केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से सोना गायब होने के मामले ने राज्य की राजनीति और धार्मिक संस्थाओं को हिला कर रख दिया था. इस केस में कई बड़े नाम सामने आए, जिनमें ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष एन वासु भी शामिल थे. अब इस बहुचर्चित मामले में एक बड़ा मोड़ आया है. 90 दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद कोर्ट ने एन वासु को जमानत दे दी है. इस फैसले ने केस को फिर सुर्खियों में ला दिया है.
कोल्लम विजिलेंस कोर्ट का फैसला
बुधवार को केरल के कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने पूर्व TDB अध्यक्ष एन वासु को जमानत दे दी. अदालत ने यह जमानत वैधानिक आधार पर दी, क्योंकि उनकी 90 दिन की रिमांड अवधि पूरी हो चुकी थी. भारतीय कानून के मुताबिक, यदि तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को सांविधिक जमानत का अधिकार मिल जाता है. एन वासु ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए अदालत से राहत मांगी थी. कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उनकी जमानत मंजूर कर ली.
क्या है गोल्ड चोरी मामला?
यह मामला सबरीमला मंदिर के दरवाजों की चौखटों से सोने की कथित हेराफेरी से जुड़ा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, मंदिर की संरचना में लगे सोने के हिस्सों में अनियमितता पाई गई थी. इसी को लेकर विजिलेंस ने जांच शुरू की और कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. एन वासु इस केस में तीसरे आरोपी हैं. उन पर आरोप है कि मंदिर की संपत्ति से जुड़े इस मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध रही.
11 नवंबर 2025 को हुई थी गिरफ्तारी
एन वासु को 11 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. तब से वह रिमांड पर थे और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही थीं. 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने सांविधिक जमानत की अर्जी लगाई. अदालत ने तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को देखते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी. हालांकि केस अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.