ट्रेन में सफर के दौरान टिकट को लेकर यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच बहस के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है, जिसमें एक यात्री अपने बच्चे की टिकट को लेकर टीटीई से बहस करता नजर आ रहा है. बातचीत इतनी बढ़ जाती है कि दोनों तरफ से वीडियो बनाने और आरपीएफ को बुलाने की बात तक होने लगती है. वायरल वीडियो में टीटीई यात्री से बच्चे की टिकट को लेकर सवाल करती है. इस पर यात्री कहता है कि बच्चे की टिकट नहीं ली गई है. दोनों के बीच उम्र को लेकर भी बहस होती दिखाई देती है. टीटीई बच्चे की उम्र और उसकी टिकट के बारे में पूछती है, जबकि यात्री अपनी बात पर कायम रहता है.
बातचीत के दौरान यात्री यह भी कहता सुनाई देता है कि बच्चा छठी क्लास में पढ़ता है. टीटीई का कहना है कि बच्चे के लिए टिकट जरूरी है. इसी बात पर दोनों के बीच बहस बढ़ जाती है. यात्री टीटीई से कहता है कि वह ज्यादा तेज आवाज में बात न करे, जबकि टीटीई भी उसे आराम से बात करने के लिए कहती है. मामला इतना बढ़ जाता है कि यात्री और टीटीई एक-दूसरे का वीडियो बनाने की बात करने लगते हैं. यात्री कहता है कि वह बच्चे की टिकट बनवाएगा. वहीं टीटीई का कहना है कि अगर बच्चा तय उम्र सीमा से बड़ा है तो उसके लिए टिकट जरूरी है.
इस वीडियो ने एक बार फिर लोगों का ध्यान रेलवे के बच्चों की टिकट से जुड़े नियमों पर खींचा है. आखिर कितनी उम्र तक बच्चे बिना टिकट ट्रेन में सफर कर सकते हैं? किस उम्र में आधी टिकट लगती है और कब बच्चे के लिए पूरी टिकट खरीदनी पड़ती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
5 साल से छोटे बच्चे के लिए क्या है नियम?
रेलवे के नियमों के मुताबिक, 5 साल से कम उम्र के बच्चे बिना अलग बर्थ या सीट के माता-पिता के साथ यात्रा कर सकते हैं और इसके लिए अलग किराया नहीं देना होता. यानी अगर आप चाहते हैं कि छोटा बच्चा आपके साथ ही बैठे या आपकी बर्थ पर रहे तो उसके लिए अलग टिकट लेना जरूरी नहीं है. हालांकि, अगर माता-पिता छोटे बच्चे के लिए अलग बर्थ चाहते हैं तो अलग टिकट लेना पड़ सकता है. इसलिए टिकट बुक करते समय बच्चे की उम्र और बर्थ की जरूरत को सही तरीके से बताना जरूरी है.
बच्चों के लिए क्या है रेलवे का नियम?
भारतीय रेलवे में बच्चों की टिकट को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम रहता है. खासकर यह सवाल कि किस उम्र के बच्चे का टिकट लेना जरूरी है और किस उम्र में हाफ टिकट लगती है. रेलवे के नियमों के मुताबिक, 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग टिकट लेना जरूरी नहीं होता, अगर उनके लिए अलग सीट या बर्थ नहीं ली जा रही है. ऐसे बच्चे अपने माता-पिता या अभिभावक के साथ मुफ्त में सफर कर सकते हैं. हालांकि, उन्हें अलग सीट या बर्थ नहीं दी जाती. बच्चे को माता-पिता या साथ यात्रा कर रहे व्यक्ति के साथ ही बैठना या सोना होता है.
वहीं, 5 साल से लेकर 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकट लेना जरूरी होता है. इस उम्र में अगर बच्चे के लिए अलग सीट या बर्थ नहीं ली जाती है और हाफ किराये पर टिकट बुक की जा सकती है. यही वजह है कि इसे आम बोलचाल में बच्चों की हाफ टिकट कहा जाता है.
हाफ टिकट लेने पर क्या बच्चे को अलग सीट मिलती है?
यह बात समझना बेहद जरूरी है कि हाफ टिकट का मतलब अलग सीट या बर्थ मिलना नहीं है. अगर 5 से 12 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए रियायती किराये पर टिकट ली गई है और अलग बर्थ नहीं चुनी गई है, तो बच्चे को माता-पिता या उसके साथ सफर कर रहे व्यक्ति की सीट पर ही बैठना या सोना होगा. यानी अगर आपने बच्चे के लिए कम किराये वाली टिकट बुक की है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे के लिए ट्रेन में अलग सीट या बर्थ भी तय हो गई है. अलग बर्थ चाहिए तो बच्चे के लिए पूरा किराया देकर टिकट बुक करनी होती है.
इसलिए ट्रेन में सफर करने से पहले बच्चे की उम्र के साथ यह भी तय कर लें कि उसके लिए अलग सीट या बर्थ चाहिए या नहीं. इसी आधार पर टिकट बुक करने पर सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी या बहस से बचा जा सकता है.
12 साल की उम्र के बाद क्या होगा?
12 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे को सामान्य तौर पर एडल्ट पैसेंजर की श्रेणी में माना जाता है. ऐसे में उसके लिए एडल्ट पैसेंजर के किराये के हिसाब से टिकट बुक करनी होती है. इसलिए बच्चे की टिकट बुक करते समय उसकी सही उम्र दर्ज करना बहुत जरूरी है. केवल यह कहना कि बच्चा स्कूल में पढ़ता है या छोटा दिखता है, टिकट नियम बदलने का आधार नहीं है.
वायरल वीडियो में असली विवाद किस बात पर था?
वायरल वीडियो में यात्री और टीटीई के बीच मुख्य विवाद बच्चे की टिकट को लेकर दिखाई देता है. बातचीत में यात्री बच्चे की उम्र को लेकर अपनी बात रखता है, जबकि टीटीई टिकट बनवाने की बात करती है. यात्री की तरफ से यह भी कहा जाता है कि बच्चा छठी कक्षा में पढ़ता है. दूसरी तरफ टीटीई उम्र के आधार पर टिकट की जरूरत बता रहा है. दोनों के बीच बातचीत का लहजा धीरे-धीरे तेज होता जाता है और मामला बहस तक पहुंच जाता है. वीडियो में यात्री यह कहते हुए भी नजर आता है कि वह बच्चे की टिकट बनवाएगा और बाद में टिकट लेने की बात करता है. टीटीई भी अपनी ड्यूटी के तहत टिकट की जांच करने की बात करता दिखाई दे रही है.