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IPS कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शादी में निभाया 'मां के दूध' से जुड़ा संस्कार, जानें इस खास रस्म के बारे में

यूपी कैडर के आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई और आईपीएस अंशिका वर्मा की भव्य शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. बारात से पहले केके बिश्नोई ने बिश्नोई समाज की ऐतिहासिक 'दूध पिलाई' की रस्म निभाई. आइए जानते हैं कि इस परंपरा का इतिहास और इसकी खासियत क्या है. 

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बिश्नोई समाज की दूध पिलाई रस्म चर्चा में आई.  (PHOTO:ITG)
बिश्नोई समाज की दूध पिलाई रस्म चर्चा में आई. (PHOTO:ITG)

IPS KK Bishnoi IPS Anshika Verma wedding video: सोशल मीडिया पर आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई और आईपीएस अंशिका वर्मा की शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं. यूपी कैडर के आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई ने 28 मार्च को आईपीएस अंशिका के साथ शादी के बंधन में बंधे, इन दोनों ही ग्रैंड वेडिंग पिछले काफी समय से ही सुर्खियों में छाई हुई थी और इन दोनों की सगाई से लेकर शादी की रस्मों की वीडियो और फोटोज ने इंटरनेट पर तहलका मचाया हुआ है. 

 केके बिश्नोई और अंशिका के वेडिंग लुक के साथ-साथ उनकी शादी के दौरान निभाई गई एक रस्म ने भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा. शादी दौरान निभाई गई दूध पिलाई की रस्म सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, इस पुरानी परंपरा को निभाकर आईपीएस केके चर्चा में आ गए हैं और इस पुरानी रस्म को निभाने को लेकर राजस्थानी लोग उनकी जमकर तारीफ भी कर रहे हैं.

आईपीएस को मां ने कराया 'स्तनपान'

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें आईपीएस केके बिश्नोई बारात के निकलने से पहले अपनी मां के पास बैठकर बिश्नोई समाज की ऐतिहासिक रस्म निभाते हुए 'मां का दूध' पी रहे हैं. आइए जानते हैं कि इस परंपरा का इतिहास और इसकी खासियत क्या है. 

क्या है दूध पिलाई की रस्म?

राजस्थान के बिश्नोई समाज और कुछ ग्रामीण समुदायों में यह परंपरा सदियों पुरानी है, आम भाषा में 'आंचल पीना' भी कहा जाता है. वैसे सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कुछ समुदायों में आज भी यह परंपरा की जाती है. 

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इस रस्म के मुताबिक, जब सज-धजकर दूल्हा अपनी बारात लेकर घर से निकलने वाला होता है, उस समसय वह अपनी मां के पास बैठता है और मां अपने आंचल के प्रतीकात्मक रूप से बेटे को दूध पिलाती है. 

 इसके बाद मां अपने लाल के सिर पर हाथ रखकर उसकी नई जिंदगी और गृहस्थ जीवन में प्रवेश का आशीर्वाद देती है. एक तरीके से यह रस्म बेटे को याद दिलाते है कि वो कभी अपने मां के दूध का कर्ज कभी नहीं चुका सकता है, चाहे वो कितना ही क्यों न बड़ा हो जाए.

परंपरा का ऐतिहासिक मैसेज

इसके अलावा मध्यकाल में जब योद्धा किसी युद्ध के मैदान में जाते थे, इस समय भी वो मां का दूध पीकर निकलते थे. ताकि वो युद्ध के दौरान ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे उनकी मां के दूध को लज्जा हो. इसी वजह से मां के संस्कारों की लाज बेटा उम्र भर रखेगा, यह परंपरा उस अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है.

 

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