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वोटर लिस्ट मैपिंग पर बरसे ओवैसी, कहा- 6 बच्चे होने पर वोट का अधिकार नहीं छिन सकता

असदुद्दीन ओवैसी ने परिवार के आकार और वोटिंग अधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो छह बच्चे होने पर किसी व्यक्ति का वोट देने का अधिकार छीन ले. उन्होंने अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बड़े परिवारों का उदाहरण भी दिया.

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ओवैसी ने कहा कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार है (File Photo- ITG)
ओवैसी ने कहा कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार है (File Photo- ITG)

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट के अपडेशन और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. ओवैसी ने वोटर लिस्ट में परिवारों की मैपिंग के दौरान आ रही दिक्कतों और बच्चों की संख्या को लेकर चल रही बहस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साफ कहा कि भारत के संविधान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी नागरिक को ज्यादा बच्चे होने की वजह से वोट डालने के अधिकार से वंचित करता हो.

हैदराबाद में लोगों को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, 'वोटर लिस्ट मैपिंग के दौरान यह कहा जा रहा है कि वे 5 से ज्यादा बच्चों को मैप नहीं कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, मेरे खुद के 6 बच्चे हैं. अगर किसी के 6 बच्चे हैं, तो गलती आपकी (अधिकारियों की) है. देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो यह कहे कि 6 बच्चे होने पर कोई वोट नहीं डाल सकता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद भाई-बहन मिलाकर 6 हैं, गृह मंत्री अमित शाह का परिवार भी बड़ा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवार में भी कई सदस्य हैं.' 

उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार है जो हर पात्र नागरिक को प्राप्त है.

ओवैसी ने वोटर लिस्ट के अपडेशन की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि 2002 और 2024 की वोटर लिस्ट का मिलान किया जा रहा है. जिन लोगों के नाम पुरानी लिस्ट में हैं, मजलिस उनकी मदद कर रही है. हालांकि, तकनीकी स्तर पर कई विसंगतियां सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति और उसके पिता की उम्र में सिर्फ 15 साल का फर्क आ रहा है, तो चुनाव आयोग उसे खामी मानकर दर्ज कर रहा है. इसी तरह दादा और पोता-पोती की उम्र के अंतर में भी तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिन्हें सुधारना बेहद जरूरी है.'

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25 जून से मिलेंगे एन्यूमरेशन फॉर्म, लापरवाही पर चेताया

AIMIM चीफ ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि आगामी 25 जून से एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे जाएंगे. उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस फॉर्म को लेकर घर में संभालकर न रखें, बल्कि इसे भरकर तुरंत जमा करें. ओवैसी ने कहा, 'अगर आप फॉर्म जमा नहीं करेंगे, तो आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आएगा. अगर आपका पता बदल गया है तो फॉर्म-8 भरें और नाम गायब है तो फॉर्म-6 भरें. फॉर्म पर हस्ताक्षर करें, नई फोटो लगाएं और बीएलओ के हवाले करें.'

जनता को सतर्क करते हुए ओवैसी ने कहा, 'यह सिर्फ वोट डालने का अधिकार खोने की बात नहीं है, बल्कि आपकी नागरिकता पर भी सवालिया निशान खड़ा हो सकता है. देश में ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो गरीबों, दलितों और मुसलमानों को वोटर लिस्ट से नाम हटाकर 'स्टेटलेस' (पहचान विहीन) बनाना चाहती हैं. मैं डराने के लिए नहीं, बल्कि हकीकत बयां कर रहा हूं. तेलंगाना के साथ-साथ महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखंड में भी समाज के जिम्मेदारों को इस पर कड़ी मेहनत करने की जरूरत है.'

ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड को भी मिले मान्यता

ओवैसी ने जानकारी दी कि मजलिस ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर दस्तावेजों की सूची को आसान बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास कास्ट सर्टिफिकेट या शैक्षणिक डिग्री नहीं है, उनके लिए चुनाव आयोग को ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और राशन कार्ड को भी पहचान के रूप में स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि ये सभी दस्तावेज सरकार द्वारा ही जारी किए जाते हैं.

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