एक तरफ स्कॉर्पियो गाड़ी विजयवाड़ा के बाहरी इलाके से गुजर रही थी. दूसरी तरफ, एक बस में सवार तीन लोग हैदराबाद की तरफ बढ़ रहे थे. पहली नजर में दोनों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं दिखता. लेकिन खुफिया जानकारी कुछ और ही कहानी बता रही थी. कहानी बांग्लादेश से जुड़ी है. वहां से सोना निकलता, कोलकाता के रास्ते आगे बढ़ता और फिर हैदराबाद पहुंचाया जाता.
इसी नेटवर्क की जानकारी राजस्व खुफिया निदेशालय यानी DRI को मिली थी. इसके बाद अधिकारियों ने ऐसा जाल बिछाया कि स्कॉर्पियो में बैठे दो लोग भी पकड़े गए और बस में सफर कर रहे तीन दूसरे लोग भी. कुल पांच गिरफ्तारियां हुईं. और इस कार्रवाई में सोने के तीन बिस्कुट बरामद हुए, जिनका वजन करीब 3.1 किलोग्राम है.
DRI की हैदराबाद जोनल यूनिट और विजयवाड़ा रीजनल यूनिट के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश से सोने की तस्करी करने वाला एक गिरोह एक्टिव है. सोने को कोलकाता के रास्ते हैदराबाद तक पहुंचाया जा रहा है. सूचना के बाद दोनों यूनिटों ने मिलकर एक्शन लिया. विजयवाड़ा के बाहरी इलाके में एक स्कॉर्पियो को रोका गया. गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसके भीतर एक सीक्रेट जगह मिली. इसमें विदेशी करेंसी रखी हुई थी.
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पूछताछ में दोनों ने अधिकारियों को बताया कि वे विजयवाड़ा के बाहरी इलाके में सोने की डिलीवरी करने आए थे. DRI के मुताबिक, गाड़ी से बरामद विदेशी करेंसी कथित तौर पर तस्करी के सोने की बिक्री से मिली थी. मामला सिर्फ सोना एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का नहीं था. उसके लेन-देन की कड़ी भी सामने आ रही थी.
स्कॉर्पियो की तलाशी और पूछताछ के बीच जांच की दूसरी कड़ी भी सामने आई. अधिकारियों को जानकारी मिली कि तीन लोग बस में सवार होकर हैदराबाद की ओर जा रहे हैं. टीम ने उनका पीछा करते हुए टोल प्लाजा पर बस को रुकवाया. फिर उन तीनों की तलाशी ली गई. इस बार सोना किसी गाड़ी के गुप्त चैंबर में नहीं था.

तीन सोने की छड़ें एक पाउच में थीं और उसे कमर के चारों ओर बांधा गया था. बरामद सोने का कुल वजन करीब 3.1 किलोग्राम था. एक तरफ स्कॉर्पियो में तस्करी के सोने की बिक्री से जुड़ी रकम मिली थी. दूसरी तरफ बस में ऐसे लोग पकड़े गए, जिनके पास सोने की छड़ें थीं. DRI के मुताबिक, पांचों लोग सोने की खरीद और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में शामिल थे.
DRI ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. लेकिन कहानी का एक अहम हिस्सा अभी बाकी है. जांच एजेंसी को अब इस कथित नेटवर्क की बाकी कड़ियों का पता लगाना है.
बांग्लादेश से सोना कौन भेज रहा था? कोलकाता में इसकी आवाजाही कैसे हो रही थी? हैदराबाद में इसे किस तक पहुंचाया जाना था? और इस पूरे कारोबार में कितने लोग शामिल हैं? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल DRI की कार्रवाई ने कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्त में पहुंचा दिया है.