नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा पर योगी सरकार सख्त हो गई है. मेरठ में पिछले शुक्रवार को नमाज के बाद हुए बवाल के बाद पुलिस ने 106 उपद्रवियों की तस्वीर जारी की है. ये वहीं उपद्रवी हैं, जिन्होंने मेरठ के थाना कोतवाली, लिसाड़ी गेट ब्रह्मपुरी और नौचंदी क्षेत्र में जमकर हंगामा बरपाया था. इस दौरान पुलिस पर पथराव के साथ-साथ फायरिंग और आगजनी की गई थी. दूसरी इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का एक समूह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) पहुंच गया है. वकीलों ने योगी सरकार के खिलाफ शिकायत की है.
मेरठ में 106 उपद्रवियों की तस्वीर जारी होने के बाद उनकी धरपकड़ शुरू कर दी गई है. का कहना है कि शहर में जगह-जगह इन लोगों के फोटो चस्पा किए गए हैं. पुलिस ने यह भी कहा है कि जो भी इन उपद्रवियों की सूचना देगा उसका नाम-पता गुप्त रखा जाएगा और उचित इनाम दिया जाएगा.
मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि 106 लोगों का पोस्टर जारी किया गया है. इसमें अब तक 11 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 35 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. इस मामले में कुल 141 लोगों को किया गया है और पहचान होने के बाद इन मुकदमों में उन लोगों के नाम भी बढ़ा दिए जाएंगे.
पुलिस ने कहा, सोमवार शाम तक 100 उपद्रवियों का एक पोस्टर और जारी किया जाएगा जिनकी शिनाख्त के लिए प्रयास तेज किए गए हैं. जो भी सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है, उसे इन लोगों की संपत्ति से भरपाई किया जाएगा.
NHRC से वकीलों की शिकायत
दूसरी ओर वकीलों ने (एनएचआरसी) को दी गई अपनी शिकायत में लिखा है कि नागरिकता कानून बनने के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं. यूपी में लोगों के अधिकारों का हनन करते हुए समग्र प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी गई. इतना ही नहीं नेटवर्क को पूरी तरह शटडाउन कर दिया गया और पूरे प्रदेश में एसएमएस सेवा पर रोक लगा दी गई. शिकायत में कहा गया है कि पुलिस की कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई है जिनमें ज्यादातर युवा हैं. ये मौतें गोली लगने से हुई हैं. आयोग से वकीलों ने यूपी में हुए मानवाधिकार हनन पर गौर करने का आग्रह किया है.