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धर्मस्थल पर पूजा ठीक, सड़कों पर धर्म का प्रदर्शन राजनीतिक- मो सलीम

इंडिया टुडे क्नक्लेव ईस्ट 2018 में सीपीआएई(एम) मो. सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी कभी भी त्योहार और पूजा करने के खिलाफ कभी नहीं थी बल्कि धर्म का राजनीतिकरण के हम खिलाफ है. पिछले 200 साल से धार्मिक जुलूसों का दौर शुरू हुआ है और तब से धार्मिक दंगे भी हुए हैं.

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सीपीआई सांसद मो. सलीम (फोटो क्रेडिट, इंडिया टुडे)
सीपीआई सांसद मो. सलीम (फोटो क्रेडिट, इंडिया टुडे)

सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता और सांसद मो. सलीम ने कहा है कि उनकी पार्टी कभी भी पर्व-त्योहारों को मनाने के खिलाफ नहीं थी, उनका विरोध त्योहारों के राजनीतिकरण पर है.

कोलकाता में आयोजित इंडिया टुडे कॉनक्लेव ईस्ट 2018 में सलीम ने कहा, 'रामनवमी हो या जन्माष्टमी, ईद हो या बकरीद इन त्योहारों को मनाने से लेफ्ट को दिक्कत नहीं थी. ममता बनर्जी के आने से पहले भी ये होता आ रहा था. मोदी जी के अवतार लेने से पहले भी रामनवमी मनाई जा रही थी."

सांसद सलीम ने कहा कि रिलीजन तो ठीक है, लेकिन धार्मिक त्योहार, तिथि, दिवस इनका इस्तेमाल राजनीतिक गोलबंदी के लिए करना ये काफी आपत्तिजनक है. चाहे ममता बनर्जी का पूजा उत्सव या फिर उनका टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम के साथ होने. इसके अलावा चुनावी उद्देश्य के संत समागम कराना.

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उन्होंने कहा कि भारत में 200-300 साल पहले ना तो रामनवमी का जुलूस निकाला जाता था और ना ही मुहर्रम की झाकियां निकलती थी. 19वीं सदी के अंत में जब भारत में राष्ट्रवाद का उभार हो रहा था तब अंग्रेजों ने गुंडों और कट्टरपंथियों को पैसे दिए और धर्म को सड़कों-गलियों पर ला दिया गया.

मोहम्मद सलीम ने कहा कि इसका नतीजा ये हुआ कि अगले 100 सालों ज्यादातार दंगे मुहर्रम जुलूस के दौरान हुए और इसकी शुरुआत कानपुर में मुहर्रम जुलूस से हुई, क्योंकि हिंदू इसका विरोध कर रहे थे. इसी तरह से मुसलमानों ने भी हिंदूओं के रामनवमी जुलूस का विरोध किया.

सीपीएम नेता ने कहा कि यदि धर्म मंदिरों में है, इबादत घरों में है तो ये ठीक है, जैसे ही आप इसे वहां से बाहर निकालकर गलियों में ले आते हैं लड़ाइयां शुरू होने लगती हैं. इसीलिए हम धर्म को सड़क पर लाने का विरोध करते हैं.

बता दें कि कोलकाता में चल रहे इंडिया टुडे क्नक्लेव ईस्ट 2018 में इस वक्त विचारों के आदान-प्रदान का एक बड़ा मंच सजा है. इस विचार मंच में पूर्वोत्तर राज्यों के कई सीएम और मोदी सरकार के बड़े मंत्री शिरकत कर रहे हैं. यही नहीं इस जमावड़े में कई राजनीतिक दिग्गज, अर्थशास्त्री, जाने-माने फिल्मी सितारे कई समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखेंगे.

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कार्यक्रम में इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर इन चीफ अरुण पुरी ने कहा कि देश के 12 पूर्वी राज्य भारत की जीडीपी में 16 फीसदी योगदान देते हैं उन्होंने कहा कि ये राज्य शिक्षा और सभ्यता का केन्द्र रहे हैं. इंडिया टुडे की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा कि ये फोरम विचारों के लोकतांत्रिक आदान-प्रदान के लिए काम करेगा.

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