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सोनिया या राहुल से मिलने के सवाल पर बोलीं ममता- किसी भी पार्टी में एक ही होता है लीडर

ममता का तमाम विरोधी पार्टियों से यही कहना है कि नरेंद्र मोदी की चुनौती का सामना करने के लिए सभी से हाथ मिलाना जरूरी है. मंगलवार को ममता ने जहां एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना सांसद संजय राउत, डीएमके नेता कनिमोझी आदि से अलग- अलग मुलाकात की.

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ममता बनर्जी और सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
ममता बनर्जी और सोनिया गांधी (फाइल फोटो)

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'दिल्ली चलो मिशन' से ये साफ हो गया है कि वे 2019 आम चुनाव के लिए खुद को बीजेपी विरोधी मोर्चे की धुरी बनाना चाहती हैं. अपने 3 दिन के इस मिशन में ममता की पुरजोर कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा विरोधी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ लड़ाई के लिए एकजुट हों. साथ ही उन पार्टियों को भी साथ लिया जाए जो या तो एनडीए से अलग हो चुकी हैं या बीजेपी की सहयोगी होते हुए भी खुले आम मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ नाराजगी जता रही हैं.  

ममता का तमाम विरोधी पार्टियों से यही कहना है कि नरेंद्र मोदी की चुनौती का सामना करने के लिए सभी से हाथ मिलाना जरूरी है. मंगलवार को ममता ने जहां एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना सांसद संजय राउत, डीएमके नेता कनिमोझी आदि से अलग- अलग मुलाकात की. वहीं बुधवार शाम को वे कांग्रेस नेता और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से चाय पर मिलने जा रही हैं.  

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ममता ने पहले भी के लिए कोशिश की थी लेकिन तब उन्हें बताया गया था कि सोनिया अस्वस्थ हैं. ममता को मंगलवार को जानकारी मिली कि सोनिया लोकसभा की बैठक में हिस्सा ले रही हैं. तब उन्होंने अपने दूत दिनेश त्रिवेदी को सोनिया के दफ्तर में भेजा लेकिन तब तक वो घर के लिए संसद भवन से निकल चुकी थीं.  

हालांकि ममता ने ये जताने में कसर नहीं छोड़ी कि उनके सोनिया के साथ बहुत अच्छे समीकरण हैं. जब ममता से ये सवाल पूछा गया कि क्या वे कांग्रेस में राहुल गांधी या सोनिया से मिलने जा रही हैं तो उनका जवाब था- 'किसी एक पार्टी में आपको एक ही लीडर से मिलने की जरूरत होती है.' बता दें कि सोनिया गांधी ने दो हफ्ते पहले जब विरोधी पार्टियों के नेताओं को डिनर के लिए न्योता दिया था तो ममता ने उसमें खुद शामिल ना होकर अपने प्रतिनिधि को भेजा था.

ममता बीजेपी के बागी खेमे में माने जाने वाले यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा और अरुण शोरी जैसे नेताओं से भी मिलीं. उनके ऐसा करने से साफ संदेश है कि वे सब कुछ करने को तैयार हैं जिससे धुर विरोधी बीजेपी को बेचैनी और परेशानी महसूस हो.  

ममता ने मंगलवार को तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वाई एस चौधरी से कहा था कि टीडीपी को बीजेपी की बदले की भावना वाली राजनीति से फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है. ने अपनी ओर से टीडीपी को पूरा समर्थन जताया. ममता दिल्ली प्रवास के पहले दिन यानी मंगलवार को सबसे ज्यादा खुश अपने पार्टी के दफ्तर में शिवसेना सांसद संजय राउत को देख कर हुई थीं. रिश्तों में बर्फ पिघलाने वाली इस मुलाकात के बाद शिवसेना नेता को अपना 'पसंदीदा व्यक्ति' बताया.

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बीजेपी के साम्प्रदायिक एजेंडे पर प्रहार करते हुए ममता ने कहा, 'मैं शिवसेना का सम्मान करती हूं. कोई भी पार्टी बीजेपी से ज्यादा साम्प्रदायिक नहीं है. कम से कम शिवसेना हाथ में बंदूक लेकर तो राजनीति नहीं करती...धर्म आपको कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं देता. ये धर्मनिरपेक्षता और संस्कृति दोनों के खिलाफ है...सभी धर्मों के खिलाफ है.'  

ममता का ये दिल्ली मिशन हाल में कोलकाता में उनकी तेलंगाना के सीएम के.चंद्रशेखर राव से हुई मुलाकात का ही विस्तार है. उस मुलाकात में गैर बीजेपी- गैर कांग्रेसी फेडेरल फ्रंट का विचार सामने आया था. ओडिशा और तेलंगाना में जिन दलों की सरकार है, उन्हें राज्य में कांग्रेस के विरोधी पार्टी होने के नाते उससे हाथ मिलाने में हिचक है.

मंगलवार को ममता से शरद पवार की मुलाकात के दौरान एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे. उन्होंने बैठक के बाद बताया कि ममता ने मुलाकात के दौरान जिक्र किया था कि किस तरह कुछ राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों का कांग्रेस के साथ मुकाबला है. प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अभी फेडरल फ्रंट के बारे में ठोस रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगा. बातचीत अभी शुरू हुई है. पटेल के मुताबिक शरद पवार ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक सहमति है और ये समझा जा सकता है कि बीजेपी को उखाड़ने का कोई भी प्रयास कांग्रेस की मदद लिए बिना पूरा नहीं हो सकता.   

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ममता दिल्ली में बीजू जनता दल, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं से भी मिल रही हैं. ममता ने कहा, सभी राजनीतिक दल साथ आएंगे...अगर यूपी में अखिलेश और मायावती साथ रहते हैं तो कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता. हम चाहते हैं कि मायावती और अखिलेश लखनऊ में एक बैठक बुलाएं. हम वहां जाएंगे. उन्हें हमें चाय के कप के लिए न्योता देना चाहिए.

ममता की इस पूरी कवायद का निचोड़ यही है कि वो 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की शिकस्त तय करने के लिए किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं.

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