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जुवेनाइल एक्‍ट में बदलाव से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 18 साल ही रहेगी नाबालिग की उम्र सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्‍ट में बदलाव करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि नाबालिग की मौजूदा उम्र सीमा में बदलाव करने की जरूरत नहीं है, जो कि अभी 18 साल है.

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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्‍ट में बदलाव करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि नाबालिग की मौजूदा उम्र सीमा में बदलाव करने की जरूरत नहीं है, जो कि अभी 18 साल है.

क्‍या आरोपी नाबालिग को फांसी की सजा सुनाई जानी चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद 18 साल की उम्र तक के लोग नाबालिग माने जाएंगे. दरअसल, पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में चलती बस में लड़की से गैंगरेप के एक आरोपी ने खुद को नाबालिग बताया था. इसके बाद ही पूरे देश में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की समीक्षा की मांग उठी थी.

इस गैंगरेप मामले में पहला फैसला 25 जुलाई को होने वाला है. इस आरोपी के नाबालिग होने की वजह से ज्यादा से ज्यादा केवल 3 साल की सजा हो सकती है.

नाबालिग ही सबसे बड़ा हैवान!
गौरतलब है कि दिल्ली गैंगरेप केस के बाद पूरा देश उबल उठा था. इस मामले में नाबालिग ही सबसे बड़ा हैवान माना जा रहा है.

नाबालिग आरोपी पर पीड़ित से दो बार रेप करने का आरोप है. आरोप है कि इस नाबालिग ने बेहोशी की हालत में लड़की से दूसरी बार रेप किया. लेकिन इस आरोपी को उसके गुनाहों के हिसाब से सजा नहीं मिल पाएगी, क्योंकि उसकी उम्र आड़े आ गई है.

सबसे घिनौनी करतूत करने वाले को जुवेनाइल बोर्ड भी नाबालिग मान चुका है. घटना के वक्त उसकी उम्र 17 साल, 6 महीने, 12 दिन थी. कानून की इस मजबूरी से नाबालिग आरोपी को मोहलत मिलेगी. जो भी सजा होगी, वह उसे जेल की बजाय बाल सुधार गृह में काटनी होगी.

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'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' की पैरवी
दिल्ली गैंगरेप पर सरकार ने भी सख्त रवैया अपनाया. सरकार ने इस केस को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' माने जाने की पैरवी की. इससे पहले, दिल्ली पुलिस नाबालिग की उम्र सीमा घटाकर 16 साल करने की वकालत कर रही थी.

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