दोपहर का खाना खाने के बाद अगर कोई आपसे कहे कि अब आप 20 मिनट सो जाइए... और इसके लिए आपका बॉस खुद इजाजत दे, तो शायद आपको लगे कि मजाक हो रहा है. लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा लोगों को हैरान कर रहा है. दावा है कि जापान में कर्मचारियों को लंच ब्रेक के दौरान सोने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकें. यह सुनकर कई लोग सोच रहे हैं कि क्या सच में जापान जैसा अनुशासित देश अपने कर्मचारियों को ऑफिस में सोने देता है? क्या वहां सरकार ने ऐसा कोई नियम बना रखा है? या फिर वायरल पोस्ट में आधी-अधूरी जानकारी परोसी जा रही है? आइए जानते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है.
अगर आप भी यह मान बैठे हैं कि जापान सरकार ने कर्मचारियों के लिए लंच के बाद सोना जरूरी कर दिया है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. असलियत यह है कि जापान में ऐसा कोई राष्ट्रीय कानून या सरकारी नियम मौजूद नहीं है, जिसमें कर्मचारियों को दोपहर में झपकी लेने का अधिकार या आदेश दिया गया हो. यानी सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह सही नहीं है.
फिर यह दावा वायरल क्यों हो रहा है?
दरअसल, जापान की कई बड़ी प्राइवेट कंपनियां पिछले कुछ सालों से कर्मचारियों की सेहत और उनकी वर्क प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर खास ध्यान दे रही हैं. इसी वजह से कई ऑफिसों में Nap Room, Nap Pod और छोटे-छोटे रिलैक्सेशन एरिया बनाए गए हैं, जहां कर्मचारी चाहें तो लंच ब्रेक या खाली समय में कुछ मिनट आराम कर सकते हैं. कंपनियों का मानना है कि कुछ मिनट की झपकी लेने के बाद कर्मचारी ज्यादा फोकस के साथ काम करता है और गलतियां भी कम करता है.
अगर आपने कभी जापान की ट्रेनों या ऑफिसों की तस्वीरें देखी हों, तो आपने कई लोगों को बैठे-बैठे आंखें बंद किए देखा होगा. जापान में इसे इनेमुरी (Inemuri) कहा जाता है. दिलचस्प बात यह है कि वहां इसे हमेशा आलस नहीं माना जाता. कई बार लोग इसे इस बात का संकेत समझते हैं कि व्यक्ति ने इतना ज्यादा काम किया है कि कुछ मिनट के लिए उसकी आंख लग गई. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लोग ऑफिस में घंटों तक सोते रहते हैं. इनेमुरी सिर्फ कुछ मिनटों की हल्की झपकी होती है, जिसके बाद व्यक्ति फिर से अपने काम में लग जाता है.
मेहनती जापान के लोग आखिर नींद पूरी क्यों नहीं कर पाते?
यह जानकर शायद आपको हैरानी होगी कि दुनिया की सबसे मेहनती आबादी में गिने जाने वाले जापानी लोग नींद के मामले में काफी पीछे हैं. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां के लोग औसतन सिर्फ 5 से 7 घंटे ही सो पाते हैं, जबकि हेल्थ एक्सपर्ट्स वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानते हैं. सरकारी सर्वे बताते हैं कि करीब 40 प्रतिशत जापानी लोग सप्ताह के दिनों में 6 घंटे से भी कम सोते हैं.
लगातार कम सोने से शरीर में थकान, तनाव, काम में ध्यान की कमी, याददाश्त कमजोर होना और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि अब कंपनियां एंप्लॉयी की अच्छी नींद को भी उतनी ही अहमियत देने लगी हैं, जितनी उनके काम को.
क्या सिर्फ 20 मिनट की झपकी काफी है?
सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च बताती हैं कि 10 से 20 मिनट की पावर नैप शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है. ऐसी छोटी झपकी से दिमाग पहले से ज्यादा एक्टिव हो जाता है, थकान कम महसूस होती है, याददाश्त और फोकस बेहतर होता है, मूड अच्छा रहता है और काम करने की क्षमता बढ़ जाती है. हालांकि एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि अगर झपकी 30-40 मिनट से ज्यादा लंबी हो जाए, तो उठने के बाद कुछ समय तक सुस्ती महसूस हो सकती है. इसे स्लीप इनर्शिया कहा जाता है.
अब सिर्फ जापान ही नहीं, दुनिया भी बदल रही है
एक समय था जब सबसे ज्यादा घंटे ऑफिस में बैठने वाले कर्मचारी को सबसे मेहनती माना जाता था. लेकिन अब बड़ी-बड़ी कंपनियां समझ चुकी हैं कि थका हुआ दिमाग ज्यादा देर तक काम तो कर सकता है, लेकिन बेहतर फैसले नहीं ले सकता. इसी सोच के साथ दुनिया की कई कंपनियां कर्मचारियों के लिए वेलनेस प्रोग्राम, मेडिटेशन, रिलैक्सेशन जोन और नैप स्पेस जैसी सुविधाएं शुरू कर रही हैं. अब फोकस सिर्फ लंबे समय तक काम कराने पर नहीं, बल्कि बेहतर तरीके से काम कराने पर है.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिर्फ देर तक काम करना ही सफलता की गारंटी नहीं है. अगर शरीर थका हुआ होगा और दिमाग को आराम नहीं मिलेगा, तो मेहनत का असर भी कम हो जाएगा. शायद यही वजह है कि अब दुनिया धीरे-धीरे यह समझने लगी है कि स्मार्ट वर्क का मतलब सिर्फ नई तकनीक नहीं, बल्कि सही समय पर आराम करना भी है.