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पहले से कम कीमत में मिलेगा स्वदेशी तेजस, 18000 करोड़ रुपये घटी लागत

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इस नई कीमत पर भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस मार्क 1ए विमान खरीदने के लिए हरी झंडी दे दी.

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तेजस विमान (फाइल फोटो)
तेजस विमान (फाइल फोटो)

  • तेजस विमान की कीमतों में कमी
  • 18000 करोड़ रुपये कम हुई कीमत

रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में स्वदेशी लड़ाकू विमान लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) यानी हल्के युद्धक विमान तेजस मार्क 1ए की खरीद को मंजूरी दी थी. वहीं अब इसकी कीमतों को लेकर खुशखबरी आई है. रक्षा मंत्रालय और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच इसकी लागत को लेकर तीन वर्षों से बातचीत चल रही थी. इसका नतीजा यह हुआ है कि तेजस के इस उन्नत संस्करण की खरीद की कीमत लगभग 18000 करोड़ रुपये कम हो गई है.

पहले इस खरीद की कीमत 56000 करोड़ थी, जिसे एचएएल की ओर से कम करके 38000 करोड़ पर लाया गया है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इस नई कीमत पर भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस मार्क 1ए विमान खरीदने के लिए हरी झंडी दे दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजीशन काउंसिल (DAC) ने बुधवार को इस विमान समझौते को मंजूरी दी थी.

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रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के मातहत इस एयरक्राफ्ट को 'एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट एजेंसी' (ADA) ने डिजाइन किया है और इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तैयार किया है. स्वदेशी रूप से तैयार किया गया यह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस भविष्य में भारतीय वायु सेना की रीढ़ बनने जा रहा है.

एडवांस वर्जन विमानों की खरीद

रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा, 'हालांकि एचएएल के साथ शुरुआत में 40 तेजस विमानों के ऑर्डर का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन डीएसी ने अनुबंध और अन्य मुद्दों को अंतिम रूप देकर एचएएल से इसके एडवांस वर्जन एमके 1ए के 83 विमानों की खरीद का मार्ग प्रशस्त किया. इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के विचारार्थ रखा जाएगा.'

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अतिरिक्त विमानों की संख्या का मतलब है कि भारतीय वायु सेना के लिए बढ़त की स्थिति होगी, क्योंकि इसके वर्तमान बेड़े की ताकत स्वीकृत संख्या से कम है. अब हर स्क्वाड्रन में 18 फाइटर जेट होंगे. 2016 में तेजस मार्क 1 को सेना में शामिल करने की योजना बनी ​थी, तब से अब तक 16 विमान सेवा में हैं. तेजस मार्क 1ए पहले के तेजस का एडवांस संस्करण है.

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वहीं रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस खरीद से 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि यह विमान स्वदेशी है. इसे डिजाइन करने से लेकर निर्माण में एचएएल के अलावा कई स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी है.

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