स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची शनिवार को ओमान पहुंचे, जहां इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों के सुरक्षित आवागमन को लेकर बातचीत की तैयारियां की जा रही हैं. अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह भरोसा दे कि होर्मुज में सभी जहाजों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है, हालांकि इस सप्ताह दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है. हालांकि पिछले दो दिनों में किसी नए हमले की खबर नहीं आई है. एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि ईरान, अमेरिका, कतर और पाकिस्तान के बीच एक बातचीत की रूपरेखा पर सहमति बनी है और मध्यस्थ इसे आयोजित कराने की कोशिश कर रहे हैं. ओमान इस पूरे प्रयास में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर संभावित वार्ता में अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. हालांकि ईरान की समाचार एजेंसी 'फार्स' ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि जब तक अमेरिका अपने मौजूदा रुख में बदलाव नहीं करता, तब तक कोई औपचारिक वार्ता नहीं होगी. इस सप्ताह कतर और सऊदी अरब के तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया.
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ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'समझौते का पालन दोनों पक्षों को समान रूप से करना होगा.' हालांकि ईरान ने जहाजों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन कई जानकारों का मानना है कि तेहरान इस तरह के घटनाक्रम का इस्तेमाल वार्ता में दबाव बनाने के लिए करता है. अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि ईरान ने उन्हें बताया है कि हाल के समुद्री हमले उसकी व्यवस्था के भटके हुए तत्वों की कार्रवाई हो सकते हैं. इसे तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
इस बीच, होर्मुज में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है. कच्चे तेल की कीमतों में पिछले आठ सप्ताह की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह अमेरिकी उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. अमेरिका ने ईरान से यह भी मांग की है कि वह सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि होर्मुज में जहाजों पर हमले बंद किए जाएंगे, सभी समुद्री मार्ग खुले रहेंगे और किसी भी जहाज से गुजरने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होती थी.