18 अगस्त 1227 में चंगेज़ खान की मौत हो गई थी. मंगोल शासक चंगेज खान को इतिहास में एक क्रूर आक्रांता के तौर पर जाना जाता है. उसने चीन के पूर्वी तट से लेकर पश्चिम में अरल सागर तक अपना साम्राज्य फैला लिया था. चंगेज खान शी शिया के चीनी साम्राज्य के विरुद्ध अभियान के दौरान शिविर में मर गया था . क्योंकि वह कुछ महीने पहले शायद किसी घोड़े से गिर गया था. इस चोट के कारण उसका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था. 60 साल से अधिक उम्र में वह कुछ ज्यादा ही कमजोर हो गया था.
चंगेज़ खान का जन्म लगभग 1162 में तेमुजिन के रूप में हुआ था. उनके पिता एक छोटे मंगोल सरदार थे. उनकी मृत्यु तब हुई जब तेमुजिन किशोरावस्था में ही था. तेमुजिन ने उनका स्थान लिया. लेकिन उसके कबीले ने इतने कम उम्र के सरदार की बात नहीं मानी. अस्थायी रूप से परित्यक्त होकर, तेमुजिन का परिवार मैदानी इलाकों के बीहड़ में अपने हाल पर छोड़ दिया गया.
किशोरावस्था के बाद ही तेमुजिन एक खूंखार योद्धा और करिश्माई व्यक्तित्व के रूप में उभर चुका था. उसने अनुयायियों को इकट्ठा करना और अन्य मंगोल नेताओं के साथ गठबंधन बनाना शुरू कर दिया था. दुश्मन कबीले ने उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया. इसके बाद तेमुजिन ने उस कबीले को हराने के लिए एक सेना संगठित की. सफल होने पर, उसने अन्य कबीलों के विरुद्ध मोर्चा संभाला और बलपूर्वक मंगोलों को एकजुट करने का प्रयास किया.
कई योद्धा स्वेच्छा से उसके पक्ष में आ गए, लेकिन जो नहीं आए उन्हें पराजित किया गया. इसके बाद उन लोगों को चंगेज खान ने अपनी बात मानने पर मजबूर किया या मृत्यु दे दी. पराजित कबीलों के कुलीन वर्ग को आम तौर पर मार डाला गया. 1206 तक, तेमुजिन एक विशाल मंगोल संघ का नेता बन गया था. उसे चंगेज खान की उपाधि प्रदान की गई. इसका अर्थ होता है - महासागरीय शासक.
खान ने आचार संहिता लागू की और अपनी सेनाओं को 10 की प्रणाली पर संगठित किया. एक दस्ते में 10 सैनिक, एक कंपनी में 10 दस्ते, एक रेजिमेंट में 10 कंपनियां और 10 रेजिमेंटों का एक 'तुमेन' (10,000 घुड़सवारों से बनी एक दुर्जेय सैन्य इकाई) होता था. अपने घुमंतू स्वभाव के कारण, मंगोल स्थिर सभ्यताओं की तुलना में कहीं अधिक घोड़े पालने में सक्षम थे.
चंगेज खान के सभी योद्धा घुड़सवार थे. किसी भी सेना का आधा हिस्सा तलवार और भाले चलाने वाले कवचधारी सैनिकों से बना होता था. शेष पंक्तियों में अधिकांश भाग हल्के घुड़सवार तीरंदाजों से भरा होता था. खान के परिवार और अन्य विश्वसनीय कबीले के सदस्यों ने इन अत्यधिक गतिशील सेनाओं का नेतृत्व किया और 1209 तक मंगोल चीन के विरुद्ध आगे बढ़ रहे थे.
जासूसों और खोजकर्ताओं के एक व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल करते. खान अपने दुश्मनों की एक कमजोरी का पता लगाता था. फिर एक ही बार में 250,000 घुड़सवारों के साथ उस कमजोर बिंदु पर हमला कर देता. बड़े शहरों पर हमला करते समय, मंगोलों ने गुलेल और मैंगोनेल जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया. दुश्मन को बाढ़ में डुबोने के लिए नदियों का मार्ग भी बदल दिया.
अधिकांश सेनाएं और शहर इस जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन के आगे ढह गए. मंगोल विजय के बाद हुए नरसंहारों ने आगे के प्रतिरोध के विचारों को समाप्त कर दिया. नरसंहार में बच गए लोगों को तेजी से बढ़ते मंगोल साम्राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता और संरक्षण प्रदान किया गया. 1227 तक, खान ने मध्य एशिया के अधिकांश भाग पर विजय प्राप्त कर ली थी और पूर्वी यूरोप, फारस और भारत में घुसपैठ की थी. उनका विशाल साम्राज्य मध्य रूस से पश्चिम में अरल सागर तक और उत्तरी चीन से पूर्व में बीजिंग तक फैला हुआ था.
18 अगस्त,1227 को, शी शिया राज्य में विद्रोह को दबाते हुए, चंगेज़ खान की मृत्यु हो गई. अपनी मृत्यु शैय्या पर उन्होंने शी शिया को धरती से मिटा देने का आदेश दिया. हमेशा की तरह आज्ञाकारी, खान के उत्तराधिकारियों ने पूरे शहरों और कस्बों को नष्ट कर दिया, और उनके सभी निवासियों को मार डाला या गुलाम बना लिया.
उनकी मृत्यु को गुप्त रखने के उनके आदेश का पालन करते हुए, चंगेज़ के उत्तराधिकारियों ने मंगोल साम्राज्य की राजधानी काराकोरम लौटते हुए उनके अंतिम संस्कार जुलूस को देखने वाले हर व्यक्ति का नरसंहार कर दिया. अपने जीवनकाल की तरह ही मृत्यु का तांडव मचाते हुए, उनके शव को एक अज्ञात कब्र में दफनाने से पहले कई लोगों को मार डाला गया. उनका अंतिम विश्राम स्थल आज भी एक रहस्य बना हुआ है.
चंगेज़ खान की मृत्यु के बाद मंगोल साम्राज्य का विस्तार जारी रहा और अंततः इसने यूरेशिया के अधिकांश निर्जन क्षेत्र को अपने अधीन कर लिया. यह साम्राज्य 14वीं शताब्दी में विघटित हो गया, लेकिन कई एशियाई राज्यों के शासक चंगेज़ खान और उनके सेनापतियों के वंशज होने का दावा करते रहे.