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Butter Chicken History: तंदूरी चिकन के 'धोखे' से बना बटर चिकन, 80 साल पहले ऐसे हुआ था इस डिश का आविष्कार

पुरानी दिल्ली के 'मोती महल' से निकला बटर चिकन आज पूरी दुनिया का पसंदीदा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मखमली ग्रेवी का जन्म किसी सोची-समझी रेसिपी से नहीं, बल्कि बचे हुए तंदूरी चिकन को सूखने से बचाने के एक जुगाड़ से हुआ था? आइए इसका इतिहास जान लीजिए.

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बटर चिकन अपनी मखमली ग्रेवी के लिए जाना जाता है. (Photo: AI Generated)
बटर चिकन अपनी मखमली ग्रेवी के लिए जाना जाता है. (Photo: AI Generated)

Butter chicken history: प्रोटीन के लिए फिटनेस फ्रीक लोग उबला हुआ चिकन खाना पसंद करते हैं लेकिन जब स्वाद की बात आती है तो अक्सर लोग बटर चिकन खाना काफी पसंद करते हैं. बटर चिकन का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ ही जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं इसे पहली बार किसी शाही किचन में नहीं बल्कि एक जुगाड़ के कारण बनाया था. नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक, इस डिश का इतिहास 1940 के दशक के पेशावर (पाकिस्तान) और फिर दिल्ली के दरियागंज से जुड़ा हुआ है. यह महज एक डिश नहीं बल्कि उस समय की कहानी है जब संसाधनों की कमी के कारण सूखे चिकन को नया रूप देना था.

पाकिस्तान से कैसे दिल्ली का सफर

नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक, पहली बार बटर चिकन बनाने वाले शख्स का नाम कुंदन लाल गुजराल था. उन्होंने अपना पहला रेस्टोरेंट 'मोती महल' 1920 के दशक में पेशावर में ही खोला था. इसके बाद 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तो कुंदन लाल गुजराल पेशावर छोड़कर दिल्ली आ गए थे. उन्होंने अपने पहले रेस्टोरेंट में ही पहली बार चिकन को भूनने की शुरुआत की थी और वो तंदूरी चिकन नाम से फेमस हुआ. 1947 से अब तक लगभग 8 दशक हो गए हैं और उनकी रेसिपी हर जगह काफी चाव से खाई जाती है.

मोती महल के संस्थापक कुंदन लाल गुजराल. (Photo: Motimahal.in)

कुंदन लाल गुजराल जब दिल्ली आए तो उन्होंने दरियागंज में मोती महल नाम से ही एक नए रेस्टोरेंट की शुरुआत की. उनके यहां उनके खास तंदूरी चिकन की खूब डिमांड थी. लेकिन एक समस्या थी कि चिकन को तंदूर में भूनने के बाद अगर वह तुरंत न बिके तो वह सूखकर सख्त (कड़क) हो जाता था. ऐसे में ग्राहकों को सूखा चिकन परोसना गुजराल को अच्छा नहीं लगता था.

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कैसे बना बटर चिकन?

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कुंदन लाल गुजराल ने चिकन को सूखने से बचाने के लिए एक नया रास्ता निकाला. उन्होंने टमाटर, मक्खन, क्रीम और कुछ मसालों का एक मिश्रण तैयार किया और सूखे हुए तंदूरी चिकन के टुकड़ों को उस मखमली ग्रेवी में डाल दिया. 

नतीजा यह हुआ कि सख्त हो चुका चिकन फिर से नरम और रसीला हो गया. इसके बाद उन्होंने उसमें खूब सारा बटर डाल दिया और उसका टेस्ट काफी बढ़ गया. बस चिकन बचाने की इसी 'जुगाड़' ने बटर चिकन के रूप में सामने आया.

मोती महल की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये डिश धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंची और सभी को पसंद आने लगी. पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर रिचर्ड निक्सन तक मोती महल के बटर चिकन का स्वाद चख चुके हैं. आज बटर चिकन केवल भारत ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क से लेकर लंदन तक के मेन्यू की शान है. 80 साल पहले टमाटर और मक्खन के साथ किया गया वह छोटा सा प्रयोग आज भारतीय खाने की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है.

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