रेलवे में तत्काल टिकट बुकिंग करना किसी टास्क से कम नहीं है. सोशल मीडिया पर कई लोग ये शिकायत कर रहे हैं कि तत्काल टिकट बुक नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में लोग एजेंट का सहारा लेकर अपनी टिकट बुक करवा रहे हैं और एजेंट एक टिकट पर काफी ज्यादा पैसे चार्ज कर रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि जब सामान्य तरीके से तत्काल टिकट बुक होने में दिक्कत हो रही है तो फिर एजेंट कैसे कंफर्म टिकट बुक कर लेते हैं.
एजेंट के टिकट बुक करने की टाइमिंग भी काफी अलग है, लेकिन वो फिर भी तत्काल में कंफर्म टिकट बुक कर देते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर एंजेंट के टिकट बुक करने को लेकर नियम क्या है?
क्या है एजेंट के तत्काल टिकट बुकिंग के नियम?
रेल मंत्रालय की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तत्काल टिकटों की बड़े पैमाने पर बुकिंग रोकने के लिए रेलवे ने अधिकृत टिकटिंग एजेंटों को बुकिंग विंडो खुलने के पहले 30 मिनट तक टिकट बुक करने की अनुमति नहीं दी है. यानी जब तत्काल की विंडो खुलती है, उससे 30 मिनट बाद तक एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकते हैं. एसी कैटेगरी के लिए सुबह 10 बजे से 10:30 बजे तक एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकते जबकि नॉन एसी कैटेगरी के लिए सुबह 11 बजे से 11:30 बजे तक टिकट बुक कर सकते हैं.
फिर कैसे मिलती है कंफर्म टिकट?
ऐसे में सवाल है कि जब एजेंट के टिकट बुक करने का समय ही आधे घंटे बाद है तो फिर भी एजेंट को कंफर्म टिकट कैसे मिल जाती है. अगर नियमों के हिसाब से देखें तो एजेंट को रेलवे की ओर से ना कोई स्पेशल कोटा मिलता है और ना ही टिकट बुक करने में कोई सहूलियत दी जाती है. यहां तक कि पिछले साल 15 जुलाई से कंप्यूटरीकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर और अधिकृत एजेंटों के माध्यम से तत्काल टिकट बुक करने पर यात्री के मोबाइल नंबर पर OTP सत्यापन भी अनिवार्य कर दिया गया है. इस प्रोसेस में भी काफी टाइम लगता है.
लेकिन, इतने नियमों के बाद भी एजेंट की ओर से कंफर्म टिकट देने की गारंटी की वजह से कई सवाल उठते हैं. हालांकि, इनका कोई ऐसा सिस्टम सार्वजनिक और लीगल नहीं है, जिससे ये पता चल सके कि उन्हें कंफर्म टिकट कैसे मिलती है.
बताया जाता है कि एजेंट ऑटो फिल जैसे टूल इस्तेमाल करते हैं, जिसमें नाम, उम्र आदि स्पीड से भर दिए जाते हैं. जहां आम आदमी को 40-60 सेकंड लगते हैं, वहीं एजेंट 5-10 सेकंड में फॉर्म भर देते हैं. इसके साथ ही तेज इंटरनेट के साथ वे मास्टर लिस्ट आदि का भी इस्तेमाल करते हैं. साथ ही कैप्चा आदि भरने के लिए भी कुछ टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से ऐसा होता है.
हालांकि, आईआरसीटी की ओर से एआई और एंटी बोट का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि स्क्रिप्ट और ऑटोमेशन पकड़े जा सकें. फिर भी एजेंट जिस तरह से टिकट बुक करते हैं, वो सार्वजनिक नहीं है और इस वजह से आईआरसीटीसी के प्रोसेस पर सवाल उठते हैं.