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नेताजी से जुड़ी फाइलों से गायब हुए अहम पन्ने, इसलिए रिलीज से कतरा रहा PMO

नेताजी से जुड़ी 1951 की फाइल में से चार अहम पन्ने गायब हैं, जबकि 1953 और 1954 की फाइलों में से भी कई पन्ने गायब हैं. अब ऐसे में यह जांच का विषय है कि कौन सी सरकार में वे पन्ने फाड़े गए.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जवाहर लाल नेहरू

नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों की आखिरी खेप सार्वजनिक करने की केंद्र सरकार की योजना एक बार फिर अधर में लटक गई है. शुक्रवार को रिलीज की गई ऐसी 25 फाइलों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सात में से पांच फाइलें ही रिलीज हो पाईं.

दो फाइलों से अहम पन्ने गायब
बताया जाता है कि नेताजी से जुड़ी दो फाइलों को इसलिए रिलीज नहीं किया गया, क्योंकि उनमें से कुछ अहम पन्ने गायब हैं. फाइलों के रिलीज की तारीख पंडित नेहरू की पुण्यतिथि 27 मई थी और फाइलें भी 1951 से 1954 के बीच नेहरू के काल की थीं. गायब पन्नों में तब के प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव और गृह मंत्रालय के सचिवों के नोट्स थे.

रिलीज पर नहीं मौजूद रहे संस्कृति मंत्री
साल 1951 की फाइल में से चार अहम पन्ने गायब हैं, जबकि 1953 और 1954 की फाइलों में से भी कई पन्ने गायब हैं. अब ऐसे में यह जांच का विषय है कि कौन सी सरकार में वे पन्ने फाड़े गए. पर इन फाइलों के खुलासे से कोई विवाद ना हो, इसलिए पहले हुए तीन समारोहों के उलट इस बार कोई समारोह नहीं हुआ. फाइलों की रिलीज पर ना तो संस्कृति मंत्री डॉक्टर महेश शर्मा मौजूद थे और ना ही मीडिया.

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फाइलें रोकने से खुश नहीं हैं PM
पीएमओ के सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फाइलें रोकने के कदम से खुश नहीं हैं. सरकार के सूत्र बताते हैं कि जून में अगली फाइलों में ये फाइलें हो सकती हैं. 27 मई को जिन फाइलों को सार्वजनिक करने के दर्जे में लाया गया, उनमें 1968 से 2008 के दौरान बनीं पीएमओ की पांच, गृह मंत्रालय की चार और विदेश मंत्रालय की 16 फाइलें हैं.

सभी फाइलें होंगी रिलीज
ने इस बाबत बस इतना ही कहा कि फाइलों को डिजिटलाइजेशन के अलावा कई तरह की तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसलिए कई बार इनमें देरी या जल्दी होती रहती है और सभी फाइलों को आने वाले वक्त नें रिलीज होना ही है.

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