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अमृतसर के स्वर्ण मंदिर जैसा है ये धार्मिक स्थल... सोने की परत के साथ जड़े हैं हीरे-मोती!

Photo: https://vellore.nic.in/
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क्या आपने कभी ऐसा मंदिर देखा है, जहां सूरज की पहली किरण पड़ते ही पूरा परिसर सोने की तरह नहीं, बल्कि सचमुच सोने से चमक उठता हो? जहां दीवारें, गुंबद, खंभे और बारीक नक्काशी तक पर असली सोना चढ़ा हो. अगर नहीं, तो तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी गोल्डन टेंपल (श्रीपुरम गोल्डन टेंपल) आपको हैरान कर देगा. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, कला और भव्यता का ऐसा संगम है जिसे देखने के लिए हर साल भारत ही नहीं, विदेशों से भी लाखों लोग आते हैं. करीब 1,500 किलो शुद्ध सोने से बने इस मंदिर को दुनिया के सबसे शानदार स्वर्ण मंदिरों में गिना जाता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतना सोना आया कहां से? इसे किसने बनवाया? इसकी कीमत कितनी होगी? और करोड़ों-अरबों रुपये के इस मंदिर की सुरक्षा आखिर कैसे होती है? आइए जानते हैं इस अद्भुत मंदिर की पूरी कहानी.
 

Photo: vellore.nic.in
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शांत पहाड़ियों के बीच बसा है सोने का संसार
तमिलनाडु के वेल्लोर शहर से कुछ दूरी पर स्थित श्रीपुरम गोल्डन टेंपल चारों तरफ हरियाली और शांत वातावरण से घिरा हुआ है. जैसे ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं, उन्हें सबसे पहले एक लंबा स्टार के आकार का पैदल मार्ग दिखाई देता है. यह रास्ता करीब डेढ़ से दो किलोमीटर लंबा है. श्रद्धालु इसी मार्ग से धीरे-धीरे चलते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं. रास्ते में आध्यात्मिक संदेश, पेड़-पौधे और शांत वातावरण लोगों को भीतर से सुकून का एहसास कराते हैं. मंदिर तक पहुंचते-पहुंचते ऐसा लगता है कि व्यक्ति केवल यात्रा नहीं कर रहा, बल्कि अपने मन को भी शांत कर रहा है.
 

Photo: vellore.nic.in
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आखिर किसने बनवाया यह मंदिर?
श्रीपुरम गोल्डन टेंपल का निर्माण श्री नारायणी पीठम संस्था ने कराया. इस संस्था की स्थापना आध्यात्मिक गुरु श्री शक्ति अम्मा ने की थी, जिन्हें उनके अनुयायी दिव्य संत मानते हैं. मंदिर का निर्माण वर्ष 2001 के आसपास शुरू हुआ और करीब सात साल की मेहनत के बाद 2007 में यह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया. हजारों कारीगरों, इंजीनियरों और कलाकारों ने दिन-रात मेहनत करके इस अद्भुत मंदिर को तैयार किया.

आखिर कहां से आया 1,500 किलो सोना?
यही वह सवाल है जो लगभग हर व्यक्ति के मन में आता है. मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया गया सोना देश-विदेश के श्रद्धालुओं और दानदाताओं के सहयोग से जुटाया गया. मंदिर के लिए विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाला शुद्ध सोना खरीदा गया. इस सोने को साधारण तरीके से नहीं लगाया गया. पहले तांबे की प्लेटें तैयार की गईं, फिर उन पर हाथ से बारीक डिजाइन बनाई गईय इसके बाद उन प्लेटों पर सोने की परत चढ़ाकर मंदिर की दीवारों, खंभों, छतों और गुंबदों पर लगाया गया. यही वजह है कि मंदिर का हर हिस्सा अलग-अलग कोण से अलग चमक बिखेरता दिखाई देता है.

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कितना महंगा है यह मंदिर?
जब मंदिर बना था, तब ही इसमें लगे सोने की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये आंकी गई थी. लेकिन आज सोने की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है. अगर सिर्फ 1,500 किलो सोने की मौजूदा बाजार कीमत का अनुमान लगाया जाए, तो इसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. इसमें निर्माण लागत, नक्काशी, वास्तुकला और अन्य खर्च जोड़ दिए जाएं तो मंदिर का वास्तविक मूल्य इससे भी कहीं अधिक माना जाता है. दिन में सूरज की रोशनी पड़ने पर मंदिर सोने जैसी तेज चमक बिखेरता है, जबकि रात में विशेष लाइटिंग इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. रात के समय जब रोशनी सोने की परतों पर पड़ती है, तो पूरा मंदिर मानो किसी स्वर्ण महल की तरह दिखाई देता है. यही कारण है कि यहां आने वाले लोग तस्वीरें और वीडियो बनाने से खुद को रोक नहीं पाते.

इतना कीमती मंदिर हो तो सुरक्षा भी बेहद खास होना स्वाभाविक है. मंदिर परिसर में एडवांस सीसीटीवी कैमरों का बड़ा नेटवर्क लगाया गया है. हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाती है. सुरक्षा कर्मी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं. मंदिर परिसर में प्रवेश के दौरान जांच की जाती है. कई जगहों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था लगातार निगरानी में रहती है. सबसे खास बात यह है कि यहां सुरक्षा केवल तकनीक के भरोसे नहीं है, बल्कि पूरे परिसर का संचालन बेहद व्यवस्थित तरीके से किया जाता है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी भी न हो.

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मंदिर की वास्तुकला क्यों है खास?
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ सोना नहीं, बल्कि इसकी बारीक कारीगरी भी है. मंदिर के खंभों, छतों और दीवारों पर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है. पारंपरिक दक्षिण भारतीय मंदिर शैली और आधुनिक निर्माण तकनीक का अनोखा मेल यहां देखने को मिलता है. मंदिर के केंद्र में स्थापित माता लक्ष्मी नारायणी की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. भक्त यहां धन, समृद्धि और सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं.

स्टार शेप वाला रास्ता क्यों बनाया गया?
मंदिर तक जाने वाला रास्ता सामान्य सीधी लाइन में नहीं बनाया गया. इसे सितारे के आकार में डिजाइन किया गया है. माना जाता है कि यह मार्ग व्यक्ति को धीरे-धीरे आध्यात्मिक वातावरण में ले जाता है. रास्ते में लिखे प्रेरणादायक संदेश लोगों को जीवन के अच्छे विचारों की याद दिलाते हैं. यानी यहां पहुंचने का अनुभव केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी यात्रा एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है.
 

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सिर्फ मंदिर ही नहीं, समाज सेवा का भी केंद्र
श्री नारायणी पीठम केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है. संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबों की मदद, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से जुड़े कई काम भी करती है. इसी वजह से यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा का भी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. कुछ लोग भगवान के दर्शन के लिए आते हैं, कुछ इसकी अद्भुत वास्तुकला देखने, तो कुछ केवल यह जानने कि आखिर सोने से बना इतना विशाल मंदिर दिखता कैसा है. कई विदेशी पर्यटक भी इसे भारत की सबसे अनोखी धार्मिक और वास्तुशिल्पीय धरोहरों में गिनते हैं.

क्या यह दुनिया का सबसे बड़ा गोल्डन टेंपल है?
दुनिया में कई जगहों पर सोने से सजे धार्मिक स्थल हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में सोने का इस्तेमाल, इतनी विस्तृत नक्काशी और पूरे मंदिर परिसर की स्वर्ण सजावट श्रीपुरम गोल्डन टेंपल को सबसे अलग पहचान देती है. यही कारण है कि यह मंदिर आज भारत के सबसे चर्चित धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है.
 

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आखिर क्यों खास है श्रीपुरम गोल्डन टेंपल?
क्योंकि यहां सिर्फ सोने की चमक नहीं, बल्कि आस्था, कला, इंजीनियरिंग और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है. जब सूरज की रोशनी इस मंदिर पर पड़ती है, तो ऐसा लगता है जैसे पूरा मंदिर सोने की नदी में नहा गया हो और शायद यही वजह है कि यहां आने वाला लगभग हर व्यक्ति लौटते समय एक ही बात कहता है- तस्वीरों में जो देखा था, असलियत उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है.
 

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