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SIR का फॉर्म भरने में चकराया दिमाग? BLO ने 3 स्टेप में बताया सबसे आसान तरीका

दिल्ली में SIR फॉर्म को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इस बात का है कि आखिर कौन-सा कॉलम किसे भरना है. अगर आपका नाम पुरानी SIR में था तो नियम अलग हैं, अगर नहीं था तो तरीका बदल जाता है. ऊपर से दस्तावेज, रिश्तेदार की डिटेल और फॉर्म जमा करने को लेकर भी कई सवाल हैं. इन्हीं उलझनों को दूर करने के लिए आजतक.इन ने नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के एक BLO और निगम पार्षद से बात की. उन्होंने आसान भाषा में पूरा प्रोसेस समझाया.

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दिल्ली में 29 जुलाई तक SIR का Enumeration form भरकर वापस देना है. (फाइल फोटो- PTI)
दिल्ली में 29 जुलाई तक SIR का Enumeration form भरकर वापस देना है. (फाइल फोटो- PTI)

दिल्ली में गली-मोहल्ले से लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप तक इन दिनों एक ही सवाल वायरल है. 'भाई, SIR फॉर्म भर दिया?... नहीं? किसी से पता कर यार, कैसे भरना है?'

दरअसल, 30 जून से राजधानी में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दरवाजा खटखटा रहे हैं. हाथ में एक फॉर्म है. नाम है- स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) Enumeration Form. इसे 29 जुलाई तक भरकर वापस देना है.

अबतक कितने फॉर्म बंटे और कितने BLOs पर वापस आए उसका लेखा-जोखा

जैसे-जैसे आखिरी तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे दिल्ली के मतदाताओं की उलझन भी बढ़ रही है. कहीं लोग पूछ रहे हैं कि कौन-कौन से दस्तावेज लगेंगे, कहीं सवाल है कि फॉर्म भरेगा कौन और जमा कहां करना है.

ऐसे में हमने नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के निगम पार्षद (मौजपुर) अनिल गौड़ और घोंडा विधानसभा के एक BLO निजाम से बात की. दोनों से पूरा प्रोसेस समझा.

दोनों ने बताया कि फॉर्म भरने के बाद उसे वापस अपने BLO को ही जमा करना है. जिस BLO ने आपको फॉर्म दिया है, उसका मोबाइल नंबर फॉर्म के सबसे ऊपर लिखा होता है. एक और जरूरी बात. फिलहाल Enumeration Form के साथ कोई दस्तावेज नहीं देना है.

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अब अगर आपके मन में भी सवाल है कि SIR फॉर्म आखिर भरें कैसे, तो आगे का तरीका आसान भाषा में समझिए.

अनिल गौड़ ने बताया कि SIR का जो आपको फॉर्म मिला है, वो तीन हिस्सों में बंटा हुआ है.

सबसे पहले फॉर्म के तीसरे हिस्से को समझिए, क्योंकि ये हिस्सा हर मतदाता को भरना ही है. यह फॉर्म के सबसे नीचे दिया गया सेक्शन है और इसे छोड़ना नहीं है. यहां आपको अपनी जन्मतिथि (Date of Birth), आधार नंबर, मोबाइल नंबर जैसी बुनियादी जानकारी भरनी होगी.

इसके अलावा माता-पिता का नाम या, जहां लागू हो, पति/पत्नी का नाम भी दर्ज करना होगा. अगर उनके पास EPIC नंबर (मतदाता पहचान पत्र नंबर) है, तो उसे भी लिखना होगा. अगर EPIC नंबर नहीं है, तो वे कॉलम खाली छोड़ दीजिए.

SIR फॉर्म का ऊपरी हिस्सा

अब फॉर्म के ऊपर वाले हिस्से पर आते हैं. यहां दो कॉलम हैं. अनिल गौड़ ने बताया कि, फॉर्म में दिया गया पहला कॉलम (जिसपर लाल निशान लगा है) हर किसी को नहीं भरना है. यह सिर्फ उन लोगों के लिए है, जिनका नाम पिछली SIR में था.

जरूरी नहीं कि वह SIR दिल्ली की ही हो. अगर आप पहले किसी दूसरे राज्य में वोटर थे और वहां हुई पिछली SIR में आपका नाम था, तब भी यह कॉलम आपके लिए है.

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मसलन, दिल्ली में आखिरी SIR 2002 में हुई थी, जबकि उत्तर प्रदेश में 2003 में. अगर उस वक्त आपका नाम वोटर लिस्ट में था, तो इस कॉलम में उसी रिकॉर्ड के हिसाब से जानकारी भरनी होगी. तीसरे फेज का SIR जिन 19 राज्यों में चल रहा, उनकी आखिरी SIR की लिस्ट-

अब यहां सबसे जरूरी बात समझ लीजिए. इस कॉलम में वही डिटेल लिखनी है, जो पिछली SIR में दर्ज थी. अपनी तरफ से नाम, पता या दूसरी जानकारी अपडेट करने की कोशिश न करें. यहां तक कि अगर पुराने रिकॉर्ड में स्पेलिंग या टाइपिंग की छोटी-सी गलती भी है, तो फिलहाल उसे वैसा ही रहने दें और वही लिखें. इस फॉर्म में उसे ठीक करने की कोशिश न करें.

बात करते हैं तीसरे कॉलम की. (जहां लाल निशान लगा है) यहां उस रिश्तेदार (माता, पिता, दादा या दादी) की डिटेल आएगी, जिसका नाम पिछली बार की SIR में था.

चारों का नाम है तो किसी एक की डिटेल भर दीजिए. लेकिन अगर इन चारों में से किसी का भी नाम नहीं है तो खाली छोड़ दीजिए. मतलब इन चारों के अलावा किसी और की जानकारी इसमें नहीं भरनी है, भले उस रिश्तेदार का नाम SIR की पुरानी लिस्ट में हो.

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अब सबसे जरूरी बात. फॉर्म का नीचे वाला यानी तीसरा हिस्सा तो सबको भरना ये समझ आ गया. लेकिन ऊपर के दोनों हिस्सों में से कौन सा हिस्सा किसे भरना है?

इस कंफ्यूजन को BLO निजाम ने तीन उदाहरणों से साफ किया- 

पहला केस: Self Mapping (अगर आपका नाम पहले हुई किसी SIR में था)
इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं.
1: मान लीजिए पंकज पहले से दिल्ली में रह रहा है. उसका नाम 2002 की SIR में भी था. ऐसे में पंकज को फॉर्म का पहला कॉलम भरना होगा. वह 2002 की SIR में दर्ज अपनी डिटेल के हिसाब से जानकारी लिखेगा.
2: अब राहुल का मामला समझिए. राहुल पहले दिल्ली में नहीं, बल्कि किसी दूसरे राज्य में रहता था. वहां हुई आखिरी SIR में उसका नाम दर्ज था. बाद में वह दिल्ली आ गया. ऐसे में राहुल भी पहला कॉलम भरेगा, लेकिन दिल्ली की नहीं, जिस राज्य की SIR में उसका नाम था, उसी रिकॉर्ड के हिसाब से जानकारी देगा.

मतलब, अगर आपका नाम देश के किसी भी राज्य की पिछली SIR में था, तो फॉर्म का पहला कॉलम भरना है. और उसमें वही डिटेल लिखनी है, जो उस SIR के रिकॉर्ड में दर्ज थी.

दूसरा केस: Progeny (आपका नाम किसी पुरानी SIR में नहीं था, लेकिन रिश्तेदार का है)

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अब दूसरा मामला समझिए. मान लीजिए आज आपका नाम वोटर लिस्ट में है, लेकिन देश के किसी भी राज्य की पिछली SIR (दिल्ली समेत) में आपका नाम कभी दर्ज नहीं था. ऐसे में आपको Progeny वाला विकल्प चुनना होगा.

इसमें आपको अपने परिवार के उस सदस्य की डिटेल देनी है, जिसका नाम पिछली SIR में था. यह सदस्य माता, पिता, दादा या दादी हो सकते हैं. यानी जिस रिश्तेदार का रिकॉर्ड पुरानी SIR में मौजूद है, उसी के आधार पर यह हिस्सा भरा जाएगा.

एक बात का खास ध्यान रखें. Progeny में पति या पत्नी की डिटेल नहीं दे सकते. यहां सिर्फ माता-पिता या दादा-दादी जैसे पूर्वजों की जानकारी ही मान्य है, बशर्ते उनका नाम पिछली SIR में दर्ज हो.

तीसरा केस: न आपका नाम, न परिवार में किसी का रिकॉर्ड

अब तीसरा और आखिरी मामला समझिए. मान लीजिए न आपका नाम किसी पुरानी SIR में था, न आपके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का. यानी दिल्ली की 2002 वाली SIR हो या किसी दूसरे राज्य की आखिरी SIR, कहीं भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता.

ऐसी स्थिति में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आपको फॉर्म का सिर्फ नीचे वाला हिस्सा भरना है. ऊपर दिए गए Self Mapping और Progeny वाले दोनों कॉलम खाली छोड़ दें.

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यानी अगर पुरानी SIR में आपका भी रिकॉर्ड नहीं है और परिवार में किसी का भी नहीं, तो सीधे फॉर्म के नीचे वाले हिस्से पर जाएं और वहीं मांगी गई जानकारी भरें.

फॉर्म भरने के बाद क्या होगा?

इसकी जानकारी आपको मिले SIR फॉर्म या Enumeration Form पर ही दी गई है. फॉर्म सही रहा, आपकी दी जानकारी से चुनाव आयोग संतुष्ट रहा तो ठीक. वरना दिल्ली के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) आपको नोटिस भेजेंगे. इसमें आपसे सहायक दस्तावेज के रूप में कुछ डॉक्यूमेंट्स मांगे जा सकते हैं. जिनका मकसद आपकी भारतीय नागरिकता साबित करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि आप कब से भारत में रह रहे हैं और आपकी पहचान/रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में मौजूद है.

फिर 5.08.2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आएगी. अगर आपका नाम इसमें शामिल नहीं है तो आपत्ति जताकर ceo delhi (मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दिल्ली) से संपर्क कर सकेंगे. फिर फाइनल वोटर लिस्ट (7.10.2026) को पब्लिश होगी.

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