राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक शुक्रवार से कर्नाटक के बेलगावी में शुरू हो रही है. संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में सं संगठन के विस्तार, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और देश के मौजूदा हालात समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला चर्चा में है. माना जा रहा है कि बैठक में चंदा चोरी के मुद्दे पर भी मंथन हो सकता है?
संघ के शताब्दी वर्ष में हो रही यह बैठक संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. सरसंघचालक मोहन भागवत से लेकर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित छह सह सरकार्यवाह और संघ के अखिल भारतीय अधिकारी शामिल होंगे.
कर्नाटक के बेलगावी में आरएसएस के देशभर के 46 प्रांतों और 11 क्षेत्रों के प्रांत प्रचारक,सह प्रांत प्रचारक,क्षेत्र प्रचारक और सह क्षेत्र प्रचारक शिरक करेंगे. साथ ही संघ से जुड़े 32 विभिन्न संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी बैठक में मौजूद रहेंगे, जिसमें वीएचपी, एबीवीपी, वनवासी कल्याण आश्रम, बीजेपी सहित वैचारिक संगठन मंत्री भी भाग लेंगे.
कर्नाटक में आरएसएस की बड़ी बैठक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक को लेकर सुनील आंबेकर ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाली बैठक में पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की जाएगी. खास तौर पर शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में शुरू किए गए शाखा विस्तार अभियान का आकलन होगा. यह देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में नई शाखाएं शुरू हुईं, किन स्थानों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली और आने वाले महीनों में अधिक से अधिक नई शाखाएं शुरू करने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाए.
बेलगावी की बैठक में इस साल आयोजित किए गए संघ के विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों की भी समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा शताब्दी वर्ष के तहत विजयादशमी 2026 तक प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि समाज के अधिक से अधिक लोगों तक संगठन की पहुंच कैसे बढ़ाई जाए और शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को व्यापक जनभागीदारी के साथ कैसे आगे बढ़ाया जाए.
संघ की बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत के वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित प्रवास कार्यक्रम पर भी विस्तार से विचार होगा. उनके देशभर के विभिन्न राज्यों और प्रांतों के दौरे, स्वयंसेवकों से संवाद तथा सामाजिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा की जाएगी. सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक की तैयारियों के सिलसिले में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 6 जुलाई को ही बेलगावी पहुंच गए थे.
संघ की बैठक में अहम एजेंडा क्या होगा
बेलगावी की यह बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शताब्दी वर्ष के अगले चरण की रणनीति तय करने, संगठन के विस्तार की गति बढ़ाने और आने वाले समय के लिए कार्ययोजना तैयार करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. संघ के इतिहास में यह अंतिम अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक होगी. अगले वर्ष से सभी अखिल भारतीय बैठकें क्षेत्र के अनुसार होंगी.
संघ के अनुसार बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों और जातिगत जनगणना जैसे महत्वपूर्ण समसामयिक विषयों पर भी मंथन होगा. इन मुद्दों पर संगठन की भावी कार्ययोजना और सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों पर भी विचार किया जाएगा. इसके अलावा श्रीराम मंदिर के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है, लेकिन यह विषय बैठक के आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं है. बैठक में पूरे देश में हुए संघ शिक्षा वर्ग का भी विश्लेषण किया जाएगा.
राम मंदिर के मुद्दे पर क्या होगा मंथन?
आरएसएस की अखिल भारतीय प्रांच प्रचारक की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब देश में राम मंदिर के चढ़ावा और चंदा चोरी का मुद्दा गर्म है. गुरुवार को बेगवामी में संघ के छोटी टोली की बैठक की गई है, जिसमें राम मंदिर के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जबकि शुक्रवार से प्रारंभ होने वाली बैठक में संघ के संगठनात्मक बदलाव के साथ-साथ राम मंदिर के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है.
सूत्रों के माने तो राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले पर भी बैठक के दौरान चर्चा हो सकती है. हालांकि, इस मुद्दे को आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है. इसके बाद भी बैठक में इस विषय पर अनौपचारिक स्तर पर विचार-विमर्श होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि संघ के इतिहास में शायद पहली बार है जब संघ के प्रचारक का नाम इस तरह से उछाला गया है.
चंपत राय और गोपाल राव संघ के प्रचारक हैं और दोनों को संघ ने विश्व हिंदू परिषद में भेजे गए हैं. राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना को लेकर संघ के स्वयंसेवकों के बीच भी कई तरह की चर्चाएं हो रही है. इसके चलते सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को बयान जारी करना पड़ा. अब देखना है कि संघ इस मामले में क्या निर्णय लेता है. ऐसे में संघ की तीन दिनों तक चलने वाली बैठक पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं?