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परिसीमन का मसला है क्या... समझिए सरकार के उस बिल को, जिससे 850 हो जाएंगी लोकसभा सीटें

संसद में परिसीमन को लेकर बिल पेश किए गए हैं, जिनके जरिए देश में लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी होगी. तो समझते हैं ये बिल क्या है और इसे लेकर क्या विवाद है?

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परिसीमन के बाद लोकसभा की 850 सीटें हो जाएंगी. (Photo: PTI)
परिसीमन के बाद लोकसभा की 850 सीटें हो जाएंगी. (Photo: PTI)

संसद में आज तीन बिल पेश किए गए हैं, जिनके जरिए लोकसभा सीटों में विस्तार होगा. इनका मकसद लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण जल्दी लागू करना और नए सिरे से परिसीमन करना है. इसके बाद देश में लोकसभा सीटें 800 से ज्यादा हो सकती हैं. ऐसे में जानते हैं कि परिसीमन है क्या, कब तक सीटों में विस्तार होगा और किस आधार पर सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी. तो जानते हैं परिसीमन बिल से जुड़ी हर एक बात... 

दरअसल, इन तीन बिलों में एक बिल परिसीमन विधेयक-2026 है. इसके जरिए नया परिसीमन आयोग बनेगा, जो नई जनसंख्या के आधार पर सीटों की सीमाएं और बंटवारा तय करेगा. इसके बाद से हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ जाएगी. 

परिसीमन होता क्या है?

परिसीमन का मतलब है चुनाव लड़ने के क्षेत्रों की सीमाएं और संख्या तय करना या बदलना. यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव को ही परिसीमन कहते हैं.  सरकार इन सीमाओं में बदलाव करती रहती है, जो वहां की जनसंख्या और वहां के इलाके के जनसंख्या घनत्व के आधार पर तय की जाती है. ये नगर निगम के वार्ड से लेकर लोकसभा सीटों तक होता है. जैसे अगर आप लखनऊ में रहते हैं तो वहां की लोकसभा सीट की एक सीमा होगी, जिसमें रहने वाले लोग उस सीट के जनप्रतिनिधि को चुनेंगे. इस सीमा में बदलाव परिसीमन के जरिए होता है. जैसे आपने देखा होगा कि आपका इलाका कई सालों से वार्ड नंबर-10 में आता होगा और परिसीमन के बाद से वार्ड नंबर-12 में आने लगे. 

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इस बिल के आने से क्या होगा?

इस बिल के पास होने से  संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके. विधेयक के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 हो सकती है. इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें हो सकती हैं. यानी कुल 850 सीटें.

अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं. सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था. इस विधेयक से वह रोक हटेगी और एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा. नए विधेयक में प्रावधान है कि नवीनतम उपलब्ध जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा. आरक्षित सीटें अलग-अलग चुनावों में बदलती रहेंगी, ताकि सभी क्षेत्रों में महिलाओं को मौका मिल सके. 

परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन करना है. इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. साथ ही, संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके.

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इतना विरोध क्यों हैं?

दरअसल, 2001 और 2003 में संविधान में किए गए संशोधनों के बाद, सीटों का पुनर्निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर ही 2026 तक के लिए रोक दिया गया था. यानी, इस अवधि में जनसंख्या में बदलाव के बावजूद सीटों की संख्या नहीं बदली गई. लेकिन नए प्रस्तावित बिल में इस व्यवस्था को बदलने की बात कही गई है. 
 
इसमें अनुच्छेद 81 की धारा 3 में संशोधन करते हुए यह जोड़ा गया है कि “जनसंख्या” का मतलब वह होगा, जो संसद कानून बनाकर तय करेगी कि किस जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाए, बशर्ते वे आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों. सरकार इस रोक को हटाकर नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन का रास्ता खोलना चाहती है. अब विपक्ष का कहना है कि आखिर इसके लिए इतनी जल्दबाजी क्यों है?

आखिरी बार परिसीमन कब हुआ था?

बता दें कि पहले 489 सीटें थीं, इसके बाद 1963 में 522 (1961 की जनसंख्या के आधार पर)सीटें हुईं. फिर 1973 में 1971 के आधार पर 543 सीटे हुईं. वो आजतक वैसे ही है. इसके बाद 2001 तक सीटों के बंटवारे को फ्रीज कर दिया गया था और बाद में संशोधन के जरिए इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया था. साल 2002 में परिसीमन हुआ था, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बल्कि सीमा में बदलाव हुआ था.

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अब सरकार एक संशोधन लाकर 2026 से पहले परिसीमन करवाना चाहती है.  भारत में ऐसे परिसीमन आयोगों का गठन 4 बार किया गया है-1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम, 1952के अधीन, 1963 में परिसीमन आयोग अधिनियम, 1962 के अधीन, 1973 में परिसीमन अधिनियम, 1972और 2002 में परिसीमन अधिनियम, 2002के अधीन.

कैसे होगा परिसीमन?

इस बिल के जरिए एक परिसीमन आयोग बनाया जाएगा. इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश होंगे. आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे. परिसीमन आयोग अपने प्रस्तावों को सार्वजनिक करेगा और जनता से आपत्तियां व सुझाव भी लेगा. अंतिम फैसला गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होगा और इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. 

आपके राज्य में कितनी सीटें बढ़ जाएंगी?

अभी हर राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी, इसे लेकर फाइनल डेटा नहीं दिया जा सकता है. आज संसद में पेश हो रहे परिसीमन बिल के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी (815 राज्य + 35 केंद्र शासित प्रदेश), लेकिन राज्यवार सटीक संख्या बिल में तय नहीं है. यह 2026 जनगणना के बाद परिसीमन आयोग तय करेगा, लेकिन माना जा रहा है कि 50 फीसदी तक सीट बढ़ सकती हैं. 
 

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