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कभी कब्रिस्तान तो कभी उल्टी ... व्हेल की दुनिया कितनी रहस्यमयी है?

समुद्र की अथाह गहराई में कई सारे राज छुपे हैं. इनमें से अधिकतर अनदेखे हैं और इंसानों को इनके बारे में पता भी नहीं है. इसी समुद्र में राज करते हैं व्हेल. समुद्र जितनी ही रहस्यमय व्हेल की दुनिया भी होती है. ऐसे चलिए व्हेलों के संसार पर डालते हैं एक नजर.

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कुछ दिनों पहले समुद्र की गहराईयों में मिला लाखों साल पुराना व्हेल का कब्रिस्तान (Photo - AI Generated)
कुछ दिनों पहले समुद्र की गहराईयों में मिला लाखों साल पुराना व्हेल का कब्रिस्तान (Photo - AI Generated)

समुद्र की गहराइयों में आज भी ऐसे कई रहस्य छिपे हैं, जिनके बारे में इंसानों को बहुत कम जानकारी है. इन्हीं गहराईयों में व्हेल जैसे धरती के सबसे विशालका जीव भी रहते हैं और इनकी दुनिया भी रहस्यों से भरी हुई है. अक्सर किसी न किसी वजह से व्हेल चर्चा में रहती है. कभी उल्टी के लिए तो, कभी इनके दूध के लिए, तो कभी इनकी हड्डियों के लिए. 

पिछले साल अहमदाबाद में कुछ लोगों को 2 किलोग्राम व्हेल की उल्टी के साथ पकड़ा गया था. दो किलो व्हेल की उल्टी की कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई थी. अब सवाल उठता है कि आखिर व्हेल की उल्टी में ऐसा क्या होता है कि इसकी कीमत इतनी ज्यादा होती है. 

व्हेल की उल्टी का किस चीज में होता है इस्तेमाल
दरअसल, व्हेल की उल्टी को एंबरग्रीस कहा जाता है. इसे फ्लोटिंग गोल्ड भी कहा जाता है. यह तब बनता है, जब व्हेल किसी अपचनीय चीज को खा लेता है और भी मोम जैसी चीज के रूप में इसे उल्टी के तौर पर निकालता है. इसे एंबरग्रीस कहा जाता है और यह सुगंध को स्थिर यानी कॉन्सटेंट करने वाला होता है. इसका इस्तेमाल परफ्यूम इंडस्ट्री में होता है. दुनियाभर में व्हेल की उल्टी की खूब तस्करी होती है. 

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इसी तरह व्हेल का दूध भी चर्चा में रहता है. इसके बारे में भी तरह- तरह की बातें होती रहती है. हाल ही में व्हेल का अपने बच्चे को दूध पिलाता हुआ एक वीडियो वायरल हुआ था. हालांकि, बाद में यह फर्जी वीडियो साबित हुआ. क्योंकि, व्हेल समुद्र के शोर- शराबे से दूर काफी गहराईयों में जाकर एकदम शांत जगह अपने बच्चे को दूध पिलाती है. 

बच्चे को 6 महीने भूखा हरकर पिलाती है दूध
अब व्हेल के दूध और इसके बच्चों से जुड़े भी कई ऐसे फैक्ट हैं जो कम ही लोगों को पता होंगे. व्हेल के दूध में वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है—लगभग 50 प्रतिशत तक, इसलिए यह मलाई की तरह गाढ़ा होता है.व्हेल के बच्चों को हर दिन सैकड़ों लीटर इस पौष्टिक दूध की आवश्यकता होती है. छह महीनों तक, एक मादा हंपबैक व्हेल प्रतिदिन 350 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन करती है, जबकि वह स्वयं कुछ भी नहीं खाती. छह महीने तक लगातार भूखा रहकर हर दिन 350 लीटर दूध अपने बच्चों को पिलाती है. इससे पहले धा साल पृथ्वी के ध्रुवों के पास स्थित अपने भोजन क्षेत्रों में वजन बढ़ाने में बिताती हैं.

लाखों साल पुराने होते हैं व्हेल के कब्रिस्तान
अब वैज्ञानिकों को व्हेल से जुड़ी एक और रहस्यमय चीज समुद्र की गहराईयों में मिली है. समुद्र के अंदर करीब 7 किलोमीटर की गहराई में व्हेलों का एक विशाल कब्रिस्तान मिला है, जहां लाखों साल पुराने कंकाल आज भी सुरक्षित पड़े हुए हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि यहां मिले कुछ व्हेलों के अवशेष करीब 53 लाख साल पुराने हैं. यानी ये कंकाल उस समय के हैं, जब इंसान का आधुनिक स्वरूप भी धरती पर मौजूद नहीं था.

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न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने यह खोज दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में की है. यह जगह समुद्र की सतह से लगभग 23 हजार फीट (करीब 7 किलोमीटर) नीचे स्थित है. इतनी गहराई में सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंचती. यहां का दबाव इतना ज्यादा होता है कि कोई इंसान बिना विशेष पनडुब्बी के कुछ ही क्षणों में क्रश हो सकता है.

आखिर व्हेलों का कब्रिस्तान बनता कैसे है?
जब कोई व्हेल समुद्र में मर जाती है, तो उसका विशाल शरीर धीरे-धीरे समुद्र की तलहटी तक पहुंच जाता है. वहां उसका शव समुद्री जीवों के लिए भोजन का बड़ा स्रोत बन जाता है. कई सालों तक अलग-अलग जीव उसके मांस और हड्डियों से पोषण लेते रहते हैं.

इसी वजह से व्हेल का शव समुद्र की गहराई में एक छोटे इकोसिस्टम या बस्ती की तरह काम करने लगता है. वैज्ञानिकों ने इस जगह पर जेलीफिश, ट्यूबवर्म, समुद्री खीरे, स्क्वाट लॉब्स्टर, क्लैम और कई दूसरे जीवों को पाया, जो इन हड्डियों के आसपास रह रहे थे.

इस कब्रिस्तान में हैं कई अनदेखे जीव
वैज्ञानिकों ने 2023 में कई गहरे समुद्री अभियानों के दौरान इस क्षेत्र का सर्वे किया. उन्होंने यहां पांच अलग-अलग व्हेल अवशेष स्थलों की पहचान की. इनमें दाढ़ीदार व्हेल और बीक्ड व्हेल की खोपड़ियां भी मिलीं. शोधकर्ताओं का मानना है कि यहां मौजूद कई जीव ऐसी प्रजातियां हो सकती हैं, जिन्हें विज्ञान ने अभी तक दर्ज ही नहीं किया है.

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लाखों साल तक कैसे बची रहीं हड्डियां?
आमतौर पर समुद्र में जैविक अवशेष समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, लेकिन यहां मिली हड्डियां असाधारण रूप से सुरक्षित थीं. वैज्ञानिकों के अनुसार, व्हेल की हड्डियां बहुत घनी होती हैं. इसके अलावा ये इतनी गहराई में मौजूद थीं कि मिट्टी और तलछट में दबने से बच गईं.हड्डियों पर समुद्री खनिजों की एक पतली परत भी जम गई थी, जिसने उन्हें खराब होने से बचाए रखा.

एक ही जगह इतनी व्हेलें क्यों मिलीं?
यह सवाल अभी भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है. संभव है कि ये व्हेलें इसी इलाके में रहती हों और प्राकृतिक कारणों से उनकी मौत हुई हो. कुछ व्हेल गहरे समुद्र में गोता लगाने के दौरान बीमारी या थकान का शिकार भी हुई हों.शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि समुद्र तल की V आकार की बनावट ने व्हेलों के शवों को एक ही जगह इकट्ठा होने में मदद की होगी.

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वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब तक मिला सबसे गहरा, सबसे बड़ा और सबसे पुराना व्हेल कब्रिस्तान हो सकता है. यह खोज बताती है कि धरती के सबसे कठिन और अंधेरे वातावरण में भी जीवन अपने लिए रास्ता ढूंढ लेता है.समुद्र की गहराई में छिपा यह व्हेल कब्रिस्तान न सिर्फ लाखों साल पुराने जीवों की कहानी सुनाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रकृति के रहस्य आज भी इंसानों की पहुंच से कहीं ज्यादा बड़े हैं.

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