झूठ बोलना इंसानी व्यवहार का एक हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोग सबसे ज्यादा झूठ कब बोलते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह क्या होती है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए अमेरिका की मनोवैज्ञानिक डॉ. बेला डीपाउलो (Bella DePaulo) और उनकी टीम ने एक चर्चित रिसर्च की थी, जिसे बाद में University of Massachusetts से जुड़े शोध के रूप में भी व्यापक पहचान मिली.
1996 में पब्लिश इस रिसर्च 'Lying in Everyday Life' में शोधकर्ताओं ने लोगों से कहा कि वे एक सप्ताह तक अपनी हर बातचीत और उसमें बोले गए झूठ को डायरी में दर्ज करें. इस स्टडी में सामने आया कि हर व्यक्ति झूठ जरूर बोलता है, लेकिन उतना नहीं जितना आमतौर पर माना जाता है.
रिसर्च के मुताबिक, कॉलेज के छात्र औसतन दिन में करीब दो बार, जबकि दूसरे वयस्क करीब एक बार झूठ बोलते पाए गए. हालांकि बाद की कई स्टडी में यह भी सामने आया कि ज्यादातर लोग बहुत कम झूठ बोलते हैं, जबकि कुछ लोग ही बार-बार झूठ बोलने की आदत रखते हैं.
आखिर लोग सबसे ज्यादा झूठ क्यों बोलते हैं?
रिसर्च में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि ज्यादातर झूठ किसी को धोखा देने के लिए नहीं बोले जाते. लोग अक्सर झूठ बोलते हैं ताकि सामने वाले की भावनाएं आहत न हों, किसी विवाद से बचा जा सके, अपनी छवि बेहतर बनी रहे या खुद को शर्मिंदगी से बचाया जा सके.
मनोविज्ञान की भाषा में ऐसे झूठ को 'व्हाइट लाइ' (White Lie) कहा जाता है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी दोस्त का नया हेयरकट पसंद न आने के बावजूद आप कह दें कि "अच्छा लग रहा है", तो इसे व्हाइट लाइ माना जाता है.
सबसे ज्यादा किससे बोला जाता है झूठ?
शोध में यह भी पाया गया कि लोग सबसे ज्यादा झूठ अजनबियों से नहीं, बल्कि दोस्तों, परिवार, जीवनसाथी और सहकर्मियों से बोलते हैं. इसकी वजह यह है कि इन्हीं लोगों से हमारी सबसे ज्यादा बातचीत होती है और रिश्तों को संभालने के लिए कई बार लोग सच छिपा देते हैं.
क्या झूठ पकड़ना आसान है?
अगर आपको लगता है कि चेहरे के हाव-भाव देखकर झूठ पकड़ना आसान है, तो वैज्ञानिक इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. कई शोध बताते हैं कि सामान्य लोग किसी के झूठ को पहचानने में औसतन करीब 54 प्रतिशत मामलों में ही सही साबित होते हैं. यानी सिर्फ चेहरे या आवाज देखकर झूठ पकड़ लेना उतना आसान नहीं है, जितना फिल्मों में दिखाया जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि झूठ बोलने के पीछे हर व्यक्ति की वजह अलग हो सकती है. इसलिए किसी एक व्यवहार के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि सामने वाला झूठ बोल रहा है. लेकिन इतना जरूर है कि यह रिसर्च बताती है कि इंसान सबसे ज्यादा झूठ तब बोलता है, जब उसे लगता है कि सच बोलने से रिश्ता बिगड़ सकता है, विवाद हो सकता है या उसकी अपनी छवि को नुकसान पहुंच सकता है.