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माओवादी नेता कोबाड गांधी के नार्को टेस्‍ट पर रोक लगी

माओवादी नेता कोबाड गांधी के नार्को टेस्‍ट पर दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने 14 दिसंबर तक के लिए रोक लगा दी है.

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माओवादी नेता कोबाड गांधी के नार्को टेस्‍ट पर दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने 14 दिसंबर तक के लिए रोक लगा दी है. कोबाड गांधी ने बुधवार को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नार्को टेस्‍ट पर रोक लगाने की बात की थी. अपने याचिका में कोबाड ने कहा था कि वह अपना नार्को टेस्ट नहीं कराना चाहता.

नार्को के लिए तैयार नहीं था कोबाड
कोबाद गांधी के अधिवक्ता विशाल गोसाईं ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि कोबाड नार्को टेस्ट से गुजरने के लिए तैयार नहीं है. विशाल ने याचिका में यह भी कहा था कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित कई याचिकाएं विचाराधीन है, इसलिए निचली अदालत द्वारा कोबाड ग़ांधी के नार्को टेस्ट की अनुमति दिए जाना अनुचित है.

31 अक्‍टूबर को मिला था नार्को टेस्‍ट का आदेश
उल्लेखनीय है कि तीस हजारी अदालत ने बीते 31 अक्टूबर को कोबाड ग़ांधी का नार्को टेस्ट कराने की अनुमति दे दी थी. अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्पेशल मेडिकल बोर्ड द्वारा अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद यह आदेश दिए थे. एम्स ने कोबाड का मेडिकल टेस्ट करने के बाद अदालत को बताया था कि वह नार्को टेस्ट के लिए बिल्कुल फिट है. दिल्ली पुलिस का कहना था कि अभी तक की जांच और पूछताछ में कोबाड गांधी ने उन्हें कोई सहयोग नहीं किया है.

कौन है कोबाड गांधी
शीर्ष नक्सल नेता कोबाड गांधी की गिरफ्तारी से नक्सल आन्दोलन को तगड़ा झटका लगा है. मुंबई का रहने वाला कोबाड गांधी की पढ़ाई दून स्कूल में हुई थी. उस दौरान संजय गांधी की पढ़ाई भी वहीं चल रही थी. उच्‍च शिक्षा के लिए कोबार्ड लन्दन गए लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत वापस आ गए. लन्दन से अपनी पढाई अधूरी छोड़ने के बाद कोबाड अनुराधा शानबाग नाम की एक लड़की के संपर्क में आये. अनुराधा मुंबई के एक नामी-गिरामी कॉलेज की छात्रा थी और उसके पिता मुंबई के बड़े वकील थे.समाजशास्त्र में एम्.फिल करते हुए अनुराधा झुग्गी-झोंपडियों में काम करने लगी थी. कोबाड की मुलाकात उनसे वहीं हुई और 1977 में शादी के बाद उन्होंने नागपुर में काम करना शुरू किया. कोबाड को पीपुल्स वार ने महाराष्ट्र में काम करने के लिए चुना. बाद में कोबाड गांधी ने दंडकारन्य में आदिवासियों के साथ काम करना शुरू किया.

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