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सावन में नहीं कर सकेंगे गर्भगृह में प्रवेश, बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन पर भी रोक

कोरोना महामारी के बीच तीसरी लहर की संभावना और सावन पर बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में उमड़ने वाली भक्तों की तादाद को देखते हुए इस बार भी पिछली बार सावन माह की ही तरह वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ के दरबार में दर्शन पूजन को लेकर काफी पाबंदियां रहेगी.

काशी विश्वनाथ मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भक्त न तो काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे
  • सिर्फ झांकी दर्शन ही श्रद्धालुओं को मिल सकेगा

सावन माह में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के यह खबर थोड़ी निराश करने वाली है, क्योंकि इस बार भी भक्त न तो काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर सकेंगे और न ही बाबा का स्पर्श दर्शन ही कर सकेंगे. सिर्फ झांकी दर्शन ही श्रद्धालुओं को मिल सकेगा और तो और जलाभिषेक भी गर्भगृह के बाहर लगे अरघे से ही सकेंगे. 
 
कोरोना महामारी के बीच तीसरी लहर की संभावना और सावन पर बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में उमड़ने वाली भक्तों की तादाद को देखते हुए इस बार भी पिछली बार सावन माह की ही तरह वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ के दरबार में दर्शन पूजन को लेकर काफी पाबंदियां रहेगी.

इस बारे में और जानकारी देते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनिल वर्मा ने बताया कि सावन के सोमवार के दिन काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को वर्जित किया गया है. ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में असुविधा न होने पाए. पूरे सावन में ही गर्भगृह में प्रवेश पर रोक रहेगी. हालांकि आगे भीड़ को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा. जहां तक जलाभिषेक का सवाल है तो पिछले साल की ही तरह गर्भगृह के बाहर लगे अरघे में से श्रद्धालु गंगाजल डालकर बाबा का जलाभिषेक कर सकेंगे. 

वीआईपी दर्शन के लिए पिछली बार सावन में अलग से समय दिया गया था, लेकिन शिवरात्रि के पर्व पर वीआईपी के लिए अलग से एक रास्ता ही बना लिया गया था. यही व्यवस्था इस बार भी रहेगी. इसके अलावा उन्होंने बताया कि विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए एबीसीडी नाम से चार गेट बनाए गए हैं. गंगा की तरफ से आने वाले ए गेट से प्रवेश करेंगे और मंदिर के पूर्वी द्वार से दर्शन करते हुए निकलेंगे. छत्ता द्वार से प्रवेश करने वाला बी गेट कहलाएगा. जहां से प्रवेश किए हुए श्रद्धालु उत्तरी गेट से निकलेंगे. ढुंढिराज गेट से प्रवेश वाला रास्ता डी और सरस्वती फाटक से प्रवेश करने वाले श्रद्धालु वह सी कहलाएगा. 

सावन को देखते हुए विशेष तैयारी

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनिल वर्मा ने आगे बताया कि सावन को देखते हुए विशेष तैयारी की गई है. चूंकि कॉरिडोर के काम के चलते परिसर का आकार बढ़ा है. इसलिए श्रद्धालुओं को और सुविधाओं को देने की कोशिश है. मंदिर में गर्भगृह के पहले ही बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन एलईडी पर श्रद्धालु कर सकेंगे और आने जाने वाले रास्तों को और भी खूबसूरत बनाया जा रहा है.

सभी रास्तों पर पेयजल की व्यवस्था भी होगी. इस बार मंदिर परिसर विस्तृत हुआ है तो इसका लाभ श्रद्धालुओं को होगा. शिवरात्रि पर इसका प्रयोग भी हो चुका है. हर गेट पर एंट्री-एग्जिट दोनों की व्यवस्था होगी. ताकि श्रद्धालु एक ही रास्ते से मंदिर में प्रवेश और बाद में निकल सके. रास्तों में रेड कार्पेट भी बीछा होगा. रास्तों में रेलिंग भी होगी. सभी गेट पर एलईडी की भी व्यवस्था होगी. ताकि उससे भी शिवलिंग के दर्शन हो सकेगे. आने वाले श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम या कॉरिडोर का स्वरुप भी देखने को मिलेगा.

 

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