उत्तराखंड के मदरसों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो लगाने को लेकर एक बार फिर से उत्तराखंड की राजनीति में हलचल शुरू हो चुकी है. इस बार कोई और नहीं बल्कि खुद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुलकर अपना विरोध जताया है.
उनका कहना है कि, मुस्लिम समुदाय में किसी भी जीवित व्यक्ति की फोटो लगाना वर्जित माना जाता है. इसलिए भारत सरकार को इस फैसले से बचने की जरूरत है. आखिर आप किसी को कैसे बाध्य कर सकते हैं, उन बातों के लिए जो उनका धर्म विशेष इजाजत नहीं देता है.
ने आजतक से कहा, मदरसों में इस्लाम से सम्बंधित तालीम दी जाती है. हमारा बोझ कम हो सके इसीलिए उनको सरकारी मदद दी जाती है. भारत सरकार आर्थिक मदद के बहाने प्रधानमंत्री की तस्वीर को मदरसों पर थोप रही है. ये गलत है. अगर आपको मदद नहीं देना है तो सीधे तौर पर मना कर दीजिए.
आखिर प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है. इसपर विचार करने की जरूरत है. हरीश रावत ने व्यंग करते हुए कहा, मैं खुद ही अपने मुसलमान भाइयों से कह देता हूं कि अपने घरों में भी प्रधानमंत्री का फोटो लगवा लो, लेकिन बीजेपी वाले मोदी जी का फोटो बांटना तो शुरू करें. ये सोचने की जरूरत है कि पूरी दुनिया में संदेश क्या जाएगा. पूरी दुनिया के लोग क्या सोचेंगे.
गौरतलब है कि आजतक से बातचीत करते हुए उत्तराखंड बोर्ड के डिप्टी रजिस्टार ने कहा था कि सरकार का आदेश ही हमारे लिए फतवा है. इसके अलावा हम किसी दूसरे फतवे को नहीं मानते, न ही किसी विरोध को.