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ना टाइल, ना मार्बल... ट्रेंड में ये वाली फ्लोरिंग, सस्ती और डिजाइनदार भी!

अब टाइल और मार्बल के दिन लद गए हैं. इन दिनों मॉर्डन घरों में 3डी पेंटिंग की तरह फ्लोरिंग होने लगी है. इसमें अलग- अलग डिजाइन, पैटर्न और सिनरी जैसे फ्लोर बनाए जाते हैं. यह टिकाऊ और देखने में लाजवाब होते हैं. चलिए जानते हैं आखिर इस फ्लोरिंग को कहा क्या जाता है और इसमें कितना खर्च आता है.

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अब जमाना इस लाजवाब एपॉक्सी फ्लोरिंग का है (Photo - AI Generated)
अब जमाना इस लाजवाब एपॉक्सी फ्लोरिंग का है (Photo - AI Generated)

इन दिनों लोग घर बनाने से पहले लोग काफी तैयारी और तरह- तरह के एक्सटीरियर और इंटीरियर डिजाइन और डेकोरेशन का रिव्यू देखते हैं. तब जाकर अपने सपनों का आशियाना बनाने के लिए इनमें से बेहतर और बजट फ्रेंडली मॉडल चुनते हैं. आजकल घर को नया लुक देने के लिए लोग घर में एक अलग तरह की फ्लोरिंग करवा रहे हैं, जो ट्रेडिशनल मार्बल और टाइल्स फ्लोर से कहीं ज्यादा सुंदर, डिजाइनदार और बेहतर दिखता है. 

इन दिनों घरों और ऑफिस में ऐसे फ्लोर देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें देख आप धोखा खा जाएंगे कि फ्लोर कांच बनी है और उसके अंदर कुछ और भी है. आजकल के कुछ मॉर्डन घरों के अंदर घुसते ही लगेगा, नीचे  फ्लोर पर सामने कोई नदी बह रही है, यहा फिर कांच के फ्लोर के नीचे जंगल है. दरअसल, ऐसा कुछ नहीं होता यह फ्लोर की 3डी डिजाइन है, जो 3 डायमेंशनल इल्यूशन और भ्रम जैसा इफेक्ट पैदा करती है.

 इस फ्लोरिंग को 3डी एपॉक्सी फ्लोरिंग कहते हैं. यह देखने में जितनी खूबसूरत लगती है. उसे देखकर ऐसा लगता है कि इसे बनवाने में काफी खर्च आता होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. 350 से 700 रुपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से एपॉक्सी फ्लोर बनकर तैयार हो जाता है. 

एपॉक्सी फ्लोर सीमलेस, ग्लोसी, शाइनिंग फील देता है. इसमें कई सारे डिजाइन होते हैं और अलग- अलग लुक देने पर लागत भी कम या ज्यादा होती है. चलिए अब जानते हैं कि एपॉक्सी फ्लोरिंग कैसे कराया जाए और इसमें होता क्या है. 

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सबसे पहले फ्लोर को साफ कर सूखा लिया जाता है. इसमें कोई नमी या सीलन नहीं होनी चाहिए. इसके बाद प्राइमर का एक कोट लगाकर 24 घंटे तक सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है.इसके बाद 2 से 3 एमएम का एक कोट होता है वो लगानी होती है, ताकि सतह एकदम एक समान एक लेवल में हो जाए. 

कैसे होती है एपॉक्सी फ्लोरिंग
इसके बाद फर्श पर कोई भी डिजाइन, या विनाइल ग्राफिटी शीट जैसे, जंगल, पहाड़, वादियां, झरने या और भी अलग- अलग तरह के डिजाइन या सीनरी या फिर मेटालिक पैटर्न वाले डिजाइन लगा दिए जाते हैं. इसके बाद एपॉक्सी रेजिन या राल की लेयर चढ़ाई जाती है. इस एपॉक्सी रेजिन डालकर जमा दिया जाता है. यह राल ट्रांसपैरेंट होता है. जब इसे प्लेन कर दिया जाता है तो नीचे डाला गया विनाइल डिजाइन एपॉक्सी लेयर के अंदर से ऐसे 3डी इफेक्ट के साथ खिलकर सामने आता है, जैसे पूरे फ्लोर के नीचे कोई अलग ही दुनिया हो. 

यह टॉप लेयर ट्रांसपैरेंट भी होता है और अलग- अलग कलर और डिजाइन पैटर्न वाला भी होता है. आप अपने फ्लोर को कैसा लुक देना चाहते हैं, उस हिसाब से ही टॉप कोट यूज किया जाता है. एपॉक्सी फ्लोरिंग की खासियत यह है कि इसमें कहीं से कोई जॉइंट या क्रैक नहीं होता. यह काफी स्मूद होता है. इसकी सरफेस चमकदार, मजबूत, वाटरफ्रूफ होती है. इसकी साफ-सफाई भी काफी आसान होती है. यह जल्दी गंदा नहीं होता और अगर गंदा हो भी जाए, तो इसे साफ करना काफी आसान है.  इसे सिर्फ गिले कपड़े से पोछ देने पर यह चमक उठता है. 

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यह बाथरूम, लिविंग रूम और हॉल, किचन हर जगह के लिए आदर्श और टिकाऊ फिनिश प्रदान करता है.इस फ्लोर पर पानी गिरने पर स्लिप होने के चांस भी टाइल या मार्बल की तुलना में कम होती है. एक अनुमान के मुताबकि, 10 बाय 10 के कमरे में एपॉक्सी फ्लोरिंग कराने में 22 से 25 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है. यह टाइल फ्लोरिंग से थोड़ी महंगी है, लेकिन स्टाइलिश लुक और फिनिशिंग को देखा जाए तो उस हिसाब से यह बहुत ज्यादा महंगी नहीं लगती.

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