चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले केदारनाथ-बद्रीनाथ और गंगोत्री मंदिर समिति के बीच गैर-हिंदुओं के प्रवेश नियमों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. इसके बाद एक नई बहस छिड़ गई है. बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति ने गैर-हिंदुओं के लिए एफिडेविट की मांग की है जबकि गंगोत्री समिति ने इसे व्यक्तिगत राय बताया है और बिना एफिडेविट प्रवेश की बात कही है
दरअसल, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा था कि मंदिर में आने वाले गैर हिंदुओं को प्रवेश के लिए समिति के अधीन एक एफिडेविट देना होगा, जिसमें उन्हें सनातन धर्म में अपनी आस्था जतानी होगी. इसके उलट अब गंगोत्री मंदिर समिति ने हेमंत के बयान से दूरी बना ली है. समिति ने इस प्रस्ताव को व्यक्तिगत राय बताया है. समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि गंगोत्री धाम में प्रवेश के लिए किसी एफिडेविट या हलफनामे की जरूरत नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि यदि कोई गैर-हिंदू पंचगव्य का सेवन करता है तो उसे शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, शुद्ध माना जाएगा और वह मंदिर में दर्शन कर सकता है.
सेमवाल ने ये भी कहा कि जैन, सिख और बौद्ध धर्म को सनातन परंपरा का हिस्सा मानते हुए उन्हें अलग श्रेणी में नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, गौमांस खाने वालों के प्रवेश का विरोध किया जाएगा.
इसके अलावा गंगोत्री मंदिर समिति ने इस मुद्दे पर एक विशेष समिति के गठन की भी बात कही है जो ये सुनिश्चित करेगी कि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता (संविधान के अनुच्छेद 25 और 26) का उल्लंघन न हो. साथ ही परंपराओं का पालन भी बना रहे.
वहीं, चारधाम यात्रा 2026 के शुरू होने से पहले ही इसके संचालन के लिए इन विरोधाभासी बयानों का समाधान निकालना प्रशासन और मंदिर समितियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चार धाम यात्रा से पहले केदारनाथ-बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम से गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर अलग-अलग बयान सामने आने से नई बहस छिड़ गई है.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और गंगोत्री मंदिर समिति के बीच अलग-अलग रुख अपनाए जाने से धार्मिक परंपराओं, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर नई चर्चा शुरू हो गई है.