25 मई 1977 में चीन में शेक्सपीयर की रचनाओं पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए. यह चीन में राजनीतिक उदारीकरण का एक नया संकेत था. क्योंकि कम्युनिस्ट सरकार ने सांस्कृतिक क्रांति की वजह से विलियम शेक्सपियर की रचनाओं पर दशकों पहले जो बैन लगाया था, उसे हटा दिया. चीनी सरकार की यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण थी कि सांस्कृतिक क्रांति का अंत हो चुका था.
1966 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के नेता माओ त्से-तुंग ने "सांस्कृतिक क्रांति" की घोषणा की. इसका उद्देश्य चीनी समाज में कम्युनिस्ट क्रांतिकारी जोश और उत्साह को पुनर्जीवित करना था. उनकी पत्नी, च्यांग चिंग को चीन की अनौपचारिक संस्कृति सचिव बनाया गया.
हालांकि, व्यवहार में इस क्रांति का मकसद उन अधिकारियों की हत्या करना था, जिन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति अपनी निष्ठा खो दी थी. हजारों अधिकारियों और नागरिकों को अस्पष्ट रूप से परिभाषित "राज्य के विरुद्ध अपराध" के आरोप में गिरफ्तार और हिरासत में लिया गया. साथ ही उन सभी संगीत, साहित्य, फिल्म या थिएटर जैसी किसी भी सांस्कृतिक कृति पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसमें अपेक्षित कम्युनिस्ट वैचारिक सामग्री नहीं थी.
हालांकि, 1970 के दशक की शुरुआत तक, चीन पश्चिम, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ नए और बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए बेताब था. इसका एक कारण व्यापार के नए स्रोत तलाशने की इच्छा थी, लेकिन दूसरा कारण सोवियत संघ के साथ टकराव का बढ़ता डर भी था.
राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की 1972 की चीन यात्रा इसी अभियान का हिस्सा थी. अक्टूबर 1976 में सांस्कृतिक क्रांति की आधिकारिक तौर पर समाप्ति की घोषणा की गई. वहीं मई 1977 में विलियम शेक्सपियर की रचनाओं पर लगे प्रतिबंध की समाप्ति की घोषणा इसका स्पष्ट प्रमाण थी. यह एक ऐसा कदम था जिसमें लागत तो कम आई, लेकिन पश्चिमी समाज के साथ जनसंपर्क के लिहाज से इसके निश्चित रूप से बहुत लाभ हुए.प्रतिबंध हटाए जाने की घोषणा के साथ ही, चीनी सरकार ने यह भी कहा कि शेक्सपियर की रचनाओं का चीनी भाषा संस्करण जल्द ही उपलब्ध होगा.