लोगों की राय भी इसपर कुछ एक जैसी ही थी शहर में रहने वाले लोगों के मुताबिक बच्चे ज्यादातर वक्त फोन और घर में बिताते है वो गांव के बच्चों की तरह खेल कूद नहीं करते.
शहरों और गांवों में रहने वाले बच्चों के वजन को लेकर भी सर्वे किया गया जिसमें पाया गया कि अधिकांश देशों में शहरों में रहने वाले बच्चों की लंबाई और ऊंचाई में कमी आई है. जबकि गांव में रहने वाले बच्चों और किशोरों में उनके देसी खानपान की वजह से उनकी ग्रोथ में सुधार आया है. शहरों में गांव के मुकाबले सारी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं लेकिन बच्चे स्वस्थ्य नहीं रह पाते.
इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन की रिसर्च पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बीडब्ल्यू पांडे बताते हैं बच्चों के खानपान में पोषण तो पूरा होता है लेकिन शरीर में मूवमेंट कम होने की वजह से बच्चों का विकास नहीं हो पाता. उन्होंने बताया कि गांव में बच्चे ज्यादा खेलकूद में शामिल होते हैं इसलिए वो ज्यादा फिट होते है.
रिपोर्ट- नीतू झा