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IIT की दो होनहार छात्राएं, सैनिटरी पैड रीयूजेबल डिवाइस का किया आविष्कार

आईआईटी की छात्राओं का दावा है कि इस डिवाइस से रीयूजेबल होने वाले सैनिट्री पैड पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

'क्लींज राइट' नाम की इस डिवाइस को चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं है. 'क्लींज राइट' नाम की इस डिवाइस को चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं है.

फिल्म 'पैडमैन' में महिलाओं की पीरियड्स संबंधित समस्याओं को बखूबी दर्शाया गया है. देश विभिन्न हिस्सों में आज भी महिलाएं सैनिटरी पैड का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. जबकि शहरों में इसके अत्यधिक इस्तेमाल से बढ़ने वाला कचरा एक अलग चुनौती बना हुआ है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक सिंथेटिक पैड के गलने में करीब पांच सौ से आठ सौ साल लग जाते हैं.

इस समस्या से निजात दिलाने के लिए आईआईटी की दो छात्राओं ने 'क्लींज राइट' नाम की एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो रीयूजेबल सैनिटरी नैपिकन को साफ कर दोबारा इस्तेमाल करने लायक बना सकती है. यह डिवाइस आईआईटी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) मुंबई की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा ऐश्वर्या अग्रवाल और गोवा की छात्रा देवयानी मलाडकर ने तैयार की है.

इस डिवाइस की कीमत 1500 रुपए रखने के साथ ही उन्होंने  इसके पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है. ऐश्वर्या और देवयानी ने बताया कि मेंसट्रूअल हाईजीन के बारे में जागरूकता बढ़ने से डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड्स की बिक्री में इजाफा हुआ है. हालांकि सैनिटरी पैड्स के अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से इसे डिस्पोज करने की भी चुनौती सामने खड़ी हो गई है.

ऐसे में 'क्लींज राइट' नाम की यह डिवाइस काफी कारगर साबित हो सकती है. 'क्लींज राइट' को चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं है. इसमें पैडल से संचालित होने वाले प्लंजर्स लगे होते हैं, जो पानी से भरे एक चेंबर में मूव करते रहते हैं. यह प्लंजर्स कपड़ों के पैड से मेंस्ट्रूअल ब्लड खींचकर पानी से साफ कर देते हैं.

इस डिवाइस की एक और खास बात यह भी है कि इसमें आप बच्चों के छोट कपड़े भी आसानी से धो सकेंगे. छात्राओं का दावा है कि इस डिवाइस से रीयूजेबल होने वाले सैनिट्री पैड पूरी तरह से सुरक्षित हैं. इसके ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल से बायोमेडिकल वेस्टेज कम होगा जो स्वच्छता के लिहाज से भी सही है.

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