केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान अय्यप्पा स्वामी के दर्शन के लिए एक खास उम्र वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है. इस मुद्दे पर केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख नरम करते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने कहा है कि इस मसले पर धार्मिक, सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों के साथ गहन विचार-विमर्श किया जाएगा.
सरकार ने यह भी साफ किया है कि इतनी पुरानी धार्मिक परंपरा में बदलाव करने से पहले विभिन्न पक्षों की राय को तवज्जो दी जाएगी. हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया है कि सबरीमाला मंदिर से जुड़े पिछले अनुभवों, महिलाओं समेत अन्य भक्तों की प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखा जाएगा.
केरल की वाम लोकतांत्रिक सरकार ने कहा है कि वे व्यापक चर्चा और सभी संबंधित समुदायों के सुझावों के आधार पर ही कोई अंतिम फैसला लेंगी. इसके लिए प्रमुख धार्मिक विद्वानों, समाज सुधारकों और आम जनता के विचार भी महत्वपूर्ण होंगे.
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सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई 9 अप्रैल से शुरू करेगी. इस पीठ की अगुआई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत करेंगे. सुनवाई के दौरान धार्मिक प्रथाओं, समानता के अधिकार तथा संवैधानिक नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने से जुड़ी दिक्कतें पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा. कोर्ट ने वरिष्ठ एडवोकेट के. परमेश्वर और शिवम सिंह को एमाइकस क्योरे के रूप में नियुक्त किया है, जो सभी पक्षों की दलीलों को समेकित और व्यवस्थित रूप से पेश करेंगे.
इस विवाद के बीच अप्रैल में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव ने राजनीतिक और सामाजिक बहसों को और अधिक तीव्र कर दिया है. सभी की निगाहें अब अगले फैसले पर टिकी हैं, जो धार्मिक आस्था और समाज में समानता के बीच संतुलन स्थापित करेगा.