सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अमेरिका में एयर कंडीशनर (AC) बदलवाने का खर्च बताकर हैरान नजर आया. उसके मुताबिक, वहां नया AC लगवाने में करीब 2,000 से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक का खर्च आता है. अगर इसे भारतीय रुपये में बदलें, तो यह रुपये लगभग 1.7 लाख से 4.3 लाख रुपये (डॉलर की कीमत के अनुसार) बैठती है. इसमें नया AC, इंस्टॉलेशन, लेबर और दूसरी सर्विस फीस शामिल हो सकती है. इतनी बड़ी रकम सुनकर भारत के लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर हमारे यहां AC बदलवाने या नया AC लगवाने में कितना खर्च आता है? आइए जानते हैं.
भारत में नया AC खरीदने और लगवाने का खर्च
भारत में 1.5 टन का एक अच्छा स्प्लिट AC आमतौर पर 30,000 से 55,000 रुपये के बीच मिल जाता है. वहीं, प्रीमियम या इनवर्टर मॉडल की कीमत 60,000 से 80,000 रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है. अगर इंस्टॉलेशन की बात करें, तो अधिकांश कंपनियां 1,500 से 3,000 रुपये के बीच इंस्टॉलेशन चार्ज लेती हैं. अगर अतिरिक्त कॉपर पाइप, ड्रेनेज पाइप, स्टैंड या वायरिंग की जरूरत पड़ती है, तो कुल खर्च 3,000 से 10,000 रुपये तक बढ़ सकता है. यानी भारत में नया AC खरीदकर पूरी तरह इंस्टॉल करवाने का कुल खर्च आमतौर पर 35,000 से 70,000 रुपये के बीच रहता है. महंगे मॉडल लेने पर यह 80,000 रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है.
तो चलिए जानते हैं अमेरिका में AC लगवाने का खर्च
1. Central AC Unit (सेंट्रल एसी सिस्टम)
अमेरिका में ज्यादातर घरों में सेंट्रल AC लगा होता है, जो पूरे घर को एक साथ ठंडा करता है. अगर पुराने सिस्टम को बदलना हो, तो आमतौर पर 3,800 से 7,500 डॉलर (करीब 3.2 लाख से 6.4 लाख रुपये) तक खर्च आता है. अगर हाई-एफिशिएंसी मॉडल लगवाना हो या नए घर में पूरा सिस्टम और नई डक्टिंग (हवा पहुंचाने वाली पाइप लाइन) लगानी पड़े, तो कुल खर्च 12,000 डॉलर (करीब 10 लाख रुपये) या उससे भी ज्यादा हो सकता है.
2. Ductless Mini-Split AC (डक्टलेस मिनी-स्प्लिट)
जिन घरों में डक्टिंग नहीं होती, वहां डक्टलेस मिनी-स्प्लिट AC लगाया जाता है. इसमें हर कमरे के लिए अलग इंडोर यूनिट लगती है. इसकी कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि कितने कमरों में यूनिट लगानी है. आमतौर पर इसका खर्च 1,500 से 8,000 डॉलर (करीब 1.3 लाख से 6.8 लाख रुपये) के बीच होता है.
3. Window या Portable AC
अगर सिर्फ एक कमरे को ठंडा करना हो, तो लोग विंडो AC या पोर्टेबल AC खरीदते हैं. यह सबसे सस्ता विकल्प माना जाता है. यूनिट और बेसिक इंस्टॉलेशन मिलाकर आमतौर पर 200 से 1,700 डॉलर (करीब 17 हजार से 1.45 लाख रुपये) तक खर्च आता है. अगर इंस्टॉलेशन आसान हो, तो स्थानीय टेक्निशियन कम लागत में इसे लगा देता है.
कंपनी से सर्विस करवाना या बाहर के टेक्नीशियन को बुलाना?
भारत में लोगों के पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं. पहला ऑप्शन है कि वे AC बनाने वाली कंपनी के ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से इंजीनियर बुलाएं. कंपनी के टेक्नीशियन ओरिजिनल पार्ट्स का इस्तेमाल करते हैं और उनके काम पर वारंटी भी मिलती है. हालांकि, उनकी फीस आमतौर पर थोड़ी ज्यादा होती है.
दूसरा ऑप्शन है कि लोग अपने इलाके के किसी स्थानीय AC मैकेनिक या निजी सर्विस प्रोवाइडर को बुला लेते हैं. ऐसे टेक्नीशियन अक्सर कंपनी की तुलना में कम पैसे लेते हैं अगर काम छोटा हो, जैसे गैस भरना, सफाई करना या छोटी-मोटी मरम्मत, तो कई लोग इसी विकल्प को चुनते हैं. हालांकि, यहां काम की गुणवत्ता पूरी तरह उस मैकेनिक के अनुभव पर निर्भर करती है.
मरम्मत का खर्च कितना आता है?
अगर AC पूरी तरह खराब नहीं हुआ है, तो नया खरीदने की बजाय उसकी मरम्मत कराना काफी सस्ता पड़ता है.
सामान्य सर्विस: 500 से 1,500 रुपये
डीप क्लीनिंग: 700 से 2,000 रुपये
गैस रिफिल: 2,000 से 4,000 रुपये
कैपेसिटर बदलना: 500 से 1,500 रुपये
फैन मोटर या PCB जैसी बड़ी मरम्मत: 3,000 से 10,000 रुपये या उससे अधिक
यही वजह है कि भारत में ज्यादातर लोग पहले AC रिपेयर कराने की कोशिश करते हैं. केवल तब नया AC खरीदते हैं, जब पुराना AC ठीक कराना बहुत महंगा पड़ने लगे या काफी पुराना हो जाए.
अमेरिका और भारत में इतना अंतर क्यों है?
अमेरिका में लेबर कॉस्ट यानी काम करने वाले टेक्नीशियन की फीस भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है. वहां कर्मचारियों की सैलरी, टैक्स, बीमा और अन्य खर्च भी अधिक होते हैं. इसलिए किसी भी घरेलू उपकरण की रिपेयर या रिप्लेसमेंट का बिल काफी बड़ा बन जाता है. वहीं, भारत में लेबर चार्ज कम हैं. साथ ही स्थानीय टेक्नीशियन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे लोगों के पास सस्ते विकल्प भी मौजूद रहते हैं. यही कारण है कि भारत में AC बदलवाने या ठीक करवाने का खर्च अमेरिका की तुलना में काफी कम पड़ता है.
किस विकल्प को चुनना चाहिए?
अगर आपका AC वारंटी में है या किसी महंगे पार्ट की मरम्मत करनी है, तो कंपनी के सर्विस सेंटर से काम करवाना बेहतर माना जाता है. वहीं, अगर केवल सामान्य सर्विस, सफाई या छोटी-मोटी मरम्मत की जरूरत है, तो भरोसेमंद स्थानीय टेक्नीशियन भी अच्छा और किफायती विकल्प हो सकता है. कुल मिलाकर, जहां अमेरिका में नया AC बदलवाने पर 2 से 5 हजार डॉलर यानी लगभग 1.7 लाख से 4.3 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, वहीं भारत में अधिकांश लोग 35,000 से 70,000 रुपये के बीच नया AC खरीदकर इंस्टॉल करवा लेते हैं. यही वजह है कि अमेरिका की तुलना में भारत में AC बदलवाना और उसकी सर्विस करवाना काफी सस्ता माना जाता है.